खाटू श्याम जी की जीवन कथा और सम्पूर्ण जानकारी : खाटू श्याम जी कौन हैं ? | Khatu shyam ji ki jivan katha

खाटू श्याम जी की जीवन कथा Khatu shyam ji ki jivan katha : हेलो दोस्तों नमस्कार आज मैं आप लोगों को इस लेख के माध्यम से खाटू श्याम जी की जीवन कथा के विषय में संपूर्ण जानकारी प्रदान करूंगी, जिसमें मैं आप लोगों को बताऊंगी खाटू श्याम जी कौन है और इनका खाटू श्याम नाम कैसे पड़ा, तथा इनके संपूर्ण जीवन कथा क्या है ? क्योंकि जयपुर के सिकरी जिले में खाटू श्याम जी का मंदिर बना है.

खाटू श्याम जी की जीवन कथा Khatu shyam ji ki jivan katha

जहां पर हर साल के होली वाले दिन वहां पर खाटू श्याम के नाम का मेला लगता है और लाखों की संख्या में खाटू श्याम के श्रद्धालु भक्त इनके दर्शन प्राप्त करके इनकी कृपा प्राप्त करते हैं. खाटू श्याम के इस मंदिर को कृष्ण के सभी मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय मंदिर माना गया है इसके पीछे एक पौराणिक कथा है

खाटू श्याम जी का मंदिर महाभारत में पांडवों और कौरवों के बीच चल रहे युद्ध के दौरान बना था. क्योंकि खाटू श्याम जी के मंदिर का संबंध महाभारत के युद्ध से ही जुड़ा हुआ है, यही सबसे खास वजह है कि अधिक संख्या में खाटू श्याम के श्रद्धालु भक्त और अन्य लोग खाटू श्याम के जीवन कथा की जानकारी को प्राप्त करने के इच्छुक हैं.

क्योंकि हर कोई जानना चाहता है कि खाटू श्याम का महाभारत से क्या संबंध था ? जिसकी वजह से खाटू श्याम की इतनी महिमा है ऐसे में अगर आप लोग भी खाटू श्याम की जीवन कथा के विषय में संपूर्ण जानकारी पूरी तरह से प्राप्त करना चाहते हैं तो कृपया करके इस लेख को शुरू से अंत तक अवश्य पढ़ें.

खाटू श्याम कौन हैं ? | Khatu shyam kaun hai ?

खाटू श्याम बनने से पहले पांडुपुत्र भीम तथा नागकन्या मौरवी के पुत्र थे, जिसका नाम बर्बरीक था बर्बरीक एक महान और धार्मिक प्रवृत्ति का योद्धा था, जिसके अंदर परोपकार की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी बचपन से लेकर युवावस्था तक बर्बरीक ने महादेव की गोर तपस्या करके तीन महाशक्तिशाली दिव्य बाण प्राप्त किए थे जो समस्त सृष्टि का विनाश कर सकती थी.

खाटू श्याम


इसके अलावा अनेक सिद्धियां भी प्राप्त की थी, जिसे कौरव और पांडव के युद्ध के दौरान श्री कृष्ण के वरदान के दौरान खाटू श्याम बनाने का वरदान प्राप्त हुआ और तभी से बर्बरीक खाटू श्याम श्री कृष्ण के कलयुग अवतारी के रूप में पूजे जाते हैं.

खाटू श्याम जी की जीवन कथा | Khatu shyam ji ki jivan katha

खाटू श्याम जी की जीवन कथा की शुरुआत महाभारत के युद्ध से होती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता है जब कौरव और पांडव के बीच कुरुक्षेत्र में जंग लड़ने के लिए युद्ध की तैयारी की गई थी तो फिर इस युद्ध के विषय में बड़े-बड़े राजा महाराजा और अन्य लोगों तक जानकारी फैल गई थी यहां तक कि कौरव और पांडवों के इस महान युद्ध के विषय में ब्रह्मांड में भी खबर पहुंच गई थी, बहुत दूर-दूर से लोग इस युद्ध में शामिल होने तथा देखने के लिए तैयार होने लगे और जब इस युद्ध के विषय में बर्बरीक ने सुना, तो फिर इन्होंने अपनी मां से युद्ध देखने जाने की इच्छा जाहिर की मगर इनकी मां मौरवी ने इन्हें युद्ध में जाने से मना कर दिया. लेकिन इनके बार-बार जिद करने की वजह से मौरवी ने इन्हें युद्ध में जाने की इजाजत दे दी.

