रोज की पूजा कैसे करें : सुख शांति के लिए मंत्र आरती और पूजा नियम | Roj ki puja vidhi : roj ki puja kaise kare

Roj ki puja kaise karni chahiye : रोज की पूजा कैसे करें हेलो दोस्तों आज मैं आप लोगों को बताने जा रही हूं कि रोज की पूजा कैसे करें हमारे हिंदू धर्म में पूजा तो सभी लोग करते हैं और रोज करते हैं लेकिन उनको रोज पूजा करने का कोई भी विधान या विधि पता नहीं होती है उनको या नहीं पता होता है कि रोज की पूजा कैसे की जाती है तो मैंने इसी के लिए इस लेख को लिखा है कि आपको पता चल सके कि रोज की पूजा कैसे की जाती है और किन नियमों और विधानओं द्वारा पूजा को संपन्न किया जाता है.

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तो आइए आज हम आप लोगों को बताते हैं कि रोज की पूजा कैसे की जाती है और रोज पूजा करने के नियम कौन से हैं रोज पूजा करने की विधि कौन सी है और रोज सुबह पूजा करने के फायदे कौन-कौन से हैं इन सारे विषयों पर चर्चा करेंगे और आपको विस्तार से इसकी जानकारी देंगे।

रोज सुबह की पूजा कैसे करें | रोज की पूजा कैसे करें ?

पूजा शुरू करने से पहले जल भर ले और पूजा शुरू करने के सबसे पहले पवित्रीकरण और आचमन किया जाता है अपनी शुद्धिकरण के लिए पवित्रीकरण का मंत्र बोलकर पवित्रीकरण करें उसके बाद अपने ऊपर 3 बार मंत्र बोलते हुए अपना पवित्रीकरण करना है इसके बाद आपको आचमन करना है आचमन करने के लिए आपके उल्टे हाथ की मदद से अपने सीधे हाथ में जल डालकर मुख में छुआना होता है आचमन के कोई भी पूजा सफल नहीं होती है.

आज मन करने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पित करें ध्यान रहे कि जिस भी स्थल पर हम सूर्य देवता को जल अर्पित करते हैं वहां किसी का पैर नहीं पढ़ना चाहिए और वह जगह स्वच्छ होनी चाहिए और रोज ओम सूर्याय नमः बोलते हुए जल अर्पित करें या फिर आप एक थाली में जल अर्पित कर सकते हैं और वह जल आप माथे पर लगा सकते हैं या फिर उसे ग्रहण कर सकते हैं.

सूर्य देवता को जल अर्पित करने के बाद तुलसी माता को भी जल अर्पित जरूर करें तब हम घर के अंदर भगवान जो विराजमान है उनकी पूजा करेंगे सबसे पहले हम जो बासी फूल चढ़े हुए हैं उनको उतार लेंगे उसके बाद एक थाली में भगवान को रखते हैं और स्नान कराते हैं.

सबसे पहले हम शिव परिवार की मूर्ति में बनी भगवान श्री गणेश को ओम श्री गणेशाय नमः कहते हुए जल से स्नान कराएंगे फिर आप ओम गन गणपते नमः इसके बाद ओम गौरी देवाय: नमः ओम शिवाय नमः का जाप करते हुए गौरीशंकर को स्नान कराएं इसके बाद ओम श्री भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करते हुए सभी देवी देवताओं को स्नान कर आएंगे भगवान में हमें पंच देवता की पूजा करनी चाहिए पंच देवता में आते हैं.


भगवान श्री गणेश भगवान श्री सूर्य देव भगवान श्री विष्णु भगवान श्री भोलेनाथ और माता दुर्गा यह सभी पंचदेव कहलाते हैं उनकी पूजा रोज करनी चाहिए इसके बाद हम भगवान भोलेनाथ को स्नान कर आएंगे भगवान भोलेनाथ को जल धारा बहुत ही प्रिय है.

भोलेनाथ को स्नान कराते समय शिव चालीसा पढ़ें इसके बाद भगवान श्री राम जी की प्रतिमा उसमें माता सीता को और प्रतिमा में आने वाले सभी देवी देवताओं को हम जल अर्पित करेंगे और जल अर्पित करने के बाद हम चंदन लगाएंगे या फिर कुमकुम लगाएंगे जो चीज जिस भगवान को नहीं लगाई जाती है.

