नील परी की साधना कैसे करें ? परी को कैसे बुलाया जाता है ? Neel Pari Sadhana

Neel pari sadhana kaise kare ? पाठको आपने कभी ना कभी परियों की कहानी तो अवश्य सुनी होगी, खासतौर पर जब आपका बचपना होगा तब आपने अपने घर के बुजुर्गों से परियों की कहानी अवश्य सुनी होगी| वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परियों का जिक्र ज्यादातर इस्लाम मजहब में देखने को मिलता है, वहीं अगर हम हिंदू धर्म की बात करें तो हमारे हिंदू धर्म में यक्षिणी योनि होती है | नील परी साधना क्यों की जाती है ? Neel pari kaisi hoti hai ?



जैसे हमारे हिंदू धर्म में यक्षिणी योनि होती है उसी तरह ही इस्लाम मजहब में परियां होती हैं, आपने बचपन में यह बात अवश्य सुनी होगी कि परी बहुत ही सुंदर होती है और उसके कपड़े सफेद होते हैं तथा उसके शरीर से हमेशा खुशबू आती रहती है |

और उससे हम जो भी मांगते हैं वह हमें लाकर देती है, हालांकि बहुत से लोगों की राय में यह सिर्फ एक कोरी कल्पना है, पर अगर देखा जाए तो परी वास्तव में होती है और इस्लाम मजहब में इसका जिक्र भी किया गया है, कई मौलाना इसकी सिद्धि करके लोगों की भलाई का काम करते हैं, साथ ही काफी अन्य काम भी करते हैं |

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इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो परी की साधना करना चाहते हैं और परी की सिद्धि करके उससे मनचाहा काम लेना चाहते हैं परंतु परी की साधना कैसे करते हैं उन्हें इसके बारे में सही जानकारी नहीं होती है |

जिसके कारण कई बार वह अनजाने में परी की साधना करने निकल पड़ते हैं और गलत विधि से परी की सिद्धि करने के कारण उन्हें परी साधना सिद्ध नहीं होती है और वह निराश हो जाते हैं |


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परी साधना काफी कम समय में सिद्ध हो जाती है और इसीलिए बहुत से साधक परी साधना को सिद्ध करने का प्रयास करते हैं |

परियां भी विभिन्न तरह की होती है, जिसमें से एक परी है नील परी और आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं, जो साधक नील परी वशीकरण की साधना जानना चाहते हैं उनके लिए आज का यह आर्टिकल काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको नील परी वशीकरण साधना कैसे सिद्ध करें, इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं |

नील परी कैसी होती है ? How does neel Pari

वैसे तो नील परी साधना के बारे में इंटरनेट पर काफी कम जानकारी है परंतु ऐसा माना जाता है कि नील परी काफी मायावी परी होती है और यह किसी एकांत जगह पर रहती है |

सामान्य तौर पर अगर तांत्रिकों के अनुसार देखा जाए तो नीलपरी किसी मसान के पास या फिर किसी एकांत जगह पर स्थित पेड़ पौधे पर रहती है और जो साधक इसका अमल करता है उसे बहुत जल्दी ही अच्छे रिजल्ट प्राप्त होते हैं, इसी के कारण बहुत से लोग इस साधना को करने में इंटरेस्टेड रहते हैं |

नील परी साधना क्यों की जाती है ? Why Neel Pari Sadhana is done

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया है कि कोई भी साधक किसी भी साधना को अपनी किसी न किसी इच्छा की पूर्ति के लिए ही करता है, इसी तरह नील परी की साधना वैसे साधक करते हैं जो भौतिक सुख सुविधा चाहते हैं |

या फिर जिन्हें किसी प्रकार की गुप्त जानकारी प्राप्त करनी होती है, वही लोग नील परी की साधना करते हैं, ऐसा नहीं है कि नील परी की साधना करने के बाद साधक को भौतिक सुख-सुविधा और गुप्त जानकारी ही मिलती है |

इसके अलावा भी नीलपरी साधक को विभिन्न तरह से फायदे पहुंचाती है और साधक इस नील परी को सिद्ध करने के बाद अपना मनचाहा काम भी करवा सकते हैं तथा समाज में मान सम्मान प्राप्त कर सकते हैं |

