एक महीने का ब्रह्मचर्य : फौलादी शरीर, तेज दिमाग के साथ 7 अन्य फायदे जाने | 1 month ka brahmacharya

एक महीने का ब्रह्मचर्य ek maah ka brahmacharya : ब्रह्मचर्य मनुष्य जीवन का बहुत ही आवश्यक हिस्सा है हमारी ऋषि-मुनियों ने आदिकाल से ही ब्रम्हचर्य पर विशेष जोर दिया है बताया गया कि ब्रह्मचारी मनुष्य अपने अंदर असीम शक्तियों को इकट्ठा कर सकता है।

एक माह का ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य का सीधा तात्पर्य अपने वीर्य की रक्षा करने से है जीवन को सात्विक बनाना और शुभ विचारों के साथ काम करना आध्यात्मिक ध्यान और विद्या ग्रहण करना होता है। मनुष्य जीवन को चार आश्रमों में विभाजित किया गया जिसमें से ब्रम्हचर्य पहला वर्णाश्रम है।

वैदिक धर्म अनुसार 0 से 25 साल तक व्यक्ति अगर ब्रह्मचर्य का पालन करता है और इसी के सहारे विद्या ग्रहण करता है तो वह असाधारण ज्ञान का व्यक्ति बन जाता है इसलिए ब्रम्हचर्य पर विशेष बल दिया जाता है।

ब्रह्मचर्य को योग का एक स्तंभ माना गया है संसार में सभी प्रकार के सुखों को हम ब्रम्हचर्य से प्राप्त कर सकते हैं हमारे ऋषि मुनि हजारों वर्ष से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तब किया है और मोक्ष की प्राप्ति की है।

ब्रह्मचर्य के विषय में कहा गया है कि जिस प्रकार मनुष्य को सांस लेना जरूरी है उसी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी होना चाहिए। परंतु आज के दौर में मनुष्य ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पा रहा है युवा पल में ही अपने पुरुषत्व को खो देता है।

इन्हीं कारणों से आज व्यक्ति की आयु कम हो गई है ज्ञान की सीमा सीमित हो गई है और अपने अंदर के पुरुषत्व को खो चुका है फिर भी यदि व्यक्ति अपने अंदर शारीरिक शक्ति को बनाए रखना चाहता है तो कम से कम एक माह का ब्रह्मचर्य अवश्य करें।


एक महीने का ब्रह्मचर्य से क्या तात्पर्य है ? | ek maah ka brahmacharya se kya tatparya hai ?

सारांश ने कहा जाए तो एक माह का ब्रम्हचर्य से मतलब यह है कि यदि आप लैंगिक संसर्ग करते हैं तो एक बार संसर्ग करने के बाद कम से कम 1 से 2 माह तक संभोग ना करें अर्थात ब्रह्मचर्य का पालन करें।

अगर एक बार स्त्री गमन करते हैं तो अगले 1 माह तक ब्रम्हचर्य के रूप में ही रहे जिससे आपके अंदर शारीरिक शक्ति बरकरार रहेगी और अगर इस तरह से अंतराल के रूप में लैंगिक संभोग करते हैं तो आपको शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से लाभ मिलेगा।

जब दिखती अपने प्रारंभिक जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पा रहा है तो गृहस्थ आश्रम के दौरान कम से कम 2 महीने तक का ब्रम्हचर्य करें और अपने गृहस्थाश्रम को नियम पूर्वक सुख से व्यतीत करें इससे नर और नारी दोनों शक्तिशाली रहेंगे और कभी भी अस्वस्थ नहीं रहेंगे

एक महीने का ब्रह्मचर्य से लाभ | ek maah ka brahmacharya se labh

सांसारिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पाता है परंतु गृहस्थाश्रम में अपना जीवन जरूर व्यतीत करता है ब्रह्मचारी से सीधा तात्पर्य अपने वीर्य की रक्षा करना है इसलिए जब भी आप गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करें तो अपने जीवन में लैंगिक संसर्ग ब्रम्हचर्य को भी अपनाते रहे।

गृहस्थ आश्रम में रहते हैं अगर आप एक माह का ब्रम्हचर्य अपना के रहते हैं तो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से अनेकों लाभ प्राप्त होते हैं आइए हम एक माह का ब्रम्हचर्य से लाभ के बारे में बताते हैं

1. शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे

गृहस्थ आश्रम में स्त्री के साथ रहते हैं जब लैंगिक संसर्ग करते हैं तो बीच-बीच में एक माह का ब्रम्हचर्य के नियम का भी पालन करते रहें इससे आपको शारीरिक रूप से लाभ मिलेगा स्त्री और पुरुष दोनों में शक्ति बनी रहेगी कभी अस्वस्थ नहीं होंगे।

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बीमारियों से छुटकारा मिलेगा इसीलिए आप अगर किसी भी प्रकार के डॉक्टर से दूर रहना चाहते हैं तो कम से कम 1 या 2 माह का ब्रह्मचर्य का पालन करें इससे आपके अंदर किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या नहीं होगी।

अगर आपका शरीर स्वस्थ रहेगा तो आपके अंदर सुस्ती आलस्य जैसी चीजें नहीं होंगी किसी भी काम में आपका मन लगेगा और बेवजह किसी डॉक्टर के पास जाकर पैसा नहीं गवाना पड़ेगा।

2. शारीरिक शक्ति और चमक बनी रहेगी

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जब आप एक मौका ब्रह्मचारी अपना लेते हैं तो शरीर में किसी भी प्रकार की चिंता नहीं आएगी हमारा शरीर हर वक्त क्रिया के लिए शक्तिशाली रहेगा और कोई भी काम करने में क्षमता प्राप्त हो जाती है।

3. बौद्धिक क्षमता में विकास

अगर व्यक्ति ब्रम्हचर्य का पालन प्रारंभिक दौर से ही करता है तो उसके अंदर बौद्धिक क्षमता का विकास होता है यहां तक कि वह अद्वितीय ज्ञान का भंडार प्राप्त कर लेता है। उसके अंदर तर्कपूर्ण बात करने की क्षमता विकसित होती है मानसिक रूप से सशक्त रहता है।

4. धैर्यवान

अगर व्यक्ति गृहस्थ आश्रम में भी एक माह का ब्रह्मचर्य का पालन करता है तब भी व्यक्ति के अंदर धैर्य की कमी नहीं रहती वहीं अगर वह बचपन से ही ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो वह अत्यधिक धैर्यवान व्यक्ति होता है।

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ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले व्यक्ति के अंदर किसी भी कार्य को करने की जल्दबाजी नहीं होती और जो भी कदम उठाता है वह धैर्य के साथ ही करता है।

5. दीर्घायु प्राप्त करना

अगर व्यक्ति जन्म से 25 वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो ऐसे व्यक्ति एक लंबी आयु जीते हैं क्योंकि इनके अंदर सहनशक्ति बहुत मजबूत हो जाती है वास्तव में ब्रम्हचर्य में हम अपने वीर्य की सुरक्षा करते हैं जो हमारे पुरुषत्व की निशानी होता है।

6. बलिष्ठता

ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला व्यक्ति अपने अंदर ऐसे पुरुषत्व को प्राप्त कर लेता है जिसकी वजह से उसके शरीर में असीम बल आ जाता है वह शारीरिक और मानसिक रूप से ताकतवर होता है।

फिर भी अगर आप गृहस्थ आश्रम में जीवन व्यतीत करते हैं और स्त्री के साथ संभोग करते हैं और इनके बीच में एक माह का ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए आगे बढ़ते हैं तब भी आपके शरीर में शक्ति बनी रहती है।

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

आज लोग कामवासना की शिकार हो गए हैं जिसकी वजह से भी अपने वीर्य का पतन कर देते हैं ऐसे में उनकी शारीरिक शक्ति क्षीण हो जाती है इसीलिए अगर आप ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए काम कर रहे हैं तो आपके अंदर अत्यधिक ताकत बन जाती है।

7. सहनशीलता

अगर मनुष्य एक ब्रह्मचारी है तो उसके अंदर साहस है और तकलीफ जैसी चीजों को सहन करने की क्षमता प्राप्त हो जाती है वह हर प्रकार की समस्या में मुकाबला करने के लिए सक्षम होता है।

एक ब्रह्मचारी मनुष्य को अच्छे बुरे का ध्यान रहता है किसी भी प्रकार के संकट या समस्या में बहुत ही सहनशीलता के साथ कदम उठाता है और हमेशा सफल होता है।

आज के समय में लोग मांस मदिरा का सेवन अधिक कहने लगे जिसकी वजह से उनके अंदर इंद्रियां प्रभावित हो गई बुद्धि विवेक खत्म हो गया अपने बुरे की पहचान नहीं रहती है और पागलों के जैसा व्यवहार करने लगता है।