लेकिन उन्होंने कहा युद्ध में जाने के पश्चात हारे का सहारा बनना, तब बर्बरीक ने अपनी मां को वचन दिया कि मैं उस पक्ष की ओर से लडूगा जो निर्बल और कमजोर होगा. इतना कहकर बर्बरीक अपना नीला घोड़ा लेकर उस पर सवार होकर कुरुक्षेत्र की ओर कौरव और पांडव के बीच चल रहे युद्ध को देखने के लिए प्रस्थान किया. उधर श्री कृष्ण जो पांडवों की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे उन्हें मालूम था कि अगर बर्बरीक युद्ध में शामिल हुआ तो पांडवों की हार निश्चित है.

इसीलिए श्री कृष्ण ने बर्बरीक को रोकने के लिए ब्राह्मण का रूप धारण करके युद्ध की ओर आ रहे बर्बरीक के पास पहुंचकर बर्बरीक को रोककर कहा आप कुरुक्षेत्र की ओर कहां जा रहे हैं तब बर्बरीक ने कहां की कुरुक्षेत्र में पांडवों और कौरवों के बीच में युद्ध होने वाला है. उसी युद्ध को देखने के लिए हम जा रहे हैं. अब ब्राह्मण के रूप में श्री कृष्ण ने बर्बरीक से प्रश्न पूछा आप युद्ध में किसकी तरफ शामिल होंगे. तब बर्बरीक ने मुस्कुराते हुए कहां जो दल निर्बल और हारने वाला होगा मैं उसी की तरफ से युद्ध लडुगा.

अब ब्राह्मण के रूप में श्री कृष्ण ने कहा आपके पास तो सेना भी नहीं है आपके पास सिर्फ तीन बाण है तीन बाण से आप इतनी विशाल सेना का सामना कैसे कर पाएंगे, तो बर्बरीक ने मुस्कुराते हुए कहा यह तीन बाण पूरी सृष्टि का विनाश कर सकती हैं. जिनमें से एक बाण कौरव और पांडव के बीच हो रहे युद्ध को खत्म करने के लिए पर्याप्त है. बर्बरीक की इतनी बात सुनकर श्री कृष्ण ने ब्राह्मण रूप में बर्बरीक को चुनौती देते हुए कहा अगर आपके पास इतनी शक्ति है तो हमारे सामने यह जो पीपल का वृक्ष है इसमें जितने भी पत्तियां हैं सभी में छेद करके दिखाओ.

खाटू श्याम

श्री कृष्ण की इतनी बात सुनकर बर्बरीक ने एक बाण धनुष पर तान कर उस वृक्ष की ओर चलाई और उस बाण से वृक्ष पर जितने भी पत्ते थे सब छेद हो गए थे एक पत्ता श्री कृष्ण के पैर के नीचे दबा हुआ था तो वह बाण श्री कृष्ण के पैर के चारों तरफ चक्कर लगा रही थी तब बर्बरीक ने श्री कृष्ण से कहा आप अपना पैर हटा लीजिए नहीं तो यह बाण आपके पैर को भी छेद कर देगी. क्योंकि आपके पैर के नीचे आवश्य पीपल का पत्ता है तब श्री कृष्ण ने अपना पैर हटाया तो सच में उनके पैर के नीचे पीपल का एक पत्ता था जिसे छेदने के बाद वह बाण तुरंत बर्बरीक के पास वापस आ गई.

बर्बरीक की इस महान शक्ति को देखकर श्री कृष्ण सोच में पड़ गए और मन में सोचने लगे किस तरह से मैं बर्बरीक को युद्ध में शामिल होने से रोके. कुछ समय पश्चात श्री कृष्ण ने ब्राह्मण रूप में श्री कृष्णा बर्बरीक से कहा आप तो इतने महान शक्तिशाली और पराक्रमी व्यक्ति हैं क्या रास्ते में मिले मुझ गरीब ब्राह्मण को कुछ दान नहीं देंगे. श्री कृष्ण की इस बात को सुनकर बर्बरीक ने श्री कृष्ण को एक सामान्य ब्राह्मण समझते हुए कहा मांगो आपको क्या मांगना हैं मैं आपको आपकी इच्छा के अनुसार दान दूंगा.

तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा आप मुझे वचन दीजिए कि मैं आपसे जो मांग लूंगा आप देने से इनकार नहीं करेंगे. बर्बरीक ने श्री कृष्ण को वचन देते हुए कहा आप जो मांगेंगे मैं आपको खुशी खुशी दान में दूंगा आप मांगीए आपको क्या चाहिए. जैसे ही श्री कृष्ण ने बर्बरीक के वचन की बात सुनी तो श्रीकृष्ण ने दान में बर्बरीक का शीष मांग लिया. बर्बरीक ने जैसे ही ब्राह्मण के इस दान को सुना तो वह समझ गए कि यह कोई सामान्य ब्राह्मण नहीं है तो बर्बरीक ने श्रीकृष्ण से हाथ जोड़कर निवेदन किया आप अपने असली रूप में आ जाइए और अपना संपूर्ण परिचय हमें बताइए मैं वचन देता हूं.

