भाग्योदय कब और कैसे होता है | Apna luck kaise bnaye

Bhagya uday kaise hota hai ? दोस्तों, अपने भाग्य का उदय कैसे करें यह एक बहुत बड़ा और बहुत ही अहम सवाल मन में उत्पन्न होता है क्योंकि जब कभी भी कोई व्यक्ति जीवन में हताश होता है तो है अपने भाग्य को कोसता है और कहता है कि मेरे भाग्य में क्या क्या लिखा है मेरा भाग्य मुझे कहां ले जाएगा मुझे कुछ भी पता नहीं है।

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किसी भी व्यक्ति का भाग्य उसके कर्मों के ऊपर निर्भर करता है हमारे शास्त्र कहते हैं कि व्यक्ति जैसा कर्म करता है वैसे ही उसका भाग्य निर्धारित होता है यदि व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे कर्म करता चलता है तो निश्चित रूप से उसका भाग्य भी उसका साथ देता है परंतु उसी जगह पर यदि कोई व्यक्ति जितना बुरे कर्म करता है उसका भाग्य भी उतना बुरा होता है।

परंतु हर व्यक्ति अपने भाग्य के विषय में जानना चाहता है और वह अपने भाग्य को सुधारने का प्रयास करता है इसके लिए वह तमाम तरह के प्रयास करता है बहुत से व्यक्ति भगवान का भजन करते हैं अपने इष्ट देवी देवताओं की से प्रार्थना करते हैं जिससे उनका भाग्य सफल बन जाए |

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अपना भाग्य कैसे बनाएं यदि उसे अपने भाग्य को चमकाना है तो वह कैसे अपने भाग्य को चमकाए अपने भाग्य में होने वाली सभी प्रकार की घटनाओं को कैसे सुधारें इस संबंध में व्यक्ति हमेशा जानने का उत्सुक रहता है। यदि आपका भाग्य अच्छे से नहीं का साथ नही  दे रहा है तो आप अपने भाग्य को कैसे सुधारेंगे|

इस विषय पर हम अपने इस लेख के माध्यम से आप लोगों को कुछ ऐसे तथ्य देंगे जिसको अपने जीवन में उतार कर अपने भाग्य का उदय कर सकते हैं। हमारे धर्म ग्रंथों में कई प्रकार की ऐसी बातें बताई गई है जिनसे हम अपने भाग्य का उदय कर सकते हैं। साथ ही अच्छा जीवन भी जी सकते हैं और समाज में अच्छी पहचान और सम्मान बना सकते हैं|

भाग्य ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्धारण करता है। परंतु सवाल वहीं पर अटक जाता है कि हम अपने भाग्य का निर्धारण कैसे करें या फिर हम अपने भाग्य को कैसे उदय करें या भाग्योदय कैसे होता है ? इस संबंध में आपको जो भी प्रयास हो सका है जानकारी देने का प्रयास करेंगे।

मेहनत और ईमानदारी से भाग्योदय करे | Apna luck kaise bnaye

यदि आप एक अच्छे ईमानदार और मेहनतकश व्यक्ति हैं तो निश्चित रूप से आपका भाग्य सफल होगा, साथ देगा। जीवन में जो भी व्यक्ति ईमानदारी और मेहनत के साथ कार्य करता है वह कभी भी धन नौकरी व्यापार पढ़ाई दुकान मकान के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति अच्छा रहता है और भाग्य उसका उसके साथ हमेशा अच्छा ही करता है।

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यदि आप अपने जीवन में हमेशा दरिद्रता से गुजर रहे हैं अपमान भरी जिंदगी जीते हैं किसी भी कार्य में आप की हानि हो रही है तथा शारीरिक रोग आपको दिन प्रतिदिन कमजोर कर रहे हैं कभी मकान तो कभी दुकान तो कभी शरीर की चिंता आपको सताती रहती है तो ऐसे में समझना चाहिए कि हमारा भाग्य में साथ नहीं दे रहा है ऐसे में यह प्रश्न मन में आता है की भाग्योदय कैसे होता है ?