वहीं अगर आप ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए आगे बढ़ते हैं तो हमें किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है बल्कि हम पूरी सहनशीलता के साथ और संयमित होकर आगे बढ़ते हैं।

8. संयम

जो व्यक्ति संयम से काम करते हैं उनके अंदर स्मरण शक्ति आरोग्यता कीर्ति दीर्घायु प्राप्त होती है और ऐसे व्यक्ति सभी प्रकार की शक्तियों से भरपूर होने से देर से वृद्धावस्था को प्राप्त करते हैं।

ब्रह्मचारी व्यक्ति धर्म के अनुकूल कार्य करते हैं और हमेशा निर्मल हृदय से सब के प्रति हितकारी होते हैं। ब्रह्मचारी एक बहुमूल्य और प्रभावशाली रत्न है।

9. एकाग्रता

ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले व्यक्ति में एकाग्रता पाई जाती है वे अपने किसी कार्य को बड़ी ही सावधानी पूर्वक एकाग्र भाव से कर सकते हैं क्योंकि एकाग्रता ध्यान के लिए आवश्यक है ऐसे में जो व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन कर सकता है वही एकाग्रता को जीत सकता है।

ब्रह्मचर्य के विषय में ऋषि मुनियों के कथन

ब्रह्मचर्य के विषय में हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा बहुत ही महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं कुछ महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार से हैं।

पतंजलि

ब्रह्मचर्य के पालन से आत्मबल प्राप्त होता है.

सनत्सुजात मुनि

ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने वालों को मोक्ष मिलता है.

ऋग्वेद

मनुष्य बिना ब्रह्मचर्य धारण किये हुए कदापि पूर्ण नहीं हो सकते.

देवर्षि नारद

ब्रह्मचर्य का पालन ब्रह्मपद का मूल है,

जो अक्षय-पुण्य को पाना चाहता है,

वह निष्ठा से जीवन व्यतीत करे.

मुनीन्द्र गर्ग

ब्रह्मचर्य से मनुष्य दिव्यता को प्राप्त होता है।

शरीर के त्यागने पर सद्गति मिलती है.

मुनि अत्रि

ब्रह्मचर्य के संरक्षण से ही मनुष्य को सब लोको में सुख देने वाली सिद्धियां प्राप्त होती है .

पिप्पलाद

ब्रह्मचर्य से ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त होती है।

अमृतसिद्ध

जो मनुष्य ब्रह्मचारी नहीं उसको कभी सिद्धि नहीं होती, वह जन्ममरणादि क्लेशों को बार-बार भोगता रहता है.

योगिराज कृष्ण

ब्रह्मचर्य और अहिंसा शारीरिक तप है.

FAQ : एक महीने का ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचारी को क्या नहीं खाना चाहिए ?

ब्रह्मचारी पुरुष को मांस मदिरा लहसुन प्याज तली भुनी चीजें तुरंत छोड़ देनी चाहिए।

1 साल तक ब्रम्हचर्य करने से क्या होगा ?

अगर आप 1 साल तक ब्रम्हचर्य का पालन करते हैं तो आपके अंदर शारीरिक शक्ति बढ़ जाती है और शारीरिक क्षमता बढ़ जाती है रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

ब्रह्मचर्य क्या है ?

ब्रह्मचारी का सीधा तात्पर्य अपने वीर्य की रक्षा करना है यह वीर्य ही हमारे शरीर में तेज पैदा करता है और हमें बलिष्ट बनाता है जो पुरुषत्व की निशानी है

निष्कर्ष

सभी स्त्री-पुरुष यदि ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं तो निश्चय है कि वह मोक्ष के हकदार बन जाते हैं अगर वे गृहस्थ आश्रम में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं तो भी उनके अंदर शक्ति का संचार बना रहता है।

ऐसे व्यक्ति जो ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पा रहे हैं तो उनके लिए गृहस्थ आश्रम में कम से कम एक माह का ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें इससे भी शारीरिक क्षमता व शक्ति बनी रहती है।

osir news

यदि कोई भी स्त्री पुरुष अपने पुरुषत्व को बचाए रखना चाहता है तो प्रथम कर्तव्य के रूप में ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें जिससे जीवन में कई प्रकार की परेशानियों से हम बहुत दूर हो जाएंगे और जीवन बहुत ही सुखमय हो जाता है।

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