तुलसी में जल देने की विधि मंत्र एवं पूजन सामग्री : सही समय और लाभ जाने

Tulsi me jal dene ki vidhi नमस्कार दोस्तों हिंदू धर्म में धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए कई मान्यताओं को बहुत महत्व दिया जाता है ऐसे में तुलसी पूजन पर भी कई विशेष बातें को महत्व दिया जाता है तुलसी पूजन हिंदू धर्म में सभी लोगों को करना अनिवार्य है.



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लगभग सभी लोगों के घरों में तुलसी का पौधा अवश्य लगा हुआ होता है और सभी लोग तुलसी में जल अर्पित करते हैं और तुलसी की पूजा अर्चना करते हैं तुलसी में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी जी का वास होता है जो घर के लिए वास्तव में शुभ संकेत होता है.

ऐसे में तुलसी की पूजा अर्चना करने से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की दया दृष्टि आप पर सदैव बनी रहती है जिससे कि आपके सभी दुख और संकट निकट नहीं आते हैं.

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लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार ऐसे पूजा-पाठ को पूरे नियमों के अनुसार किया जाए तो अत्यधिक शुभ माना जाता है लेकिन कुछ लोगों को ऐसे विधि-विधान ओं का ज्ञान नहीं होता है इसलिए वह अपने अनुसार इन क्रियाओं को करने का प्रयास करते हैं.

लेकिन आज हम आपको तुलसी से जुड़े कई विधि विधान बताने वाले हैं जिनके अनुसार आप तुलसी मैया की पूजा आराम से कर सकते हैं तुलसी में जल रोजाना सभी लोग अर्पित करते हैं लेकिन उनको सही विधि नहीं पता होती है.


आज हम आपको तुलसी में जल देने की विधि क्या है और तुलसी में जल कब देना चाहिए इस सब पर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं इसलिए आर्टिकल को पूरा पढ़ें और तुलसी के बारे में कई जानकारियां हासिल करें.

तुलसी पूजन की सामग्री

तुलसी पूजन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री जैसे तुलसी का पौधा साड़ी फूल माला हल्दी लाल चुनरी सीताफल भगवान विष्णु की प्रतिमा चौकी सिंघाड़ा शकरकंद मूली बेर जल आदि तुलसी पूजन के लिए अति आवश्यक है.

यह सभी सामग्री पहले से ही व्यवस्थित करने ताकि आपको पूजा के दौरान इधर उधर दौड़ना भागना ना पड़े इसे पूजा में रुकावट पैदा हो जाती है.

तुलसी में जल देने का मंत्र

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

तुलसी पूजन मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

तुलसी स्तुति मंत्र

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

तुलसी नामाष्टक मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

तुलसी की पत्तियां तोड़ने के मंत्र

ॐ सुभद्राय नमः

ॐ सुप्रभाय नमः

मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।

तुलसी में जल देने की विधि

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को एक पवित्र और पूजनीय पौधा माना गया है धार्मिक शास्त्रों में या बताया गया है कि तुलसी में जल चढ़ाने से कई सारे लाभ प्राप्त होते हैं तुलसी में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी जी का वास होता है इस वजह से तुलसी मैया की पूजा की जाती है.

तुलसी में जल चढ़ाने के अनेकों लाभ हैं प्रातः सुबह जल्दी उठकर स्नान करके पूजा अर्चना करने के बाद तुलसी मैया के पास गाय के शुद्ध घी का दिया जलाना चाहिए उसके बाद तुलसी मैया को जल अर्पित करना चाहिए जल अर्पित करने के बाद तुलसी माता को प्रणाम करना चाहिए.

प्रणाम करने के बाद तुलसी मां की परिक्रमा करके तुलसी मां को जल देने की विधि संपन्न करनी चाहिए पूजा करने के बाद फिर से तुलसी मां को प्रणाम करके उल्टे पैर लौट जाना चाहिए तुलसी की पूजा सदैव चप्पल उतार कर करनी चाहिए.

यदि आप प्रतिदिन तुलसी मां को जल चढ़ाते हैं तो इससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपके घर में सुख शांति समृद्धि और धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है भगवान विष्णु और महालक्ष्मी जी की दया दृष्टि आप पर बनी रहती है.