यदि आपको विभिन्न प्रकार की समस्याएं हैं तो उन समस्याओं को निपटाने के लिए आपका ईमानदार होना बहुत आवश्यक है तथा कर्मठता पूर्वक इमानदारी से दिन प्रतिदिन कार्य करें जो भी आप कार्य कर रहे हैं पूरी सच्चाई और लगन के साथ करें तो निश्चित रूप से आपके जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की समस्याएं एक ना एक दिन खुद ब खुद समाप्त हो जाएंगे ऐसे में आपका भाग्य आपका साथ भी देगा और जीवन भी सफल हो जाएगा |

कुंडली की ग्रहों की स्थिति से भाग्योदय कैसे होता है ?| Fortune from the planetary position of the horoscope

प्रत्येक व्यक्ति का जीवन उसकी जन्म की तारीख समय और महीना वर्ष बहुत ही प्रभावित करते हैं क्योंकि जब वह व्यक्ति जन्म लेता है तो जन्म के समय ग्रह नक्षत्रों की स्थितियां भी व्यक्ति को प्रभावित करती हैं और एक कुंडली बनाने वाला विद्वान इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए आप के जीवन संबंधित घटनाओं घटनाओं को आपकी कुंडली में बना देता है।

कुंडली में ग्रहों की स्थिति अच्छी नहीं है तो आपका भाग्य भी अच्छा नहीं होगा परंतु कुछ ऐसे उपाय होते हैं जिनसे अपनी कुंडली में स्थित ग्रहों की ग्रह दशा को सुधारा जा सकता है इसलिए कुंडली में ग्रहों की दशा शुभ होना आवश्यक है जिससे आपका भाग्य उदय होगा ग्रहों की दशा सही समय पर व्यक्ति के जीवन में सही परिणाम देती है।

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दुनिया में जितने भी व्यक्ति जन्म लेते हैं उन व्यक्तियों की कुंडली में नवम भाव को भाग्य का भाव माना जाता है इस भाव में जिस राशि का वर्चस्व होता है उसके अनुसार तय होता है।

प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में भाग्योदय का वर्ष ग्रह नक्षत्रों की ग्रह दशा और व्यक्ति की उम्र के हिसाब से बदलाव होता रहता है ऐसे में सूर्य 22 वर्ष में चंद्र 24 वर्ष में मंगल 28 वर्ष में बुध तीसरे वर्ष में गुरु 16 वर्ष में शुक्र 25 में वर्ष में अथवा विवाह के बाद तथा शनि 36 वर्ष में भाग्य के साथ शुभ फल देता है।

यदि नवे भाव पर राहु केतु का प्रभाव रहता है तो 42 हैं और 44 वर्ष में भाग्योदय होना निश्चित होता है अर्थात यह कहा जा सकता है कि व्यक्ति का जीवन ग्रहों के हिसाब से दिए गए वर्षों में उसका भाग्य परिवर्तित होता है।

ज्योतिष विद्या से भाग्योदय कैसे करे? | Fortune through astrology

ज्योतिष विद्या भी एक ऐसी विद्या है जो विज्ञान की तरह कार्य करती है ज्योतिष विद्या मनुष्य के जीवन में भाग्य को बदलने में सक्षम होती है जन्म कुंडली के नवम भाव को भाग्य भाव की संज्ञा दी जाती है भाग्य बुध के लिए भाग्य भाग्येश भाग्य राशि आदि पर विचार किया जाता है ज्योतिष विद्या के माध्यम से भाग्य में अवरोध उत्पन्न करने वाले ग्रहों पर विचार किया जाता है |

