जाने वीर्य रक्षा ब्रह्मचर्य क्यों आवश्यक है ? वीर्य को बढ़ाने के उपाय,फायदे और नुक्सान ! – Know everything about Semen in Hindi

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एक योगी और विद्यार्थी के जीवन में ब्रह्मचर्य की बहुत अहमियत है , हालाकी एक सामान्य इंसान के लिए भी वीर्य Semen के संचय के अत्यंत फायेदे है | इसका अत्यधिक दोहन स्वयं को अंत के नजदीक ले जाने के समान है | ऐसा क्यों है यह आप पूरी पोस्ट पढ़ के जान पाओगे इस लिए पोस्ट को अंत तक पढ़े !

वीर्य एक जैविक पदार्थ है | यह संसार के सभी प्रकार के जन्तुओ में पाया जाने वाला एक ऐसा पदार्थ है जो प्रत्येक जीवो के लिए नयी संतान को जन्म देने के लिए उत्तरदायी होता है |

वीर्य मानवों के लिए तो एक बरदान है | मनुष्य के लिए शास्त्रों में कहा गया है कि वो ब्रम्हचर्य का पालन करे |क्योकि वीर्य एक जैविक तरल है | मानव स्वास्थ्थ पर वीर्य के लाभकारी प्रभाव पड़ते हैं | जिसमे प्रमाणित और संभावित दोनों प्रकार के लाभ निहित होते हैं |

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वीर्य पुरुषों में प्रजनन के लिए जरूरी है | इसके बिना संतान को जन्म देना संभव नहीं है | इसके लिए ये जानना आवश्यक हो जाता है कि आखिर वीर्य बनता कैसे है ?

वीर्य का निर्माण कैसे होता है आओ जाने ?

वीर्य बनाने की प्रक्रिया पुरुषों के अंडकोष और अंग के मार्ग में मौजूद प्रोस्टेट ,सेमाइनल वैसिकल और यूंरेथल नामक ग्रंथियों से निकलने वाले रसों से निर्मित होता है जिसमें लगभग 60%सेमाइनल वैसिकल ,30%प्रोस्टेट ग्रंथि का रिसाव और 10% अंडकोष में बने शुक्राणु होते हैं | पुरुष में जननांग के नीचे लटके हुए अंडकोष में शुक्राणु निर्मित होते हैं | वीर्य के बारे में अधिक जानकारी आप Wikipedia से जा कर पढ़ सकते है !

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मनुष्य में शुक्राणुओं का निर्माण 12 से 13 वर्ष की उम्र में बनना शुरू हो जाता है | यह प्रक्रिया 17-18 वर्ष तक बहुत तेजी से होती है |एक शुक्राणु बनने में लगभग 70-72 दिन का समय लगता है | शुक्राणुओं के बनने की प्रक्रिया किशोरावस्था से प्रारंभ होकर जिंदगी भर चलती रहती है |  शुक्राणुओं के बारे में विकिपीडिया पर पढ़े !

वीर्य की रक्षा क्यों करनी चाहिए ?

कुछ महान आत्माओं का कहना है कि वीर्य की जीतनी रक्षा की जाये उतनी ही भलाई है, इसकी रक्षा करके हम कितना सुन्दर और लम्बा जीवन जी सकते है आप कल्पना भी नहीं करे होंगे |आप अनेकों शास्त्रों का अध्ययन किया होगा जिसमे आपको हमेशा ब्रह्मचर्य का पालन करने को कहा गया है |

हमारे वैदिक धर्म के अनुसार जीवन को चार भागों में बांटा गया है |

  1. ब्रह्मचर्य आश्रम
  2. गृहस्थ आश्रम
  3. वानप्रस्थ आश्रम
  4. सन्यास आश्रम

इन चारों आश्रमों में सबसे महत्त्वपूर्ण आश्रम है ब्रह्मचर्य है |यह स्वास्थ्य और आध्यात्मिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है | ब्रह्मचर्य की समझ पुरुष को मोक्ष तक ले जाती है |

वीर्य ऊर्जा क्यों है ?

वीर्य एक ऊर्जा है | यह दो चीजों से बना है |

1- वीर्य कण की देह – यह दिखाई पड़ती है

2- वीर्य कण की आत्मा – जो दिखाई नहीं देती है |

यह ऊर्जावान होने के साथ-साथ पावन और पवित्र भी माना जाता है | लोगों का मानना है कि हस्त मैथुन “ ऊर्जा की आत्महत्या है|” इसकी पवित्रता पर कुछ दर्शन शास्त्रों के शोध भी उपलब्ध है |

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किन्गोग दर्शन के अनुसार

यौन उत्तेजना के दौरान अनेक मार्गों/बिन्दुओं से हटकर ऊर्जा खुद को यौनांगों में स्थानांतरित कर लेती है | परिणामी चरमानंद और स्खलन से अंततः ऊर्जा शरीर से पूरी तरह से निष्कासित हो जाती है |

ग्रीक दर्शन

अरस्तु ने वीर्य के लिए कहा है कि-“वीर्य पोषक पदार्थ , जो कि रक्त है, से निकला हुआ अवशेष है , जो अनुकूलतम तापमान में बहुत ही गाढ़ा ह जाता है | क्योकि प्रकृति ने उन्हें ऐसा ही बनाया है, इसलिए केवल पुरुषों में अपेक्षित गर्मी होती है जो रक्त को गाढ़ा वीर्य बना देती है |”