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वह ना लगाएं और हल्दी चंदन आदि लगाने के बाद और अक्षत अर्पित करें भगवान विष्णु को चंदन का तिलक नहीं लगाते हैं फूल चढ़ाएं उसके बाद हम भोग लगाएंगे और भोग लगाने के बाद धूप दीप जलाएंगे पुष्प की मदद से जल्द जरूर चढ़ाएं और अपने इष्ट देवता की आरती करें।

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पूजा करने से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।। आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।

रोज पूजा करने के नियम

  1. रोज पूजा करते समय हमें सबसे पहले पंच देव गणेश , भगवान सूर्य , भगवान शिव , श्री विष्णु भगवान, माता दुर्गा की पूजा जरूर करनी चाहिए
  2. गणेश भगवान की पूजा किसी भी पूजा में सबसे पहले की जाती है उसके बाद ही अन्य भगवान उस पूजा को स्वीकार करते हैं।
  3. सूर्य देवता जो है वह नवग्रह के राजा माने जाते हैं क्योंकि वह सब अच्छे बुरे कर्मों का फल देते हैं इसी प्रकार भगवान शिव और विष्णु भगवान जो है उनकी भी पूजा करना अनिवार्य है।
  4. मां दुर्गा की पूजा सबसे अंत में की जाती है क्योंकि वह जगत जननी है और परम शक्ति हैं तो उनकी पूजा सबसे अंत में की जाती है।
  5. प्रतिदिन पूजा करते समय इन पंच देवताओं का ध्यान करना चाहिए इसके अलावा हमें कुल देवता और इष्ट देवता की पूजा भी करनी चाहिए। और पूर्वजों को प्रणाम या उनको याद जरूर करना चाहिए। आशु देवता को जरूर याद करना चाहिए इससे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  6. हमें भगवान की पूजा पंचोपचार से करनी चाहिए पंचो का मतलब है कि पहले हमें भगवान को स्नान कराना है स्नान कराने के बाद धूप, दीप, चंदन , प्रसाद सब का प्रयोग करके पूजा करनी है।
  7. पंचोपचार से पूजा करने के बाद हमें आरती जरूर करनी चाहिए। और क्षमा याचना करनी चाहिए
  8. पूजा करते वक्त हमें तुलसी भगवान को जरूर अर्पित करनी चाहिए प्रसाद के तौर पर ऐसा कहा जाता है कि अगर आप तुलसी अर्पित नहीं करते हैं तो वह प्रसाद भगवान नहीं ग्रहण करते हैं।

आरती करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

मंत्र, किस देवता के लिउ बोला जाता है ये मंत्र कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि।। कर्पूरगौरं- जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।

गणेश भगवान की आरती

रोज की पूजा में सबसे पहले गणेश भगवान की आरती करनी चाहिए और उसके बाद जिस भी भगवान की आप पूजा करते हैं चाहे वह शंकर भगवान है या फिर लक्ष्मी माता हो कोई भी भगवान हो आप उसकी आरती कीजिए वैसे तो भगवान सभी बराबर होते हैं लेकिन कुछ लोग भगवान को भी अलग-अलग दर्जे में रख कर पूछते हैं।

ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ओम जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।

FAQ : रोज की पूजा कैसे करें

पूजा की शुरुआत कैसे करें?

सबसे पहले सुबह प्रातः काल में उठे इसके बाद स्नान करके स्वच्छ कपड़े धारण करें उसके बाद पूजा स्थल पर बैठ जाए सबसे पहले जल से भगवान को स्नान करवाएं उसके बाद चंदन टीका लगाएं और फूल चढ़ाएं फिर उसके बाद आगे की पूजा करें और आरती कर की पूजा की समाप्ति करें।

पूजा करते समय क्या बोलना चाहिए?

अगर आपसे पूजा में कोई खराबी हो गई हो या फिर आपने कोई गलती कर दी हो पूजा करने में तो जब मैं क्षमा मांगने के लिए बोला जाता है ये मंत्र आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देव!

पूजा करने के बाद कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।। गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च। आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।। अर्थ- हे परमेश्वर।

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निष्कर्ष

दोस्तों जैसा कि आपने देखा मैंने आज आपको रोज की पूजा कैसे करें? बताया अगर आपको भी जानना है कि रोज की पूजा कैसे करते हैं तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़े तब आपको पता चल जाएगा कि रोज की पूजा कैसे की जाती है और किन नियमों को अपनाकर रोज की पूजा करेंगे तो आपके लिए लाभदायक होगा अगर आपको जानना है अगर आप भी रोज की पूजा करते हैं तो आपको कौन कौन से फल मिलते हैं। तो आपको पता चल जाएगा।

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