नील परी की साधना किस रूप में की जाती है ? How is Neel Pari cultivated

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप नील परी की साधना कर रहे हैं या फिर ऐसा कोई भी साधक जो नील परी को सिद्ध करना चाहता है उसे नीलपरी को बहन के रूप में ही सिद्ध करने का आह्वान करना चाहिए |

क्योंकि फिर यह आपको उन्हीं के अनुसार अपनी शक्तियां देंगी, नील परी की साधना बहुत जल्दी ही अच्छे रिजल्ट देती है परंतु यह साधना पूरी होने से पहले साधक की कड़ी परीक्षा भी लेती है |

नील परी के अलावा भी विभिन्न परियां है जिसकी साधना साधक कर सकते हैं परंतु उनकी बात बाद में करेंगे, फिलहाल चलते हैं नील परी साधना के ऊपर और जानते हैं कि नील परी साधना कैसे की जाती है तथा विधि क्या है |

नील परी की सिद्धि कैसे करें ? How to prove neel pari

विशमिल्लाहररहमान नीररहीम लाय जल्ललिलहालेवक्ताइल्लाहू

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो साधक नील परी को सिद्ध करना चाहते हैं उन्हें नील परी को सिद्ध करने के लिए गातार 41 दिन तक इसकी साधना करनी होगी क्योंकि नीलपरी को सिद्ध करने का समय 41 दिन का है

और इसे सिद्ध करने की विधि इस्लामिक विधि है इसीलिए नील परी को सिद्ध करने से पहले साधक को वासनाओं के मायाजाल से बाहर निकलना पड़ेगा अगर आप किसी भी तरह के गलत विचार को लेकर इस साधना को शुरू करते हैं तो आपको उसमें सफलता नहीं मिलेगी और आपको निराश होना पड़ सकता है |

इसीलिए इस साधना को शुरू करने से पहले अपने मन को बिल्कुल साफ कर ले और शुद्ध मन से इस साधना को प्रारंभ करें, बेहतर होगा की साधना से पहले ही आप नील परी को बहन स्वरूप में ध्यान कर ले|

आइए अब आगे जानते हैं कि नील परी की साधना को करने के लिए आपको किन किन सामग्री और कौन-कौन से साधनों की आवश्यकता पड़ेगी, ताकि आपकी साधना बिना किसी रूकावट के संपन्न हो जाए और नीलपरी आपसे सिद्ध हो जाए

नील परी की साधना विधि क्या है ? Neel Pari’s cultivation method

नील परी को सिद्ध करने के लिए किसी एकांत जगह पर जाकर एक सफेद कपड़ा ले,याद रखें कि वह सफेद कपड़ा सवा हाथ चौड़ा और ढाई हाथ लंबा होना चाहिए| इस सफेद कपड़े को जमीन पर बिछाए, उसके बाद सफेद कपड़े के ऊपर खुद बैठ जाएं और तहमद, गंजी और अपने माथे पर टोपी पहन ले,

फिर रात के 8:00 बजे पूर्व दिशा की ओर अपना मुंह करके बैठ जाएं और साधना शुरू करने के पहले गुलाब के इत्र का फोआ, एक लगा हुआ मीठा पान जिसके साथ लौंग लगा हो, इसके अलावा एक सफ़ेद फूल, एक वृक्ष की डाली, पानी का लोटा और लोबान धूप जैसी वस्तुए साधक को अपने पास रखनी है |

साधना में मंत्रों का जाप करने के लिए 101 मोती की माला होना भी जरूरी है, जब साधक साधना की शुरुआत करें तभी उसे यह संकल्प लेना होता है कि आप नील परी को अपनी बहन के रूप में सिद्ध करना करना चाहते हैं |

जिसमें काम क्रोध का कोई भी भाव नहीं है, इसके बाद जब आप साधना शुरू करें तो उसके पहले बिस्मिल्लाहरहमान का नाम लेकर अपनी साधना को चालू करें |

