पूजा संपूर्ण मंत्र : पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए ? | Puja karte samay kaun sa Mantra bolna chahiye


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पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए ? | Puja karte samay kaun sa Mantra bolna chahiye : हेलो दोस्तो नमस्कार स्वागत है आपका हमारे आज के लेख में आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं वैसे तो अधिकतर लोगों को पता होगा कि हमारे हिंदू सनातन धर्म में लगभग स्नानादि करने के बाद ही हर घर में पूजा करने की परंपरा होती है.

हमारे हिंदू धर्म में सभी लोग सुबह उठकर स्नान आदि से निश्चिंत होने के बाद सबसे पहले देवी – देवता की पूजा करते हैं उसके बाद अपने दिन की शुरुआत करते हैं ऐसा करने से हमारे इष्ट देव अथवा हमारे देवी – देवता का आशीर्वाद हमें प्राप्त होता है इसके अलावा हमारे हिंदू सनातन धर्म में कुछ ऐसे मंत्रों का उच्चारण बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

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जोकि पूजा करने के दौरान उन मंत्रों का उच्चारण काफी लोग करते हैं ऐसे में कुछ लोगों को तो पूजा करते समय मंत्र बोलने के बारे में जानकारी ही नहीं प्राप्त होती है इसीलिए वह कभी भी पूजा करते समय मंत्र जाप नहीं कर पाते है अगर आप में से भी कोई भी व्यक्ति पूजा के दौरान बोले जाने वाले मंत्र के बारे में नहीं जानता है.

तो आज हम उन सभी लोगों को इस लेख के माध्यम से पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए इसके बारे में जानकारी देंगे इसके अलावा प्रतिदिन पूजा करने की विधि क्या है और उससे जुड़े अन्य टॉपिक के बारे में भी जानकारी देंगे.

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अगर आप में से कोई भी व्यक्ति इन सारे विषयों के बारे में जानने के लिए उत्सुक है तो वह व्यक्ति हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें ताकि उस व्यक्ति को उन सारे विषयों के बारे में जानकारी मिल सके जो वह जानना चाहता है।

सुबह उठते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए  ? | Subah uthate Samay kaun sa Mantra bolna chahiye ?

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कराग्रे वसति लक्ष्मीः, कर मध्ये सरस्वती।

करमूले तू ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्।।

आप में से कई ऐसे लोग होंगे जिनको इसके बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं है कि सुबह उठते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए और उस मंत्र जाप से क्या लाभ होते हैं सुबह उठते समय ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें जैसे ही आप सुबह सो के उठते हैं पहले उन्हें अपने दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़ लेना है.

उसके बाद ऊपर दिए गए मंत्र का अपनी इच्छा अनुसार या फिर 5,7 या 11 बार मंत्र का उच्चारण करना है। अगर आप में से कोई भी व्यक्ति इस मंत्र का सुबह उठकर उच्चारण करता है तो उसका पूरा दिन बहुत ही अच्छा जाता है और वह पूरा दिन स्वस्थ रहता है कि पूरे शरीर में एनर्जी भरी रहती है और वह पूरे दिन पूरी मेहनत और लगन के साथ कार्य करता है।

पूजा में क्षमा मांगने के लिए मंत्र | Puja Mein kshma mangne ke liye Mantra

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।

पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए ? | Puja karte samay kaun sa Mantra bolna chahiye ?

काफी लोगों को इसके बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं है की पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए क्योंकि जो लोग भी सुबह उठकर अपने घर के मंदिर में पूजा पाठ करते हैं तो वह साधारण तरीके से अपने भगवानों को नहलाकर उन्हें फूलमाला अर्पित करके और आरती करके पूजा को संपन्न कर लेते हैं.

