Durga mantra : शक्तिशाली दुर्गा मंत्र ,जाप विधि और दुर्गा कवच | माँ दुर्गा मंत्र : Durga mantra

दुर्गा मंत्र | durga mantra : हेलो दोस्तो नमस्कार स्वागत है आपका हमारे आज के इस लेख में आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से दुर्गा मंत्र |durga mantra के बारे में बताने वाले हैं.वैसे हमारे हिंदू धर्म के अनुसार सप्ताह के हर दिन किसी ना किसी देवता को समर्पित किए गए हैं उसी प्रकार मां दुर्गा का भी एक दिन रखा गया है.

जिस दिन उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए वैसे तो मां दुर्गा की पूजा हर दिन करनी चाहिए लेकिन अगर आप मासिक दुर्गा अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन उनकी पूजा करती हैं तो वह जल्द ही आपसे प्रसन्न हो जाती हैं.

उस दिन अगर आप मां दुर्गा की खुशी के लिए उनका व्रत रखती हैं और सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा करती हैं तो मां दुर्गा आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देती हैं। क्योंकि हमारे हिंदू धर्म के अनुसार सभी देवी देवताओं की पूजा का विशेष स्थान है उसी प्रकार मां दुर्गा हिंदू की देवी मानी जाती हैं.

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मां दुर्गा को शक्ति देवी के रूप में जाना जाता है इसीलिए हिंदू धर्म के अनुसार अगर पूजा के दौरान मां दुर्गा की पूजा ना की जाए और उनके मंत्रों का जाप ना किया जाए तो परिवार में सुख समृद्धि का संचालन नहीं हो पाता है अगर आप मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हैं और उनकी विधि विधान पूर्वक पूजा करते हैं.

तो आपके परिवार में सुख समृद्धि का संचालन होता है क्योंकि मां दुर्गा के मंत्रों के उच्चारण से चारों दिशाओं में सफलता प्राप्त हो जाती है तो आइए आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से दुर्गा मंत्र | durga mantra के बारे में बताएंगे.

यह भी बताएंगे कि मां दुर्गा के किन मंत्रों का जाप करके आप अपने जीवन के भय और बाधाओं को दूर कर सकते हैं हमारे द्वारा बताए गए मां दुर्गा के मंत्रों का स्मरण करके आप समस्त सुखों को प्राप्त कर सकते हैं अगर आप मां दुर्गा के इन मंत्रों का ठीक तरह से जाप करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें ताकि आप लोगों को दुर्गा मंत्र | durga mantra के मंत्रों की संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।


दुर्गा मंत्र | durga mantra

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दुर्गा मंत्र का जाप कैसे करें | Durga mantra ka jaap kaise karen

Durga

  1. अगर आप लोग मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने शरीर को स्वच्छ रखना होगा यह एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
  2. उसके बाद व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से संपन्न होने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लेने हैं और जाप की शुरुआत करनी है।
  3. जहां पर सभी देवी देवताओं की पूजा और अनुष्ठान किया जाता है वहां पर मां दुर्गा की तस्वीर को स्वच्छ स्थान या आसन पर स्थापित करना है।
  4. उसके बाद आपको मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करने के साथ रोली वह भी लाल रंग की यह लाल चंदन पाउडर फूल बेलपत्र और सिंदूर का उपयोग करके पूजा करनी है।
  5. उसके बाद मां दुर्गा की सबसे प्रिय वस्तुएं मां दुर्गा को अर्पित करनी है। फूल लाल गुड़हल, गुलदाउदी (सेवंती), कमल, चमेली, गेंदा, चंपा और मोगरा हैं। पश्चिम बंगाल में, शिउली या पारिजात फूल का प्रयोग करना है क्योंकि यह लोकप्रिय होता है और इस फूल को शरदोत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

मां दुर्गा के प्रिय मंत्र | Maa durga ke priya mantr

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

1. दुर्गा आवाहन मंत्र

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

 

2. दुर्गा का शक्तिशाली मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

3. मां दुर्गा का भय दूर करने का मंत्र

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।
भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥

