साधना क्या है ? पूर्ण जानकारी सावधानियां और साधनाओं के प्रकार ! What is spiritual practice and practices Complete information in hindi

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दुनिया में यदि अपने मन पर हम विजय प्राप्त कर लेते हैं तुम मानो संपूर्ण विश्व पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। साधना का मतलब जब हम विधिवत अपने मन को स्थिर कर लेते हैं और मनोवांछित कार्य करने में सक्षम हो जाते हैं तो इस प्रकार से यह हमारी साधना sadhna होती है। sadhna kya hai aur kaise kare aur sadhan ke kitne prakar hai ?

दूसरे शब्दों में साधना sadhna का तात्पर्य अपने मन को काबू में करना होता है जिसके माध्यम से हम अपनी विशेष कार्यों की ओर उन्मुख हो जाते हैं। साधना के शाब्दिक अर्थ लगातार प्रयास करते रहना है तंत्र मंत्र tantra mantra में साधना के चार स्तरों को बताया गया है।

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  1. ब्रह्म साधना या आध्यात्मिक साधना
  2. ध्यान साधना
  3. स्तुति साधना और
  4. मूर्ति पूजा

इन साधनों के माध्यम से हम कई प्रकार की सिद्धियों को प्राप्त कर लेते हैं।

हिंदू धर्म में हजारों प्रकार की साधनाओं का वर्णन सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए किया गया है। साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करके मनुष्य हजारों प्रकार के लाभ benefits प्राप्त करता है साधना को पुनः चार प्रकार से किया जाता है।

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  1. तंत्र साधना
  2. मंत्र साधना
  3. यंत्र साधना
  4. योग साधना

इन साधनों के द्वारा मन को एकाग्र किया जाता है और व्यक्ति विभिन्न प्रकार की सिद्धियों का स्वामी बन जाता है जिससे बहुत सी साधनाएं अपने आप उसके अधीन हो जाती हैं।

साधना से प्राप्त सिद्धियां व्यक्ति को हवा में उड़ा सकती हैं पानी पर चला सकती हैं तथा दूर बैठे अत्यंत दूर वस्तु को देख सकते हैं जिनको देखकर हम आप आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

प्रकार की सिद्धियां केवल वही अर्जित कर पाते हैं जिनका मन जागृत हो जाता है मन मस्तिष्क अनावश्यक विचारों से रहित हो जाता है अपने मन पर पूर्ण नियंत्रण होता है ऐसे ही लोग चमत्कार कर सकते हैं।

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साधना में श्रद्धा क्यों जरूरी है ? Is reverence necessary in spiritual practice?

किसी भी प्रकार के साधना में श्रद्धा का होना बहुत जरूरी है बिना श्रद्धा के कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाता है वही व्यक्ति जीवन में सफल हो सकता है जिसके मन में अपार श्रद्धा होती है।

ऐसे व्यक्ति श्रद्धा के द्वारा अपने जीवन क्षणों को सामने वाले व्यक्ति के जीवन के क्षणों में बांध लेते हैं श्रद्धा पूरे मन से होनी चाहिए हमारा मन ही दूसरे व्यक्ति के मन से टकराकर अनुभूति प्राप्त करता है और सफलता मिलती है।

जब व्यक्ति की श्रद्धा होती है तो विभिन्न प्रकार के काम उसके सफल हो जाते हैं उदाहरण के तौर पर यदि कोई स्त्री कहीं एकांत में अपने को सुरक्षित अनु भव करती हैं परंतु उसका पति साथ में है |

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तो कई लोगों के बीच में भले ही वह उनसे बलवान क्यों ना हो परंतु वह असहज महसूस नहीं करती है क्योंकि उसको अपने पति के और उस पर पूरी श्रद्धा रहती हैं वही जिनको अपने पति के ऊपर श्रद्धा नहीं होती है वह हमेशा अपने को असुरक्षित अनुभव करती हैं।

यदि गुरु के प्रति शिष्य की श्रद्धा नहीं होती है तो कुछ भी शिष्य सीखने में समर्थ नहीं हो सकता और गुरु को भी अपने शिष्य के प्रति श्रद्धा होती है तभी वह सारा ज्ञान अपने शिष्य को दे पाता है इसलिए श्रद्धा पूर्ण मन से होनी चाहिए तभी हम सभी प्रकार से समर्थ हो सकते हैं।

श्रद्धा होने पर मन में अत्यधिक उमंग और उत्साह बना रहता है यदि मन में अविश्वास रहता है तो चाहे जितनी जिस प्रकार से ध्यान केंद्रित करें हमारा ध्यान केंद्रित नहीं हो सकता है साधना में इसी प्रकार से पूर्ण विश्वास होना चाहिए किसी भी मंत्र का जाप करने के लिए पूरी तरह से तन्मयता होनी जरूरी है अन्यथा पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकते।