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मैं अपने वचन के मुताबिक आपके चरणों में अपना शीश दान करूंगा. बर्बरीक कि इस बात को सुनकर श्री कृष्ण अपने असली रूप में आ गए और बर्बरीक से अपना संपूर्ण परिचय दिया. बर्बरीक ने श्री कृष्ण के विषय में सब कुछ जानने के पश्चात उन्हें अपना शीश दान करने से पहले एक इच्छा जताई कहा हे प्रभु मैं कौरव और पांडवों के बीच चल रहे युद्ध को देखना चाहता हूं इसीलिए आप मेरा शीश दान में ले लीजिए मगर मुझे उस युद्ध का चित्रण करा दीजिए.

बर्बरीक की इस बात से श्रीकृष्ण सहमत हो गए उसके पश्चात बर्बरीक ने खुशी-खुशी अपना शीश श्री कृष्ण के चरणो में दान कर दिया. शीश दान के बाद श्री कृष्ण ने बर्बरीक के शीश को युद्ध अवलोकन करने के लिए एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर उनके सिर को रख दिया ताकि वह आसानी से संपूर्ण युद्ध को देख सकें. इस तरह से बर्बरीक ने पांडवों और कौरवों के बीच चल रहे संपूर्ण युद्ध को शुरू से अंत तक देखा अंत में विजई पांडव को प्राप्त हुई थी.

पांडव को विजई प्राप्त होने के पश्चात सभी भाई आपस में युद्ध का श्रेय पाने के लिए लड़ रहे थे तभी श्री कृष्ण ने पांडव को समझाते हुए कहा युद्ध का श्रेय किसको मिलना चाहिए इसका निर्णय बर्बरीक का सिर कर सकता है. तब पांचो पांडव और श्री कृष्ण बर्बरीक के सिर के पास पहुंचे और श्री कृष्ण ने बर्बरीक से हाथ जोड़कर निवेदन किया, हे बर्बरीक आपने संपूर्ण युद्ध को शुरू से अंत तक देखा है इसीलिए आप यह बताएं कि इस युद्ध का श्रेय किसको मिलना चाहिए.

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

श्री कृष्ण की बात को सुनकर बर्बरीक ने जवाब दिया युद्ध के दौरान श्री कृष्ण का चक्र चल रहा था जिसकी वजह से कौरव की सभी सेना कटे हुए वृक्ष की तरह पराजित होकर भूमि पर गिर रही थी और उधर द्रोपती काली का रूप धारण करके रक्तपान कर रही थी जिसकी वजह से इस युद्ध का श्रेय श्रीकृष्ण को मिलता है.

बर्बरीक कि इस बात को सुनकर पांडव को बहुत शर्मिंदगी का अनुभव हुआ और उन्होंने श्री कृष्ण से माफी मांगी और बर्बरीक को धन्यवाद दिया. बर्बरीक की दानवीरता और सच्ची बातों को सुनकर श्री कृष्ण बर्बरीक से बेहद ही प्रसन्न हुए और उन्होंने बर्बरीक को वरदान दिया और कहा कलयुग में आप हमारे अवतार में पूजे जाएंगे और जो भी श्रद्धालु भक्त आपके दरबार में आएगा उसके समस्त दुखों का निवारण होगा तथा उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होंगी.

कृष्ण के वरदान के बाद जयपुर के सिकरी जिले में खाटू श्याम बाबा का एक बहुत ही विशाल मंदिर बनकर तैयार हो गया जिसमें कृष्ण की मूर्ति की स्थापना की गई और तब से होली वाले दिन हर साल यहां मेला लगता है और हजारों खाटू बाबा के भक्ति इनके दर्शन करके इनकी कृपा को प्राप्त करते हैं. इसी कथा को खाटू श्याम बाबा के जीवन से संबंधित कथा कहा गया है, अब आइए जानते हैं खाटू श्याम जी कैसे प्रकट हुए थे.

खाटू श्याम कैसे प्रसिद्ध हुए इसकी कथा ?

कलयुग का प्रसार बढ़ने के पश्चात बर्बरीक ने श्री कृष्ण के वरदान के मुताबिक खाटू श्याम रूप में प्रकट होने की अभिलाषा की उसके पश्चात बड़े ही चमत्कारी ढंग से स्वप्न दर्शनोंपरांत बर्बरीक खटू श्याम बाबा के रूप में खाटू धाम में स्थित कुंड से प्रकट हुए थे. तत्कालीन खंडेला का राजा धार्मिक प्रवृत्ति का था. जिसने खट्टू में शिव मंदिर बनवाया था और रोज प्रातकाल उनकी पूजा-अर्चना करने के लिए जाता था, राजा के पास जितनी भी गाय थी कुछ कुछ ग्वाले गायों को खाटू धाम तक चराने के लिए लाया करते थे.

