सिद्धि क्या है ? पूर्ण जानकारी – सिद्धियां कितनी होती है ? सिद्धियां कितने प्रकार की होती है ?

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यदि आपने हॉलीवुड फिल्में देखी है तो, आपको उनमें अजीबो-गरीब शक्तियां देखने को मिलती हैं जैसे कि उसके सुपर हीरो का  हवा में उड़ना, बड़े से छोटा हो जाना या फिर पलक झपकते ही गायब हो जाना ऐसी  ही बहुत तरह की ताकत होती हैं ,  जो एक आम इंसान को सुपर हीरो में तब्दील कर देती है |

हमारे भारतीय धर्म में उन्हीं ताकतों को सिद्धियां कहां गया है  कई प्रकार की होती है जिनके बारे में इस लेख में आपको विस्तार से बताएंगे इसलिए इस लेख को अंत तक पढ़ें,  लास्ट में हम आपको इन सिद्धियों को कैसे पाएं यह भी बताएंगे हांलाकि आगे चलकर हम इन सिद्धियों  को पाने के तरीके के बारे में  विस्तार से समझाएंगे, चलिये अभी इन प्रमुख  सिद्धियों के बारे में जान लेते हैं |

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इस सिद्धि शब्द पर हम विचार करें तो पाते हैं कि इसके अपने अलग-अलग अर्थ निकलते हैं | यूँ तो सिद्धि का शाब्दिक अर्थ किसी  पूर्णता, सफलता और प्राप्ति से है |हमारे धर्म शास्त्र पंचतंत्र के अनुसार असामान्य कौशल या क्षमता अर्जित करने को सिद्धि कहा गया है |

सिद्धि को सामान्य अर्थों में हिसी कार्य विशेष में पारंगत होना भी है | योगानुसार सिद्धि का अर्थ इन्द्रियों की पुष्टता और व्यापकता होती है |

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि सिद्धि का मतलब होता है –

” किसी ऐसी ऊर्जा को जाग्रत करना जिससे मन वांछित कार्य में सफलता प्राप्त की जा सके 

अर्थात किसी भी विषय में पारंगत होना एक प्रकार की सिद्धि ही कहा जाता है ” 

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 या

” चमत्कारिक साधनों द्वारा अलौकिक शक्तियों को अर्जित करने को भी सिद्धि प्राप्त करना कहा जाता है  “

सिद्धियां दो प्रकार से होती है : 

1- शारीरिक सिद्धि

2- मानसिक सिद्धि

इन सिद्धियों को सिद्ध करने के लिए हमें जप ,तप, मंत्र ,और समाधि आदि माध्यमों का प्रयोग करना पड़ता है|

प्राप्त करने वाली सिद्धियां कितने प्रकार की होती है ? Type of siddhi ?

सिद्धियाँ मुख्यतः दो प्रकार की होती है :

 परा

विषय सम्बन्धी सब प्रकार की उत्तम , माध्यम और अधम सिद्धियाँ अपरा सिद्धियाँ कहलाती है |

 अपरा

अनके अलावा जो स्व – स्वरूप के अनुभव के उपयोगी सिद्धियाँ होती हैं वे परा सिद्धियाँ कहलाती हैं |

इन सिद्धियों को प्राप्त करने के बाद असंभव से असंभव कार्य साधक के लिए असंभव नहीं रह जाते हैं | इन सिद्धियों के बाद मानव सांसारिक मोह माया से मुक्त हो जाता है | कामनाओं से रहित हो जाता है | भौतिक बस्तुओं की लालसा समाप्त हो जाती है | यही वे सिद्धियाँ हैं जो हम देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं

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उपरोक्त सिद्धियों के अलावा मार्कंडेय पुराण और गीता में श्री कृष्ण  के अनुसार आठ प्रकार की सिद्धियों का वर्णन किया गया है | ये अष्ट सिद्धियाँ कहलाती हैं |

आठ प्रकार की सिद्धियां अष्ट सिद्धि कौन सी है ? 

अणिमा महिमा चैव लघिमा गरिमा तथा |

प्राप्तिः प्राकाम्यमीशित्वं वशित्वं चाष्ट सिद्धयः ||

अर्थ – अणिमा , महिमा, लघिमा, गरिमा तथा प्राप्ति प्राकाम्य इशित्व और वशित्व ये सिद्धियां “अष्टसिद्धि” कहलाती हैं|

आप ने अक्सर अष्ट सिद्धियों के बारे में तो अवस्य सुना होगा और यदि आप जिज्ञासु हुये तो आप के मन में इनके बारे में जानने की इच्छा भी हुई होगी , इसलिये आज हम आप की इसी इच्छा को शांत करने के लिए इस  लेख में अष्ट सिद्धियों के बारे में बताएँगे :