साधना में सफलता के लिए मन निर्विकार होना चाहिये : In order to succeed in meditation, mind should be devoid of

किसी भी प्रकार की साधना से सिद्धियां प्राप्त करने के लिए हमारे मन मस्तिष्क में निर्विकार होना जरूरी है जब मस्तिष्क में किसी भी प्रकार की कोई विकार नहीं होंगे तथा अन्य प्रकार के विचार भी नहीं होंगे तो हम अपनी साधना के द्वारा हरसिद्धि प्राप्त कर लेते हैं।

यदि हमारा मन निर्विकार नहीं होगा तो हमारे ऊपर कई प्रकार के विचार आघात करेंगे फल स्वरुप हम भी सामान्य बने रहेंगे। यदि किसी भी प्रकार के मंत्र को प्रभावित करना चाहते हैं तो मन निर्विकार होना आवश्यक है तभी हम मंत्र पर प्रभाव डालने में समर्थ हो पाते हैं।

साधारण बने और अपने पर गर्व बिलकुल ना करें : Be simple and don’t be proud of yourself 

किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा शत्रु उसका घमंड होता है घमंड आदमी को निर्बल बना देता है ।ठीक यही स्थिति साधना में भी होती हैं साधना में कभी भी किसी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए बल्कि आप यह सोचे कि जिस साधना या सिद्धि को हम प्राप्त कर रहे हैं ।

इससे पहले भी कई लोगों ने इसे प्राप्त कर लिया है और हमसे ज्यादा ऊंचे स्तर पर लोगों ने ज्ञान प्राप्त किया है जब इस तरह का विचार आपके मन में रहेगा तो आपको उपलब्धि प्राप्त होगी। बिना घमंड के आदमी संतुष्ट रह सकता है और मन निर्मल हो सकता है बेचैन मन कभी भी कोई कार्य करने में सफल नहीं हो सकता।

आध्यात्मिक साधना क्या है ? What is spiritual practice?

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आध्यात्मिक साधना का मतलब है कि व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसे परिवर्तन करना है जिससे वह संपूर्ण सत्य को जाने और ईश्वर के तुल्य बनाने में समर्थ हो जाता है।

अध्यात्मिक साधना मूल उद्देश्य है कि व्यक्ति का संपूर्ण शरीर या एक एक अंग ईश्वर की प्राप्ति करें या उसके तुल्य हो जाए। आध्यात्मिक साधना ज्ञान मार्ग कर्म मार्ग और भक्ति मार्ग में बाटी गई है।

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1. ज्ञान मार्ग क्या है ? What is the path of knowledge?

मनुष्य सांसारिक जीवन में माया मुंह में फंस जाता है उसे यह नहीं पता होता है कि वह ईश्वर की सत्ता का एक केवल अंश है वह अज्ञानता वश माया मोह के बंधन में बंध जाता है। इन सब से छुटकारा पाना ही आध्यात्मिक साधना का ज्ञान मार्ग है।

आध्यात्मिक साधना के ज्ञान मार्ग मे व्यक्ति को ईश्वर की सत्ता का ज्ञान कराती है। विभिन्न प्रकार की इच्छाओं का त्याग हो जाता है और मन से सांसारिक जीवन से उठकर ईश्वर की शरण में चला जाता है उसे संसार की सभी वस्तुएं तुच्छ लगने लगती हैं।

2. कर्म मार्ग क्या है ? What is karma path?

कर्म मार्ग में व्यक्ति को साधना के माध्यम से शरीर के द्वारा सभी प्रकार की अवस्थाओं में उचित कर्म करते रहना जरुरी है। साधना की मार्ग में उचित कर्म और आचरण आवश्यक होता है। व्यक्ति कितना भी ज्ञानी क्यों न हो यदि वह उचित कर्म नहीं करता है तो उसका ज्ञान व्यर्थ है।! यह पोस्ट आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है !

3. भक्ति मार्ग क्या है ? What is the path of devotion?

भक्ति मार्ग एक प्रेम का मार्ग है बड़े-बड़े ज्ञानी संत सांसारिक वस्तुओं को त्याग कर केवल ईश्वर प्रेम किया है। प्रेम ही संसार का सबसे बड़ा सार होता है। जिसके माध्यम से व्यक्ति सीधे ईश्वर से जुड़ जाता है।

ध्यान साधना क्या है ? ध्यान साधना किसे कहते है ? What is meditation in hindi ? 