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उसके बाद यदि कोई भी ग्रह भाग्य के विपरीत है तो उसके लिए ज्योतिष विद्या के माध्यम से कुछ उपाय बताए जाते हैं। कुंडली में विपरीत ग्रह दशा को सुधारने के लिए जो भी उपाय बताए जाते हैं उनका समाधान किया जाता है तो भाग्य पलट जाता है। व्यक्ति को बताए गए उपायों के अनुसार कार्य करना जरूरी होता है जिससे भाग्य में पूरा परिवर्तन दिखाई देने लगता है।

श्रद्धा धैर्य और विश्वास से भाग्योदय कैसे करें ? | Lucky with faith and patience 

किसी भी व्यक्ति को अपने भाग्य के बदलने के लिए धैर्य विश्वास के साथ-साथ श्रद्धा होना जरूरी है जब कोई भी व्यक्ति किसी भी देवी देवता या गुरु को पूजता है तो उसके प्रति श्रद्धा और विश्वास होना जरूरी है। व्यक्ति की कुंडली में देवताओं का निवास किस प्रकार से हैं उसी हिसाब से उन्हें देवताओं का पूजन किया जाता है क्योंकि मनुष्य की 12 राशियों में 36 देवताओं का विशेष वर्चस्व होता है।

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ऐसे में उन सभी देवताओं को इष्ट मानकर उनका पूजन किया जाता है जिससे भाग्य कब बदलाव होता है प्रत्येक व्यक्ति की राशि 9 अक्षर होते हैं राशियों के नाम अक्षर व्यक्ति के राशि के प्रथम अक्षर होते हैं ऐसे मेंअपनी राशि के अनुसार देवी देवताओं का पूजन श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हुए अपने भाग्य को बदला जाता है।

हस्त रेखा ज्योतिषी से भाग्य कैसे बदलें ? | Palmistry Astrologer

व्यक्ति का भाग्य बदलने के लिए उसके हाथ में कुछ ऐसी रेखाएं बनी होती है जिनके बारे में व्यक्ति को नहीं पता होता है और वे रेखाएं व्यक्ति के भाग्य और सफलता को बताती हैं। ऐसे में हस्त रेखा ज्योतिष के माध्यम से अपने भाग्य का उदय किया जा सकता है।

हस्तरेखा ज्योतिष के जानकार व्यक्तियों से अपनी भाग्य के विषय में हाथ की रेखाओं को दिखाकर बदला जा सकता है।इसके लिए व्यक्ति को हस्तरेखा उसका पूरा ज्ञान और विश्लेषण अच्छी तरह से पता होना चाहिए। सभी मनुष्य की हाथ की रेखाओं पर कुछ विशिष्ट चिन्ह है या रेखाएं एक समान लगभग होती हैं जैसे सूर्य रेखा जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा आदि।

hand palm hatheliयदि सूर्य रेखा जीवन रेखा की जड़ से होती हुई बृहस्पति पर्वत पर तारक चिन्ह में समाप्त हो जाती है तो व्यक्ति का भाग्य बहुत ही उच्च कोटि का है इसी तरह जुमड़ी बंद का पहला वाला जंजीर दार परंतु समान निर्बाध सूर्य रेखा त्रिकोण के निचले भाग से निकलती है तो भाग्य अच्छा और सफल होता है।

तर्जनी उंगली के दूसरे पूर्व पर एक या दो क्रश चतुर्भुज के अंदर से बुध पर्वत की ओर एक गहरी रेखा गहरी सूर्य रेखा साथ में दोनों हाथ में बृहस्पति पर्वत दिखाई देता है तो व्यक्ति ऐसे लोगों से मित्रता करेगा जिसे जीवन में लाभ ही लाभ प्राप्त होता है।

यदि कनिष्ठ होली की जड़ से रेखा निकलकर बुध पर्वत पर झुकती है तो ऐसे व्यक्ति सम्मानीय व्यक्ति बनते हैं यदि चंद्र रेखा पर्वत से रेखा निकलकर बृहस्पति क्षेत्र के आरंभ ह्रदय रेखा में प्रवेश करती है तो व्यक्ति बहुत ही उच्च सप्ताह का अधिकारी बनता है यदि व्यक्ति का अंगूठा हाथ में बहुत नीचे से है तो व्यक्ति सामान्य प्रतिभावान होता है।