1. अणिमा : अष्ट सिद्धियों में सबसे पहली सिद्धि अणिमा हैं, जिसका अर्थ! अपने देह को एक अणु के समान सूक्ष्म करने की शक्ति से हैं।जिस प्रकार हम अपने नग्न आंखों से एक अणु को नहीं देख सकते, उसी तरह अणिमा सिद्धि प्राप्त करने के पश्चात दुसरा कोई व्यक्ति सिद्धि प्राप्त करने वाले को नहीं देख सकता हैं। साधक जब चाहे एक अणु के बराबर का सूक्ष्म देह धारण करने में सक्षम होता हैं।

2. महिमा : अणिमा के ठीक विपरीत प्रकार की सिद्धि हैं महिमा, साधक जब चाहे अपने शरीर को असीमित विशालता करने में सक्षम होता हैं, वह अपने शरीर को किसी भी सीमा तक फैला सकता हैं।

3. गरिमा : इस सिद्धि को प्राप्त करने के पश्चात साधक अपने शरीर के भार को असीमित तरीके से बढ़ा सकता हैं। साधक का आकार तो सीमित ही रहता हैं, परन्तु उसके शरीर का भार इतना बढ़ जाता हैं कि उसे कोई शक्ति हिला नहीं सकती हैं।

4. लघिमा : साधक का शरीर इतना हल्का हो सकता है कि वह पवन से भी तेज गति से उड़ सकता हैं। उसके शरीर का भार ना के बराबर हो जाता हैं।

5. प्राप्ति : साधक बिना किसी रोक-टोक के किसी भी स्थान पर, कहीं भी जा सकता हैं। अपनी इच्छानुसार अन्य मनुष्यों के सनमुख अदृश्य होकर, साधक जहाँ जाना चाहें वही जा सकता हैं तथा उसे कोई देख नहीं सकता हैं।

6. प्रकाम्य : साधक किसी के मन की बात को बहुत सरलता से समझ सकता हैं, फिर सामने वाला व्यक्ति अपने मन की बात की अभिव्यक्ति करें या नहीं।

7. ईशत्व : यह भगवान की उपाधि हैं, यह सिद्धि प्राप्त करने से पश्चात साधक स्वयं ईश्वर स्वरूप हो जाता हैं, वह दुनिया पर अपना आधिपत्य स्थापित कर सकता हैं।

8. वशित्व : वशित्व प्राप्त करने के पश्चात साधक किसी भी व्यक्ति को अपना दास बनाकर रख सकता हैं। वह जिसे चाहें अपने वश में कर सकता हैं या किसी की भी पराजय का कारण बन सकता हैं।

रामायण के अनुसार ये सिद्धियाँ केवल हनुमान के हैं |  इसी लिए तो हनुमान चालीसा में इसका वर्णन मिलता है की ,

|| अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता ||

हनुमान चालीसा की ये पंक्तियां यह बताती हैं कि सीता माता की कृपा से पवनपुत्र हनुमान, अपने भक्तों को अष्ट सिद्धि और नव निधि प्रदान करते हैं। जो भी प्राणी उनकी सच्चे मन और श्रद्धा के साथ आराधना करता है, हनुमान उसे अलौकिक सिद्धियां प्रदान करके कृतार्थ करते हैं।

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इन अष्ट सिद्धि के बारे में विस्तार से हम आपको अगले लेख में बताएँगे और इन्हें अर्जित यानि प्राप्त करने के बारे में भी बताएँगे |

इनके अतिरिक्त अन्य सिद्धियाँ भी है जो 16 प्रकार की कही गयीं हैं |

16 प्रकार की सिद्धियाँ कौन सी है ? 

1. वाक् सिद्धि

जीव जो बचन बोलता है वह उसके व्यवहार पर निर्भर करता है क्योकि उसके द्वारा बोले गए शब्दों का एक महत्वपूर्ण अर्थ भी होता है | शब्दों में श्राप और बरदान दोनों छिपे होते हैं | अतः जो भी बचन बोले जाएँ तो ध्यान रहे किवे व्यवहार पूर्ण हो |

2. दिव्य दृष्टि सिद्धि

दिव्य दृष्टि सिद्धि होने का अर्थ है किजिस व्यक्ति के सम्बन्ध में चिंतन किया जाये उसके भूत , भविष्य और वर्तमान का ज्ञान हो जाये | उनके साथ होने वाली सभी प्रकार की घटनाओं एवं करने वाले कार्यों के बारे में भी जानकारी हो जाती है |

3. प्रज्ञा सिद्धि

प्रज्ञा सिद्धि से मतलब है मेधा अर्थात बुद्धि, ज्ञान या स्मरण शक्ति | जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के ज्ञान को अपनी बुद्धि में समेत लेना है | ज्ञान के साथ साथ चेतना को भी जाग्रत करना है |