ध्यान साधना का तात्पर्य है कि व्यक्ति अपनी मनोदशा को पूर्ण रूप से एकाग्र करना होता है अर्थात जब हम अपने मन को पूर्ण रूप से नियंत्रित कर लेते हैं तो हमारी सभी मनोदशाए पूर्ण हो जाती हैं ।

ध्यान साधना के अंतर्गत हम तब तक वह करते रहते हैं जब तक हम पूरी तरह से वैसा करने में समर्थ नहीं हो जाते जैसा हम चाहते हैं यही ध्यान साधना है। ध्यान साधना एक ऐसी युक्ति है जो संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करती है। इसके माध्यम से हम संपूर्ण शांति मन की एकाग्रता से प्राप्त करते हैं।

स्तुति साधना क्या है ? What is praise?

स्तुति ईश्वर भक्तों द्वारा अपने इष्ट देव का गुणगान किया जाता है हम अपने ईश्वर का स्वरूप उसकी महिमा तथा उसकी शक्तियों के विषय में गुणगान करते हैं और निरंतर आस्था रखकर उसको पाने का प्रयास करते हैं हम अपने इष्ट देव से यह प्रार्थना करते हैं कि हमें हमारी इच्छाओं के अनुरूप फल प्राप्ति हो। ईश्वर की स्तुति प्रार्थना भजन कीर्तन तथा सत्संग के माध्यम से भी की जाती है।

मूर्ति पूजा क्या है ? What is idol worship?

आध्यात्मिक साधना से सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए साधक मूर्ति के सामने पूजा करता है और अपने इष्ट देव को याद करता है उसका गुणगान करता है तथा मन ही मन अपनी मनोकामना को पूर्ण करने की इच्छा अपने इष्ट देव से करता है।

किसी पत्थर मिट्टी या अन्य चीजों से हम अपने इष्ट देव की प्रतिमा तैयार करते हैं और उसमें सर्वगुण संपन्न परमात्मा की छवि को देखते हैं।

तंत्र साधना क्या है ? What is Tantra Sadhana?

तंत्र साधना से व्यक्ति अपने अंदर कई तरह की रहस्यमई शक्तियों को जान सकता है और आत्म शक्ति का विकास करता है। तंत्र साधना एक प्रकार की रहस्यमई साधना होती है। इसके बारे में और ऐसी कई साधनाओ के बारे में हम इस वेबसाइट पर आप को आगे अन्य लिखो में बताएँगे या फिर आप इस वेबसाइट पर सर्च कर सकते है |

मंत्र साधना क्या है ? What is Mantra Sadhana?

साधना एक ऐसी साधना है जिसके द्वारा सांसारिक बाधाओं को तोड़कर आध्यात्मिकता की ओर बढ़ते हैं और किसी भी प्रकार की समस्या को हम हल कर सकते हैं। मंत्रों का जाप करके अपने अंदर के समस्त विकारों को निकाल देते हैं और मन मस्तिष्क में एक नई ऊर्जा का संचार होता है मंत्रों के द्वारा हम विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर कर लेते हैं।

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यंत्र साधना क्या है ? What is Yantra Sadhana?

साधना में कोई भी व्यक्ति अपने यंत्र को ध्यान देते हुए संपूर्ण ब्रह्मांड के विस्तार को अनुभव करता है। जब वह पूर्ण रुप से उसी में लिप्त हो जाता है तो से ब्रह्मांड और स्वयं का अर्थात लोक परलोक या लौकिक पारलौकिक में अंतर नहीं दिखाई देता है।! यह पोस्ट आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है !

योग साधना क्या है ? What is yoga practice?

योग साधना एक ऐसी साधना है जिसके माध्यम से हम आत्मज्ञ बनते हैं। यह साधना पूर्ण रूप से संयमित होकर करने से विभिन्न प्रकार की सत्यता का ज्ञान होता है। योग साधना जीवन को सुख शांति और आनंद देती है। आत्मा और परमात्मा से मिलन करने का एक माध्यम होता है। योग से ही हमारा शरीर स्वस्थ और निरोगी होता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता रहता है।

अभी तक इस लेख के माध्यम में केवल साधना के विषय में वर्णन किया गया है अब हम आपको साधना से प्राप्त सिद्धियों के विषय में बात करेंगे एक प्रकार से सिद्धियों को केवल आठ प्रकार की माना गया है। परंतु दुनिया में हजारों प्रकार की सिद्धियां होती हैं आइए हम कुछ विशिष्ट सिद्धियों के बारे में चर्चा करेंगे

हम कई बार बहुत प्रयत्न करने के बाद असफलता ही प्राप्त करते हैं क्योंकि हमारा मन चंचल और  स्थिर नहीं रहता है। सिद्धियों के द्वारा अपने मन को स्थिर और विचार शून्य बना सकते है।

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