4. मां दुर्गा का पापों का नाश करने का मंत्र

हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

5. मुसीबतों से मुक्ति पाने के लिए दुर्गा मंत्र

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

6. बीमारियों से छुटकारा पाने का दुर्गा महामंत्र

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

7. पुत्र प्राप्ति दुर्गा मंत्र

देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

8. महामारी नाश के लिए दुर्गा मंत्र

जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥

9. शक्ति और बल प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र

सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥

10. धन प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र

“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

11. मनचाहे जीवसाथी पाने के लिए दुर्गा मंत्र

( पुरुषों के लिए )

ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि ।
नन्दगोपसुते देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥

12. मनचाहा वर प्राप्त करने का दुर्गा मंत्र

पत्नीं मनोरामां देहि मनोववृत्तानुसारिणीम् ।
तारिणीं दुर्गसंसार-सागरस्य कुलोभ्दवाम् ।।

13. पति प्राप्ति का गौरी मंत्र

” हे गौरी शंकरधंगी ! यथा तवं शंकरप्रिया,
तथा मां कुरु कल्याणी ! कान्तकान्तम् सुदुर्लभं “

14. मां दुर्गा का रक्षा प्राप्ति मंत्र

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

15. मां दुर्गा का सौभाग्य और अयोग्य प्राप्ति मंत्र

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

16. मां दुर्गा की वंदना करने का मंत्र

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे |
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||

17. मां दुर्गा की वंदना सामूहिक कल्याण के लिए

देव्या यया ततमिदं जग्दात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या |
तामम्बिकामखिलदेव महर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ||

18. नौ देवियों के स्वयं सिद्ध बीज मंत्र

उसके बाद आपको मां दुर्गा के नौ शक्तियों रूपों के बीज मंत्र का पाठ करना है इन मंत्रों के पाठ से 9 की नवोदय में स्वयं ही प्रसन्न हो जाती हैं और अपनी कृपा अपने भक्तों के ऊपर बरसाने लगती हैं।

नौ देवियों के नाम  नौ देवियों के मंत्र 
शैलपुत्री ह्रीं शिवायै नम: ।
ब्रह्मचारिणी ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: ।
चन्द्रघंटा ऐं श्रीं शक्तयै नम: ।
कूष्मांडा ऐं ह्री देव्यै नम: ।
स्कंदमाता ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: ।
कात्यायनी क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम: ।
कालरात्रि क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम: ।
महागौरी श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: ।
सिद्धिदात्री ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: ।

माँ दुर्गा पूजा विधि | Maa Durga Pujan Vidhi

अगर आप लोग मां दुर्गा की पूजा ना चाहते हैं तो आपको मां दुर्गा पूजा विधि जानना आवश्यक है जो हमने आपको नीचे दी है वैसे तो विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान मनाई जाती है अगर आप हमारे द्वारा दी गई मां दुर्गा पूजा विधि से पूजा करते हैं तो आपकी पूजा अवश्य सफल होती है.

Durga

क्योंकि इस पूजा विधि में सभी 16 चरण शामिल हैं जो षोडशोपचार षोडशोपचार दुर्गा पूजा विधि का हिस्सा हैं। इन मंत्रों का जाप करके और इस विधि को अपना के आप पर मां दुर्गा पूजा कर सकते हैं।

1. आवाहन

अगर आप लोगों को मां दुर्गा पूजा की शुरुआत करनी है तो आपको देवी दुर्गा का ध्यान और आवाहन करना है उसके बाद मां दुर्गा की तस्वीर के सामने बैठकर आपको निम्न मंत्रों का जाप करना है. सबसे पहले आपको आवाहन मुद्रा में बैठ जाना है अपने दोनों हथेलियों को जोड़कर और दोनों अंगूठे को अंदर की ओर मोड़कर आवाहन करना है। और आवाहन करते समय नीचे दिए गए मंत्र का जाप करना है।

सर्वमंगला मंगलये शिव सर्वार्थ साधिक।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तु ते॥
ब्रह्मरूपे सदानंद परमानंद स्वरूपिणी।
द्रुत सिद्धिप्रदे देवी नारायणी नमोस्तु ते॥
शरणगतदीनर्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यर्त्तिहारे देवी नारायणी नमोस्तु ते॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
आवाहनं समरपयामी॥

2. आसन

जैसे ही आप मां दुर्गा का वाहन कर लेते हैं उसके बाद में आपको दोनों हथेलियों को जोड़कर मां दुर्गा की अंजलि में पांच पुष्प लेने हैं और उन्हें मां दुर्गा की मूर्ति के सामने छोड़ देना है उसके बाद नीचे दिए गए इस मंत्र का जाप करना है और मां दुर्गा आसन पर अर्पित कर देना है।