4. दूर श्रवण शक्ति सिद्धि

भूत काल में घटित हुई सभी घटनाओं को जान लेना ही श्रवण सिद्धि है |

5. कायाकल्प सिद्धि

समय के साथ-साथ शरीर जर्जर हो जाता है शरीर से तेज , यौवन आदि नष्ट हो जाता है शरीर में विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते है |इस सिद्धि से पुनः यौवन प्राप्त किया जा सकता है |

6. पूर्ण पुरुषत्व सिद्धि

इसका तात्पर्य है कि मानव को निडर , बलवान और अद्वितीय पराक्रम का होना |

7.  जल गमन सिद्धि

इस सिद्धि से मानव जल पर ऐसे चलना सीख जाता है जैसे वह भूमि पर चल रहा है | तालाब , नदी या समुद्रों के जल पर विचरण कर सकता है |

8. वायु गमन सिद्धि

यह सिद्धि भी विशेष होती है | इस सिद्धि से शरीर को सूक्ष्म रूप में बदला जासकता है और साथ ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर, लोक परलोक में भी गमन किया जा सकता है |

9. अदृश्य सिद्धि

इस सिद्धि से अपने शरीर को सूक्ष्म करके अदृश्य किया जा सकता है इसमें दूसरा कोइ नहीं देख सकता है |

10. विषोका सिद्धि (बहु रुपी )

इस सिद्धि से अपने को अनेक रूपों में परिवर्तित कर लेना है | अलग –अलग स्थानों पर अलग –अलग दिखाई देना |

11. देव दर्शन सिद्धि

इस सिद्धि के प्राप्त होने पर देवताओं के साथ साहचर्य स्थापित करके उचित सहयोग लिया जा सकता है |

12. गुरुत्व सिद्धि

इस सिद्धि से ही जगद्गुरु बना जा सकता है जैसे श्री कृष्णा को जगद्गुरु कहा जाता है | इस सिद्धि का मतलब ही है कि गरिमावान होना | जिसके पास केवल देने के लिए ही हो |

13. सर्वग्रहण सिद्धि

जिस व्यक्ति के पास दया, दृढ़ता , प्रखरता , ओज ,बल ,तेज आदि गुण होते है वह व्यक्ति दिनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है | सारे विश्व में श्रेष्ठ और अद्वितीय माना जाता है | वह सदैव लोकहित के ही कार्य करता है |

14. सम्मोहन सिद्धि

सम्मोहन का तात्पर्य किसभी को अपने अनुकूल बना लेना | मानवों के साथ – साथ पशु-पक्षी और प्रकृति को भी अपने अनुकूल बना लेना है |

15. अमरत्व सिद्धि

इस प्रकार की सिद्धि से पूर्ण व्यक्ति अपनी इच्छा से जब चाहे अपनी मृत्यु को प्राप्त कर शरीर को त्याग कर सकता है इस प्रकार का व्यक्ति कालजयी होता है |

16. अनूर्मी सिद्धि

ऐसी सिद्धि से मानव के ऊपर किसी प्रकार का सुख- दुःख , भूख –प्यास ,सर्दी- गर्मी और भावना या दुर्भावना का कोइ प्रभाव नहीं पड़ता है |

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सिद्धियाँ कैसे प्राप्त करें ?

सिद्धि प्राप्त करना कोई आसान काम नहीं है सिद्धि प्राप्त करने के तरीके काफी मुश्किल है उनके लिए किये जाने वाले तप बड़ी सावधानी से किये जाते है | इस कार्य में तन , मन सब तपता है |

इसके लिए त्याग और बलिदान करना पड़ता है | सभी प्रकार की सिद्धियों को प्राप्त करने का एक मात्र उपाय साधना है | मन में धैर्य होना जरूरी है | क्योकि पहले दो या तीन महीने में केवल आपको प्रयास करना पड़ेगा जिससे स्पष्ट हो जायेगा कि आप किस प्रकार की सिद्धि कर पाएंगे |

सिद्धियाँ प्राप्त करने के नियम :

सिद्धि प्राप्त करने के कुच्छ आसान से नियम है जिन्हें ध्यान देना आवश्यक हो जाता है |

  1. सिद्धि के लिये पहले आपको उचित पात्र बनना होगा |
  2. सिद्धि के लिए कुंडली या अन्य माध्यम से जानकारी लेना |
  3. पात्रता होने पर सिद्धि के लिए प्रयास करना |
  4. सफल होने पर सिद्धि का निरंतर प्रयास करना |
  5. सिद्धि प्राप्त होने पर केवल पुरुषार्थ के लिए ही प्रयोग करना |

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