जज और मजिस्ट्रेट में क्या अंतर है? | Difference between judge and magistrate in hindi

Jaj aur magistrate me kya antar hai ? भारत के संविधान में न्यायपालिका का एक बहुत अहम स्थान है और साथ में न्यायपालिका में काम करने वाले लोगों की भूमिका भी अलग-अलग होती है। आप लोगों ने बहुत बार सुना होगा कि किसी भी अपराधी को उसके अपराध के अनुसार पुलिस police  मजिस्ट्रेट या जज के सामने हाजिर करती है। अब आपके मन में सवाल आएगा |

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कि आखिर में जज और मजिस्ट्रेट दोनों में अंतर क्या है | अगर आप इस सवाल का जवाब नहीं जानते हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है|  मैं आज आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताऊंगा कि जज और मजिस्ट्रेट में क्या अंतर है? आइए जाने पूरी जानकारी

जज क्या होता है ? What is a judge

जज किसी भी न्यायिक व्यवस्था में एक उच्च अधिकारी होता है जिसे हिंदी में न्यायाधीश कहा जाता है। अगर हम आसान शब्दों में कहें तो निर्णय देने वाले को ही हम लोग न्यायाधीश करते हैं। या मुक्त तौर पर किसी भी मुकदमे पर दोनों पक्ष की बात सुनने के बाद किसी निर्णय पर पहुंचता है और अपराधी को सजा या बरी करने का अधिकार किसके पास होता है।

जज के क्या कार्य होते हैं ? Functions of a judge

  1. जज  न्यायालय में जब किसी फैसले पर अपना निर्णय देता है तो उसे हमेशा दोनों पक्षों को ध्यान से सुनना पड़ता है और ऐसे सवाल जो कोर्ट में नहीं पूछे जाने चाहिए उस उन सवालों पर कोर्ट का जज ऑब्जेक्शन लगाता है जैसा कि आप लोगों ने फिल्मों में देखा ही होगा।
  2. न्यायालय में जज एक उच्च पद पर आसीन एक अधिकारी होता है और कोर्ट की कानून व्यवस्था और उसे सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी उस पर होती है।
  3. एक जज के तौर पर आपको या सुनिश्चित करना होगा कि जो भी मामला आपके समझ कोर्ट में आ रहा है वह कानून के दायरे में होना चाहिए और साथ में किसी भी मामले की ट्रायल और हेयरिंग की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी जज के उपर निर्भर करती है।
  4. जब किसी न्यायालय में जज के सामने  कोई केस आता है तो उसे संबंधित सभी पहलुओं पर विचार करना जज का कार्य होता है।
  5. बिना किसी भेदभाव से जज को अपना फैसला सुनाना चाहिए।
  6. किसी भी केस में प्रस्तुत किए गए सबूत की जांच करना भी जज का कार्य होता है।

जज बनने की योग्यता क्या है? Ability to become a judge

जज बनने के लिए आपके पास 12वीं की डिग्री होनी चाहिए उसके बाद आप प्रवेश परीक्षा पास कर कर 5 साल का ba.llb डिग्री पास कर आप जज बन सकते हैं। अगर आप ग्रेजुएट है तो इसके लिए आप 3 साल का एलएलबी की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।

कौन सी परीक्षा देनी पड़ेगी ? Which exam will have to be taken

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जज बनने के लिए प्रत्येक राज्य में अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं जैसा कि आप जानते हैं कि प्रत्येक राज्य का अपना राज्य लोक सेवा आयोग जिसे हम लोग इंग्लिश में PUBLIC SERVICE COMMISSION कहते हैं। इसके द्वारा प्रतिवर्ष न्यायिक सेवा परीक्षा(judicial service exam)’जिला या अधीनस्थ न्यायालय (SUBORDINATE COURT ) की परीक्षा का आयोजन किया जाता है इस परीक्षाा को पास करने केेेे बाद आप जज बनने के योग्य माने जाएंगे।

चयन की प्रक्रिया क्या होती है? What is the selection process

  1. प्रारंभिक परीक्षा
  2. मुख्य परीक्षा
  3. साक्षात्कार

इन तीनों प्रक्रिया से होकर आपको गुजरना पड़ेगा तभी जाकर आप अंतिम रूप से जज बन पाएंगे।

सैलरी कितनी मिलेगी? How much salary will you receive

जहां तक हम जज की सैलरी की बात करें तो पद के अनुसार उनकी सैलरी अलग अलग हो सकती है उदाहरण के तौर पर एक जूनियर जज की शुरुआती वेतन 45 हजार और सीनियर जज का वेतन 80 हजार प्रति महा होता है ।  यहां पर सैलरी राज्य में के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

इसके अलावा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सैलरी की बात की जाए तो 2 लाख 25 हजार रुपए होती है। वहीं अगर हम भारत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सैलरी की बात करें तो 2.80 लाख प्रति महीने और अन्य जजों का वेतन 2.50 लाख रुपए होता है।

मजिस्ट्रेट क्या होता है? What is a magistrate

मजिस्ट्रेट एक प्रकार का सिविल अधिकारी होता है जिसके अंतर्गत एक जिला और क्षेत्र के कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी होती है। आसान शब्दों में इसे जिले का प्रशासनिक अधिकारी भी कहा जाता है। मुख्य  तौर पर सिविल और क्रिमिनल   मामले को सुनता है और उस पर अपने फैसले भी देता है। इसकेे अलावा मजिस्ट्रेट को किसी जिले का मुख्य कार्यकारी प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी माना जाताा है।