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह साधना टोटल 41 दिनों की होती है और आपको इस साधना को रोजाना 1 घंटे 45 मिनट तक करना है और आपको एक ही आसन पर बैठकर इस साधना को पूरा करना है |

और इस साधना को नियम के अनुसार ही पूरा करना है, क्योंकि किसी भी साधना को पूरा करने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी होता है और जो साधक नियमों का पालन नहीं करता है उसकी साधना या तो बीच में ही खंडित हो जाती है या फिर उसे मनचाहा रिजल्ट प्राप्त नहीं होता है, इसीलिए साधना करते समय साधना के नियमों का पालन अवश्य करें |

नील परी साधना से जुडी कुछ जरुरी बाते क्या है ? Some important things related to Neel Pari Sadhana

हमने आपको पहले ही बताया है कि यह साधना टोटल 41 दिनों की है और यह साधना एक इस्लामिक साधना है और इस्लामिक साधना में नियमों का पालन करना बहुत ही जरूरी होता है| क्योंकि जो साधक नियमों का पालन करके साधना करता है उसकी साधना जरुर सफल होती है, इसलिए नील परी की साधना करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना है जो इस प्रकार है|

नील परी की साधना करते समय जितना हो सके उतना एकांत में ही रहे, इसके साथ ही अपने खानपान में लहसुन प्याज का सेवन ना करें और शराब का सेवन भी ना करें क्योंकि शराब को इस्लाम में हराम माना गया है |

इसके अलावा जो स्त्री रजस्वला है उससे दूर रहें और उसके हाथ का बना हुआ खाना भी ना खाए, हो सके तो साधना काल के दरमियान अपने हाथों से बनाया हुआ खाना ही खाएं साधना की शुरुआत से पहले ही परी के स्वरूप का आवाहन किस रूप में करना है ये तय कर ले, साधना के दौरान तेल का दीपक पास में जलाना है|

अगर आप ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखकर परी साधना करते हैं तो आपको इसमें सफलता अवश्य मिलेगी, अगर आप साधना से पहले ऊपर बताए गए नियमों का पालन नहीं करते हैं तो साधना के दरमियान आपके मन में अश्लील विचार आने चालू हो जाते हैं जिसके कारण आपको साधना करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है |

नील परी साधना करना खास क्यों है? Why is it important to do the Neel Pari Sadhana

अगर आप गौर से सोचेंगे तो यह बातें अवश्य आपके सामने आएंगे कि अधिकतर साधक अप्सरा, परी और यक्षिणी की साधना को करते हैं इसके पीछे उनका उद्देश्य भोग और वासना की प्रवृत्ति होती है |

उन्हें लगता है कि अगर वह इन साधना को कर लेते हैं तो उनकी मौज मस्ती में कोई भी कमी नहीं आएगी जिसके कारण वह यह तय करना भूल जाते है कि वह इस साधना को किस रूप में कर रहे हैं |

एक सामान्य इंसान को इन पारलौकिक शक्तियों के साथ संबंध रखने का मन में सोचना भी नहीं चाहिए, इसके साथ ही कर्ण पिशाचिनी साधना में भी साधक को पहले से ही स्वरूप की कल्पना करनी चाहिए |

कर्ण पिशाचिनी को साधक को मां के रूप में सिद्ध करना चाहिए वरना कर्ण पिशाचिनी को सिद्ध करने के बाद में कर्ण पिशाचिनी साधक के लिए बहुत घातक भी साबित हो जाती है |

नील परी साधना का अमल अंतिम विचार क्या है ? Implementation of Neel Pari Sadhana final thoughts

अगर आप नील परी की साधना करना चाहते हैं तो साधना करने से पहले आपको इसके बारे में सभी जानकारी अवश्य इकट्ठा कर लेनी चाहिए ताकि आपको इसकी साधना करने में आसानी हो |

नील परी को मायावी साधना भी कहा जाता है क्योंकि यह सिद्ध होने से पहले अपने साधक की परीक्षा भी लेती है, इसीलिए ऐसी अवस्था में आप तभी तक टिके रह सकते हैं जब तक कि आपके मन में कोई विकार उत्पन्न ना रहो |

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