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लेकिन उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती है कि सुबह के समय अपने घर में या फिर किसी धार्मिक अनुष्ठान में पूजा करते समय कई ऐसे मंत्र होते हैं जिन का उच्चारण किया जाता है उन मंत्रों का उच्चारण करने के लिए हमने आपको नीचे उस मंत्र के बारे में बता दिया है आप उसी मंत्र का उच्चारण पूजा करते समय कर सकते हैं।

कर्पूरब जो आवगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।

इसके अलावा अगर आप चाहे तो इस मंत्र का प्रयोग अपने घर में प्रतिदिन पूजा करते समय कर सकते हैं या फिर किसी धार्मिक अनुष्ठान में भी इस मंत्र का जाप किया जा सकता है क्योंकि इस मंत्र का प्रयोग सभी प्रकार की पूजा में किया जाता है.

इस मंत्र का जाप आप सुबह और शाम की पूजा में कर सकते हैं लेकिन अधिकतर लोग शाम की पूजा में भी इस मंत्र का प्रयोग करना चाहते हैं तोशाम की पूजा के लिए नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।

1. मंत्र

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा ।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तुते ॥

2. मंत्र

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन: ।

3. मंत्र

अन्तर्ज्योतिर्बहिर्ज्योतिः प्रत्यग्ज्योतिः परात्परः।
ज्योतिर्ज्योतिः स्वयंज्योतिरात्मज्योतिः शिवोऽस्म्यहम् ॥

4. मंत्र

कीटा: पतङ्गा: मशका: च वृक्षाः
जले स्थले ये निवसन्ति जीवाः
दृष्ट्वा प्रदीपं न च जन्म भाजा:
सुखिनः भवन्तु श्वपचाः हि विप्रा:।।

अगर आपको शाम की पूजा में इन चारों मंत्रों का उच्चारण करना है तो आप कर सकते हैं ऐसा कहा जाता है कि शाम की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से घर में धन संपदा में वृद्धि होती है तथा सुख शांति प्राप्त होती है।

पूजा करने की विधि | Puja karne ki vidhi

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अगर आप में से सभी लोग पूजा करते हैं या फिर कई लोग कभी-कभी पूजा करते हैं लेकिन इनमें से जो भी व्यक्ति प्रतिदिन पूजा करता है या फिर करना चाहता है तो उसे इस पूजा विधि को अवश्य अपनाना चाहिए।

  1. प्रतिदिन पूजा करने के लिए सुबह स्नान आदि से निश्चिंत होने के बाद अपने घर के मंदिर में घी अथवा तेल का दीपक जलाएं।
  2. आपको अपने घर के मंदिर में सुगंधित अगरबत्ती या धूप बत्ती जलानी है।
  3. अब आपको सबसे पहले गणेश भगवान की पूजा करनी है वैसे तो सभी लोगों को पता होगा कि किसी भी पूजा को शुरू करने से पहले गणेश भगवान की पूजा क्यों की जाती है अगर नहीं तो हम आपको इसके बारे में एक लेख ऐसा देंगे जिसमें या पूरी जानकारी लिखी है कि गणेश भगवान की पूजा पहले क्यों की जाती है।
  4. अब आपको उन्हें स्नान करवाना है वस्त्र अर्पित करने हैं उसके बाद धूप ,रोली, अक्षत और पुष्प से उनकी प्रतिमा की पूजा करनी है।
  5. उसके बाद अब भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उनकी पूजा करनी है और उन्हें धूप , दीप , चंदन , जौ और पुष्प अर्पित करने हैं।
  6. भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद अब आपको भगवान शिव का ध्यान करते हुए उन्हें पुष्प ,अक्षत ,चावल आदि अर्पित करने हैं और विधि विधान पूर्वक उनकी पूजा करनी है।
  7. उसके बाद अगर आपके घर के मंदिर में मां दुर्गा अथवा सूर्य देव की प्रतिमा है तो उनका ध्यान करते हुए उनकी प्रतिमा के सामने उन्हें पुष्प , दीप आदि चढ़ाए।
  8. उसके बाद पंचदेव को मिठाई एवं फल चढ़ाना है और स्वच्छ जल उनके सामने समर्पित करना है।
  9. इतना करने के पश्चात अब आपको पंच देव की आरती करते हुए जल अर्पित करना है।
  10. आरती करने के पश्चात पंचदेव की परिक्रमा करनी है और सबसे बाद में पुष्पांजलि समर्पित करते हुए पूजा में हुई गलतियों की क्षमा मांगनी है और प्रतिदिन पूजा में मंत्र जाप अवश्य करना है।