मजिस्ट्रेट के कार्य क्या होते हैं? What are the functions of a magistrate

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कानून व्यवस्था की स्थापना करना और उस पर नियंत्रण रखना।

  1. राज्य के सभी जेल का निरीक्षण करना।
  2. सरकार को प्रतिवर्ष वार्षिक रिपोर्ट की प्रति निवेदना प्रस्तुत करना।
  3.   अधीनस्थ कार्यकारी  मजिस्ट्रेट का भी निरीक्षण करना।
  4. सभी मसलों से मंडल आयुक्त को अवगत करवाना।
  5. अपराधिक मुकदमों की सुनवाई करना।
  6. मृत्युदंड से जुड़े कार्य को प्रमाणित करना।

मजिस्ट्रेट कितने प्रकार के होते हैं? What are the types of magistrates

मजिस्ट्रेट मुख्य तौर पर 4 प्रकार के होते हैं जिसका विवरण में नीचे बिंदु अनुसार दे रहा हूं जो इस प्रकार है-

  1. न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate)
  2. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Chief Judicial Magistrate)
  3.  मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (Metropolitan Magistrate)
  4. कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate)
( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

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मजिस्ट्रेट बनने की योग्यता क्या है? Qualification to become a magistrate

मजिस्ट्रेट बनने के लिए आपको किसी भी स्टीम से ग्रेजुएट होना अति आवश्यक है इसके अलावा यूनियन पब्लिक कमीशन द्वारा आयोजित एग्जाम को पास कर आप मजिस्ट्रेट बनने के योग्य बन सकते हैं

कौन सी परीक्षा देनी पड़ेगी? Which exam will have to be taken

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मजिस्ट्रेट बनने के लिए आपको यूनियन पब्लिक कमीशन द्वारा आयोजित एग्जाम को पास करना होगा यह परीक्षा साल में सिर्फ एक बार ही आयोजित की जाती है।

चयन की प्रक्रिया क्या होती है? What is the selection process

आपको मजिस्ट्रेट बनने के लिए 3 चरणों से गुजरना पड़ता है जिसका विवरण में बिंदु अनुसार नीचे दे रहा हूं जो इस प्रकार है-

  1. प्रारंभिक परीक्षा
  2. मुख्य परीक्षा
  3. साक्षात्कार

इंटरव्यू एग्जाम को पास करने के बाद ही आप मजिस्ट्रेट बनने के योग्य माने जाएंगे।

सैलरी कितनी मिलेगी? How much salary will you receive

मजिस्ट्रेट की सैलरी की बात करें तो उन्हें महीने में 1 से 2 लाख प्रति माह का वेतन दिया जाता है और साथ में दूसरे प्रकार के सरकारी सुविधाएं जैसे गाड़ी ‘ सिक्योरिटी गार्ड और  अन्य प्रकार के भत्ते भी उन्हें प्रदान किए जाते हैं।

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जज और मजिस्ट्रेट में क्या अंतर है? Difference between a judge and a magistrate

  1. जज को न्यायालय में एक मध्यस्थ  व्यक्ति के रूप में दर्शाया जाता है यानी ऐसा व्यक्ति जो किसी भी मामले पर अपना फैसला सुना सकता है। इसके विपरीत मजिस्ट्रेट एक छोटे से न्याायिक क्षेत्र का अधिकारी होता है। इसकेे अलावा उस क्षेत्र केेे कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी उसके ऊपर होती है।
  2. जज किसी भी बड़े या गंभीर मुद्दे पर फैसला सुना सकता है जबकि इसके विपरीत मजिस्ट्रेट छोटे-मोटे अपराधिक मामले पर  ही अपना फैसला सुना सकता है।
  3. किसी भी आपराधिक मामले पर पहला फैसला सुनाने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है जबकि जज के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं होता है।
  4. जज के पास असीम अधिकार होते हैं जबकि इसके विपरीत मजिस्ट्रेट के पास इतनी शक्ति  नहीं होती हैं।
  5. जज की नियुक्ति की प्रक्रिया काफी अलग है उदाहरण के तौर पर उच्चतम न्यायालय के जज की नियुक्ति भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के या राज्यपाल के द्वारा इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। जबकि इसके विपरीत मजिस्ट्रेट के नियुक्ति उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया जाता है।
  6.  न्यायाधीश बनने के लिए आपके पास कानून की डिग्री होनी है अति आवश्यक है  लेकिन इसके विपरीत मजिस्ट्रेट बनने के लिए कानून की डिग्री की जरूरत नहीं पड़ती है।
  7. न्यायाधीश से किसी भी व्यक्ति को आजीवन कारावास या फांसी जैसी सजा देने का अधिकार उसके पास है। जबकि इसके विपरीत मजिस्ट्रेट  जुर्माना या कुछ दिनों तक जेल की सजा दे सकता है।
  8. न्यायाधीश द्वारा दिए गए किसी भी फैसले को मजिस्ट्रेट बदल नहीं सकता है। जबकि मजिस्ट्रेट के द्वारा सुनाया गया कोई भी फैसला न्यायाधीश बदल सकता है।

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