अरस्तु के अनुसार

भोजन और वीर्य के बीच सीधा सम्बन्ध होता है;” शुक्राणु आहार का उत्सर्जन है , या और भी खुलकर कहा जाये तो यह हमारे आहार का सर्वोत्कृष्ट घातक है |

बारबरा जी वाकर का शोधपत्र “द वुमेन ऑफ़ सिम्बल्स एंड सेक्रेट आब्जेक्ट “में लिखा है कि—ये मिथक और लोकोत्तियां यह दिखाती हैं कि पूर्व पितृसत्तात्मक समाज में शासन महिलाओं द्वारा होता तजा , जो बाद में मर्दन संस्कृति का पूरक बन गया |

चिकित्सा दर्शन में रूसी चिकित्सा और हरवर्टनावेल के वाईटल फ़ोर्स थ्योरी में वीर्य को महिला और पुरुष के बीच जटिल दैहिक पारस्परिक क्रिया का उत्पाद माना गया है |

वीर्य रक्षा के उपाय

उत्तम स्वस्थ्य्के लिए वीर्य की रक्षा अति आवश्यक है | इससे शरीर सुदृढ़ और बल व् बुद्धि का विकास होता है उत्साह, स्फूर्ति और निरोगता वीर्य पर आधारित है | इसलिए कुछ नियमो का पालन अनिवार्य हो जाता है |

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1- हमारा भोजन सदा सात्विक और सादा होना चाहिए | अधिक टेल –भुने, मसाले ,अधिक मीठा,मदिरा और मांस आदि के सेवेन से बचे |

2- अश्लील पुस्तके ,फ़िल्में चित्रों से दूर रहें| हो सके तो उत्तम कोटि की पुस्तको का ही अध्धयन केंद्र बनायें |

3- नियमित व्यायाम करने से वीर्य रक्षा होती है |

4- वीर पुरुषों ब्रह्म्चारियों और कमवासना से दूर लोगो के विषय में मनन करना चाहिए |

  • इंद्रियों के बढ़ते वेग को रोकने के लिए सदैव कुछ न कुछ करते रहना चाहिए |
  • नियमित रूप से ईश्वर भजन अवश्य करना चाहिए और संसार की नश्वरता का चिंतन करना चाहिए |
  • वीर्य रक्षा के लिए सबसे विशेष यह है की मन को साधने की आवश्यकता है |

उपरोक्त नियमों के साथ साथ सदाचार का पालन आवश्यक है |

वीर्य को बढ़ाने के लिए किस प्रकार के भोजन अवश्य लेने चाहिए ?

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1-गाय के दूध में मिश्री मिलाकर खाएं |

2-मीठा अनार का सेवन करें|

3-बाद्दम का हलवा प्रयोग करे|

4-प्याज या प्याज के रस को घी या शहद के साथ प्रयोग करें |

5-चावल की खीर खाने से वीर्य बढ़ता है |

6- मक्खन या घी का प्रयोग ज्यादा करें |

7- तुलसी के बीज |

8- उड़द की दाल भी वीर्य वर्धक होती है |

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वीर्य रक्षा से क्या लाभ मिलते है ?

  • वीर्य रक्षा से आँखों में तेज , वाणी में प्रभाव कार्य में उत्साह होता है |
  • प्राण ऊर्जा में वृद्धि होती है |
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है |
  • चिंतन विकृत हो जाता है |
  • स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है
  • मानसिक अशांति होती है |

वीर्य क्षरण से क्या नुकसान होते है ?

वीर्य रक्षा में ही मृत्यु है और वीर्य रक्षा में जीवन | वीर्य रक्षा से हमारी उन्नति और पतन दोनों निहित हैं |ब्रम्हचर्य को नष्ट करने से भौतिक , आधिदैविक और अध्यात्मिक तीनो प्रकार की हानियाँ होती हैं |

भौतिक हानियाँ

भौतिक हानियों में शरीर कमजोर ,नेत्र दुर्बल, पाचन क्रिया शिथिल, फेफड़े कमजोर, और सहन शक्ति, कम हो जाती है | शरीर का तेज कम हो जाता है | देह नाना प्रकार के रोगों का अड्डा बन जाता है | इसका याददास्त पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है |

आधिदैविक दैविक हानियाँ

बुद्धि मंद और स्मरण शक्ति का ह्रास होता है |सूक्ष्म विचारों को ग्रहण करने की शक्ति घट जाती है | मनुष्य इद्रियों का गुलाम हो जाता है ,भयभीत ,चिंतित और हीन मनोवृति का बन जाता है |विषय वासना का शिकार हो जाता है |

आध्यात्मिक हानियाँ

आध्यात्मिक हानि बहुत ही दुखदायी होती है आदमी आत्मा के स्वरुप की पहचान ईश्वर परायणता,धर्म पालन और कर्तव्य से बिमुख हो जाता है \ धार्मिक विचारो का नाश हो जाता है \ अकाल मृत्यु का शिकार हो जाता है |

अतः ब्रह्मचर्य को नष्ट करना एक ऐसा अपराध है कि जिसका फल समस्त समाज और सृष्टि को भोगना पड़ता है |

 

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