प्रात: काल पूजा करने के मंत्र | Prata kal Puja karne ke Mantra

प्रात: कर-दर्शनम्
कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्द: प्रभाते करदर्शनम्।।

जिस समय आप भूमि पर चरण रखते हैं उस समय आपको ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करना है.

1. पृथ्वी क्षमा प्रार्थना

समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव

2. त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नान करते समय इस मंत्र का स्मरण करें

3. स्नान मंत्र

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।

4. सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार

ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम्
सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्।।

ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते।।

पूजा करने से पहले या फिर पूजा करते समय सूर्य भगवान की आराधना अवश्य करनी है.

5. दीप दर्शन

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।
दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।।

पूजा के दौरान दीपक प्रज्वलित करते समय इस मंत्र का स्मरण अवश्य करें.

6. गणपति स्तोत्र

गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:
द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:।।
विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्।।
विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्।
विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय।
लम्बोदराय विकटाय गजाननाय।।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय।
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये।।

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करनी है और भगवान की स्तुति करते समय इस पवित्र पावन मंत्र का जाप अवश्य करें.

7. आदिशक्ति वंदना

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते।।

अब आपको आदिशक्ति माता की आराधना करते समय इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करना है

8. शिव स्तुति

shivling

कर्पूर गौरम करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदा वसंतं हृदयार विन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि।।

अब आपको आदिशक्ति माता की आराधना करते समय इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करना है

9. विष्णु स्तुति

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

10. श्रीकृष्ण स्तुति

कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम।
नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम।
सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि।
गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी।।
मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्‌।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्‌।।

11. श्रीराम वंदना

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।

12. श्रीरामाष्टक

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।
गोविन्दा गरूड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा।।
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्।।

13. श्लोकी रामायण

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्।।

14. सरस्वती वंदना

नील सरस्वती स्तोत्रं saraswati

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना।।
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्याऽपहा।।

15. हनुमान वंदना

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्‌।
दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्‌।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्‌।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये।।

16. स्वस्ति-वाचन

ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवा:
स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:।

स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमि:स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।।

17. शांति पाठ

ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुं) शान्ति:,
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।

वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्व (गुं) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि।।

FAQ : पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

आरती से पहले कौन सा मंत्र बोले?

अगर आप में से कोई भी व्यक्ति आरती से पहले मंत्र जाप नहीं करता है तो उस व्यक्ति को आरती करने से पहले कर्पूरगौरं मंत्र अवश्य बोलना चाहिए।

पूजा करते समय कौन सा मंत्र करना चाहिए?

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:।

दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।।

खड़े होकर पूजा करने से क्या होता है?

अगर आप में से कोई भी व्यक्ति खड़े होकर पूजा करता है तो हमारे पौराणिक शास्त्रों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि खड़े होकर पूजा करना सही नहीं माना जाता है इस तरह से पूजा करने पर कई तरह के फल प्राप्त नहीं होते हैं और घर में पूजा करते समय खड़े होकर पूजा ना करें उसके लिए आप सबसे पहले जमीन पर एक आसन लगाकर बैठ जाएं तभी पूजा शुरू करें।

निष्कर्ष

दोस्तों जैसा कि आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए इसके बारे में जानकारी दी इसके अलावा सुबह उठते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए प्रतिदिन पूजा करने की विधि क्या है इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

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