1 दिन ग्वालों ने देखा एक गाय एक एक ही स्थान पर खड़ी है और उसकी थानों से दूध अपने आप बहकर जमीन में समाहित होता जा रहा था. ग्वालों ने इस बात को मात्र एक सहयोग समझ कर भुला दिया. लेकिन यह सिलसिला जब लगातार दो-तीन दिन तक चला तो फिर ग्वालों ने इस बात की खबर राजा को दी. राजा ने इस नजारे को अपनी आंखों से देखा तो उसके तुरंत पश्चात राजा ईश्वर से हाथ जोड़कर प्रार्थना के तौर पर माफी मांगने लगा हे ईश्वर मुझसे कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ कर दीजिए.

khatu shyam

उसी रात भगवान श्याम ने राजा को सपने में दर्शन दिया और कहा राजन आपको उस घटना से भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं मैं श्याम हूं. इसके पश्चात श्याम ने राजा से कहा जिस स्थान पर गाय का दूध समाहित होता जा रहा था. उस स्थान की खुदाई करो उस स्थान पर मेरा शालाग्राम शिलारूप विग्रह है. उसे विधिपूर्वक स्थापित कर दो तुम्हारी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंगी, और जो भी श्रद्धालु भक्त इस मंदिर पर हमारे दर्शन प्राप्त करने के लिए आएगा उसके समस्त दुखों का निवारण होगा.

इतना कहकर श्री कृष्ण राजा के सपने से विलुप्त हो गए. प्रातकाल राजा ने उस स्थान पर खुदाई करवाई तो कुछ गहराई पर शालाग्राम शिलारूप विग्रह निकल आया. शालाग्राम शिलारूप निकलने पर राजा ने उस स्थान पर महान विद्वानों और पंडितों से शालाग्राम शिलारूप की मूर्ति को विधिपूर्वक स्थापित करवा दिया गया. उसके कुछ समय पश्चात राजा ने यहां पर एक भव्य मंदिर बना कर तैयार करवा दिया, जो आज के समय में भी विद्यमान है.

जिस स्थान पर विग्रह निकला था उस स्थान पर श्याम कुंड बना है. जिसके जल को भक्त गंगाजल की भाती पवित्र मानते हैं, ऐसी मान्यता है जो भी व्यक्ति इस कुंड में स्नान करता है उसके सभी प्रकार के पाप दूर हो जाते हैं और वह व्यक्ति हर प्रकार की शारीरिक पीड़ा से भी मुक्ति पा जाता है. इसीलिए हर साल में होली वाले दिन यहां पर मेला लगता है और खाटू श्याम बाबा के हजारों लाखों करोड़ों भक्त इनके दर्शन करके इनकी कृपा को प्राप्त करते हैं.

खाटू जी के अन्य नाम | khatu ji ke naam

  1. तीन बाण धारी
  2. हारे का सहारा
  3. लखदातार
  4. शीश के दानी
  5. मोर छड़ी धारक

खाटू श्याम बाबा को इन नामों से भी जाना जाता है. इस तरह से खाटू श्याम बाबा का जन्म हुआ यही है खाटू बाबा के जीवन की संपूर्ण कथा.

FAQ : खाटू श्याम जी की जीवन कथा

खाटू श्याम के दर्शन के लिए कब जाना चाहिए ?

वैसे तो आप कभी भी खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए जा सकते हैं लेकिन होली वाले दिन खाटू धाम में इनका बहुत ही विशाल मेला लगता है जिसे देखने के लिए लाखों भक्तों आते हैं ऐसे में इस दिन आप खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए जा सकते हैं.

खाटू धाम कहां पर स्थित है ?

खाटू धाम जयपुर से 75 किलोमीटर दूर से सीकरी जिले में स्थित है.

खाटू श्याम किसका अवतार है ?

खाटू श्याम श्री कृष्ण के कलयुग अवतारी रूप में पूजे जाने वाले खाटू श्याम हैं.

निष्कर्ष

तो मित्रों आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से खाटू श्याम बाबा के जीवन की कथा से संबंधित जानकारी प्रदान की है जिसमें हमने आप लोगों को बताया है खाटू श्याम बाबा कौन हैं और यह किस तरह से खाटू श्याम बाबा बने तथा इनकी जीवन की संपूर्ण कथा क्या है ?

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अगर आप लोगों ने इस लेख को शुरू से अंत तक पढ़ा होगा तो आप लोगों को खाटू श्याम बाबा के जीवन से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त हो गई होगी, तो मित्रों मैं उम्मीद करती हूं आप लोगों को हमारे द्वारा बताई गई जानकारी पसंद आई होगी और उपयोगी भी साबित हुई होगी.

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