तुलसी में जल देने का सही समय

कुछ लोगों को तुलसी में जल अर्पित करने का सही समय पता नहीं होता है इसलिए वह किसी भी टाइम जब भी स्नान करते हैं तब तुलसी में जल अर्पित करने पहुंच जाते हैं ऐसा करना अशुभ माना जाता है लेकिन इसमें उनकी कोई गलती नहीं होती है.

क्योंकि उनको इस बारे में संपूर्ण जानकारी नहीं होती है इस वजह से वह अपनी श्रद्धा भाव के अनुसार किसी भी समय जल देना उचित समझते हैं आमतौर पर लोग यह मानते हैं कि श्रद्धा भाव अति आवश्यक है लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार चला जाए तो ज्यादा बेहतर है.

तुलसी में जल देने का सही समय प्रातः काल का होता है प्रातकाल जल्दी उठकर स्नान करके तुलसी में जल देकर तुलसी को प्रणाम करना एक सही प्रक्रिया होती है.

तुलसी को कब जल अर्पित नहीं करना चाहिए

जो व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी मां की पूजा करते हैं उनको इन सब बातों का विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए कि कब तुलसी मां को जल अर्पित करना है और कब नहीं करना है यदि आप प्रतिदिन तुलसी मां की पूजा करते हैं तो आपको ऐसी जानकारी रखना अति आवश्यक है.

तुलसी माता को रविवार के दिन जल अर्पित नहीं करना चाहिए और तुलसी माता को एकादशी चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण को भी जल अर्पित नहीं करना चाहिए इन दिनों जल अर्पित करना अशुभ माना जाता है.

यदि आप अनजाने में ऐसी गलतियां करते हैं तब हो सकता है आप पर इसका प्रभाव ना पड़े लेकिन धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक ऐसा करना अशुभ संकेत होता है

तुलसी में जल देने के लाभ

धर्म शास्त्रों के अनुसार तुलसी में जल देने के बहुत सारे लाभ बताए गए हैं जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण लाभ आज हम आपको बताने वाले हैं हिंदू धर्म में लगभग सभी लोगों के घरों में तुलसी जी का वास होता है सभी लोग अपने अपने घरों में तुलसी का पौधा अवश्य लगाते हैं.

तुलसी में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी जी विराजमान होती हैं और उनकी कृपा अपने ऊपर बनाए रखने के लिए लोग तुलसी का पौधा अपने घर में अवश्य स्थापित करते हैं और रोजाना उसकी पूजा और अर्चना करते हैं और तुलसी में प्रतिदिन जल अवश्य चढ़ाते हैं.

जिससे कि उनके घर में सुख शांति और समृद्धि एवं धन-धान्य की कोई कमी ना हो प्रतिदिन तुलसी पूजन से भगवान विष्णु जी को और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का प्रयास सभी लोग करते हैं प्रतिदिन पूजन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

और कई औषधीय गुण उत्पन्न होते हैं जो कई रोगों के निवारण में सहायक होते हैं तुलसी की पत्तियों का सेवन कई रोगों से मुक्ति दिला सकता है और कई लोगों को छोड़ने के लिए तुलसी की पत्तियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है.

FAQ : तुलसी में जल देने की विधि

Q. तुलसी मैया को क्या चढ़ाना चाहिए?

Ans. तुलसी मैया को प्रतिदिन गाय का शुद्ध घी और जल अर्पित करना चाहिए लेकिन गुरुवार के दिन जल चढ़ाना वर्जित है.

Q. तुलसी मैया का पूर्व जन्म में नाम क्या था?

Ans. तुलसी मैया का जन्म एक राक्षस कुल में हुआ था पूर्व जन्म में यह लड़की थी और इनका नाम वृंदा था यह भगवान विष्णु की बड़ी श्रद्धा भाव से भक्ति करती थी.

Q. तुलसी माता में किसका स्वरूप होता है?

Ans. धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक तुलसी माता में श्री भगवान विष्णु जी का स्वरूप होता है ऐसा माना जाता है कि तुलसी मां भगवान विष्णु जी की अवतार हैं.

निष्कर्ष | Conclusion

हम आशा करते हैं कि आपने तुलसी में जल देने की विधि अच्छे से जान ली होगी और अब आप को तुलसी में जल देने में कोई समस्या नहीं आएगी अब आप तुलसी को संपूर्ण विधि विधान के साथ जल देने में सक्षम होंगे.

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