अपने नाम से भाग्य का उदय कैसे करें ? | Fortune in your name

व्यक्तियों के नाम भी कभी-कभी उनके गुणों के अनुसार रखे जाते हैं लोग ऐसे नामों को रखते हैं जिससे किसी अन्य व्यक्ति को सम्मान मिला हो तो यह आवश्यक नहीं है कि उस व्यक्ति को भी सम्मान मिलेगा फिर भी लोग उसके नाम का सहारा लेते हैं परंतु याद रहे कि यदि भारतीय ज्योतिष के अनुसार किसी व्यक्ति के नाम में दो बार कोई अच्छा रहता है |

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तो उस अक्षर से संबंधित राशियां भाग्य को निर्धारित करती हैं जैसे आप के नाम मैं दो बार ए वर्ण आता है और उसके बाद य वर्ण आता है तो A वृष राशि का और य वृश्चिक राशि का होता है ऐसे में वृश्चिक राशि और वृष राशि 17 की भावना रखते हैं जिससे कोई भी काम साझेदारी के बगैर नहीं हो सकता और यदि इस तरह का कोई व्यक्ति साझेदारी से काम करता है तो निश्चित रूप से उसके जीवन में भाग्य सफल रहेगा।

लग्न और राशि के अनुसार भाग्य कैसे बदलें ? | Fate according to Lagna and Rashi

व्यक्ति अपने भाग्य के उदय के विषय में निश्चित जानना चाहता है तो वह ज्योतिष विद्या के सहारा जरूर लेता है ऐसे में व्यक्ति की एक सीमित उम्र में उसका भाग्य उदय कब होगा कैसे होगा इस विषय में जानने के लिए लग्न और राशियों का विचार करना जरूरी होता है |

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प्रत्येक मनुष्य की कुंडली में 12 लग्न और 12 राशियां होती हैं कुंडली में जिस भाव से लग्न स्पष्ट होता है उसी भाव से राशि का भी निर्धारण होता है यदि प्रथम भाव में मेष राशि तो मेष लग्न होना चाहिए सिंह रहे तो सिंह लग्न होना चाहिए इसी प्रकार से 12 लगना अनुसार 12 प्रकार की कुंडलिया बनती हैं जो किसी भी व्यक्ति की भाग्य के उदय का जिम्मेदार होती हैं।

राशि और लग्न के अनुसार व्यक्ति का भाग्य संभावित उम्र में कब बदलेगा तो उसके लिए नीचे लिखे गई राशियों के अनुसार और उम्र के अनुसार भाग्य कब उदय होगा |

राशि / लग्न उम्र / वर्ष 
मेष लग्न16 , 22 , 28 , 32 , 36
वृष लग्न25 , 28 , 36 ,42
मिथुन लग्न22 , 32 , 35 , 36 , 42
कर्क लग्न6 , 22 , 24 , 25 , 28
सिंह लग्न16 , 22 , 24 , 26 , 28 , 32
कन्या लग्न16 , 22 , 25 , 32 , 33 , 34 , 36
तुला लग्न24 , 25 , 32 , 33 , 35
वृश्चिक लग्न22 , 24 , 28 , 32
धनु लग्न16 , 22 , 32
मकर लग्न25 , 33 , 35 , 36
कुम्भ लग्न25 , 28 , 36 , 42
मीन लग्न16 , 22 , 38 , 33

इस प्रकार से सभी मनुष्य अपने भाग्य का उदय कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि हमारा भाग्य कब परिवर्तित होगा भाग्य में जो कुछ स्पष्ट है वह आपके कर्मों पर बदलता रहता है प्रत्येक व्यक्ति को कर्म प्रधान होने चाहिए एक व्यक्ति जैसे कर्म करता है वैसे ही परिणामों से ही मिलते हैं अब आप जान गये होंगे की भाग्योदय कैसे होता है ?

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