पूजा घर या मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार किस दिशा में होना चाहिए ? Best direction home temple by Vastu Shastra

हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। इसीलिए यह अपने आप में बहुत से रहस्यों को समेटे हुए हैं। आज तक कोई भी हिंदू धर्म के संपूर्ण रहस्य के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं कर पाया है।



हिंदू धर्म ने दुनिया को अनेकों सौगातें दी हैं। जैसे कि योगा, तंत्र मंत्र यंत्र,आयुर्वेद, अंकगणित बीजगणित इत्यादि। vastu sastr ke mutabik ghar me mandir ki shi aur uchit disa kaun si hai aur kyu ?

हिंदू धर्म में ऐसे कई ऋषि और मुनि हुए हैं, जिन्होंने अपने तप के बल पर विभिन्न प्रकार की सिद्धियां हासिल की थी। जैसे परकाया प्रवेश, धन लक्ष्मी सिद्धि,काल भैरव सिद्धि, महाकाली सिद्धि, दुर्गा सिद्धि, मसान सिद्धि इत्यादि।

वैसे तो आज के आधुनिक समय में कोई भी तंत्र मंत्र और वास्तु शास्त्र vastu sastra की बात को नहीं मानता है परंतु इसमें विश्वास करने वाले लोग इस पर अटूट विश्वास करते हैं और वह अपने घर अथवा भवनों के निर्माण में वास्तु शास्त्र का विशेष तौर पर ध्यान देते हैं।

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क्योंकि अगर घर बनाते समय वास्तु शास्त्र पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो घर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं और घर में जल्दी ही नकारात्मक शक्तियों का वास होने लगता है। ! यह पोस्ट आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है !


इसीलिए घर बनाते समय कर्मकांडी लोग वास्तु शास्त्र पर विशेष तौर पर ध्यान देते हैं। वास्तुशास्त्र में घर बनाने के लिए ऐसे कई उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अगर आप आजमाते हैं |

तो आपके घर में किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या नहीं रहेगी और आपके घर में हमेशा लक्ष्मी जी का वास रहेगा तथा आपके घर में खुशियों का निवास रहेगा।

जो लोग ज्योतिष में भरोसा करते हैं वह वास्तु शास्त्र से भी अवश्य ही परिचित होंगे। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण ना सिर्फ उसे सुंदर और आकर्षक बनाता है, बल्कि वास्तु शास्त्र के द्वारा बनाए गए घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है |

और वह हमेशा नकारात्मक ऊर्जा से बचा हुआ रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाए गए घर में लक्ष्मी जी भी रहना पसंद करती हैं।इसके अलावा वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाए गए घर में पूजा के स्थान का मुख्य महत्व होता है।

जिस भी घर में पूजा के स्थान को वास्तु शास्त्र के मद्देनजर बनाया जाता है, वहां हमेशा देवी और देवताओं की कृपा बनी रहती है तथा उस घर में सदा पित्र देव का वास होता है।अगर आप भी अपने घर में पूजा का स्थान बनाना चाहते हैं

परंतु आपको यह नहीं पता कि वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा का स्थल किस दिशा में होना चाहिए, तो चिंता बिल्कुल भी ना करें क्योंकि आगे हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं।

यह भी पढ़े :

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर की सही दिशा क्या होती है ? According to Vastu Shastra the right direction of the home temple

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण ईशान कोण से शुरू होता है। ईशान कोण को धार्मिक दृष्टि से और ज्योतिषी दृष्टि से बहुत ही शुभ माना जाता है।

ईशान कोण को उत्तर पूर्व के मध्य की दिशा को कहते हैं। अगर आप इस दिशा में अपने घर में पूजा स्थल की स्थापना करते हैं, तो यह अत्यंत शुभ होता है।

अगर आपका घर पहले से ही बन चुका है और उसकी संरचना कुछ इस प्रकार की है कि आप अपने घर में ईशान कोण में पूजा घर की स्थापना नहीं कर सकते, तो आप चाहे तो अपने घर में पूजा घर की स्थापना पूर्व दिशा में कर सकते हैं।

ईशान कोण के बाद पूर्व दिशा को भी पूजा स्थल के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। भारत के अधिकतर मंदिरों की दिशा भी पूर्व दिशा ही है। पूर्व दिशा धार्मिक दृष्टि से बहुत ही मंगलकारी मानी जाती है।

अगर आप अपने घर में पूजा स्थलों को पूर्व दिशा की तरफ स्थापित करते हैं, तो ऐसी स्थिति में इशान कोण के महत्व को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ! यह पोस्ट आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है !

ईशान कोण को आप हमेशा स्वच्छ रखें और वहां पर भूलकर भी गंदगी बिल्कुल ना करें। अपने घर में पूजा घर को स्थापित करने के बाद पूजा घर के नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए, आइए जानते हैं की पूजा घर के नियम क्या होते हैं।

पूजा घर के नियम : Rules of the house of worship 

पूजा करने के लिए घर में एक ही स्थान होना चाहिए और वहां पर हमेशा साफ सफाई और स्वच्छता होनी चाहिए। इसके अलावा अपने घर में पूजा स्थल को घर की फर्श से थोड़ा सा ऊपर रखना चाहिए |

पूजा के स्थान पर रोजाना धूप दीप जलाकर अपने इष्ट देव और कुलदेवी का ध्यान करना चाहिए तथा पूजा के स्थान पर रखी गई फोटो और मूर्ति को स्नान करा कर उन्हें साफ और स्वच्छ करने के बाद ही पूजा आरंभ करनी चाहिए।

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