अनेका रत्नासंयुक्तम् नानमणिगननवितम्।
कार्तस्वरमयम दिव्यासनम् प्रतिगृह्यताम्।
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
आसनम समरपयामी॥

3. पाद्य प्रक्षालन

आसन पर अर्पित करने के बाद नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए पैरों को धोने के लिए उनका जल अर्पित करना है।

गंगादि सर्वतीर्थेभ्यो माया प्रस्थानायृतम्।
तोयमेतत्सुखस्पर्श पद्यार्थम प्रतिगृह्यतम॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
पद्यम समरपयामी॥

4. अर्घ्य दान

पध देने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए देवी दुर्गा को सुगंधित जल अर्पित करना है।

गन्धपुष्पक्षतार्युक्तमर्ग्यम् सम्पादितम् माया।
गृहण त्वं महादेवी प्रसन्ना भव सर्वदा
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अर्घ्यम समरपयामी॥

5. आचमन दान

अर्घ्य देने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए आज मन के लिए मां दुर्गा को जल अर्पित करना है।

अचम्यतम त्वय देवी भक्ति में हाइचलम कुरु।
इप्सितं में वरम देही परात्रा चा परम गति॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अचमनियम जालम समरपयामी॥

6. स्नान

आचमन कराने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को स्नान कराना है।

पयोदाधि घृतं क्षीराम सीताय चा समन्वितं।
पंचामृतमनेनाद्य कुरु स्नानम दयानिधे
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
सन्नियम जालम समरपयामी

7. वस्त्र

मां दुर्गा को अदनान कराने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को नए वस्त्र पहनाने हैं और उसके बाद मोली मोली का भोग लगाना है।

वस्त्रम् चा सोमा दैवत्यम लज्जयस्तु निवारणम।
माया निवेदितं भक्ति गृहण परमेश्वरी
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
वस्त्रम समरपयामी॥

8. जेवर भेंट

मां दुर्गा को वस्त्र पहनाने के बाद आपको निम्न मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को आभूषण चढ़ाने हैं।

हारा कनकना केयूरा मेखला कुंडलादिभिह।
रत्नाध्याम कुंडलोपेटम भूषणम प्रतिगृह्यतम॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अभूषणं समरपयामी॥

9. चन्दन दान

जैसे ही आप मां दुर्गा को आभूषण अर्पित कर देते हैं उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को चंदन लगाना है।

चंदन समर्पण मंत्र हिंदी में
परमानंद सौभाग्यम परिपूर्णम दिगंतरे।
गृहण परमम गंधम कृपाय परमेश्वरी
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
चंदनम समरपयामी॥

10. रोली दान

अब आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को सौभाग्य के प्रतीक का सिंदूर लगाना है।

कुमकुम कांतिदं दिव्यं कामिनी काम संभवं।
कुमकुमेनारचिटे देवी प्रसाद परमेश्वरी
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कुमकुम समरपयामी॥

11. कज्जलार्पण

सिंदूर लगाने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को काजल लगाना है या अर्पित कर देना है।

कज्जलम कज्जलम रामयम सुभगे शांतिकारीके।
करपुरा ज्योतिरुत्पन्नम गृहण परमेश्वरी
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कज्जलम समरपयामी॥

12. मृग द्रव्यप्राण

1. सौभाग्य

काजल चढ़ाने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को सौभाग्य सूत्र चढ़ाना है।

सौभाग्यसूत्रम वरदे सुवर्णा मणि संयुक्त।
कंठे बदनामी देवेशी सौभाग्यम् देही में सदा॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
सौभाग्यसूत्रम समरपयामी॥

2. सुगन्धित द्रव्य

उसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को सुगंध अर्पित करना है।

चंदनागरु करपुरैः संयुक्तम कुंकुमं तथा।
कस्तूरीदि सुगंधाश्चा सर्वंगेशु विलेपनम्॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
सुगंधिताद्रव्यं समरपयामी॥

3. हरिद दान

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को हल्दी अर्पित करनी है।

हरिद्रा समर्पण मंत्र हिंदी में
हरिद्ररंजित देवी सुखा सौभाग्यदायिनी।
तस्मत्तवं पुजायमयात्रा सुखाशांतिम प्रयाच मे॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
हरिद्राचूर्णम समरपयामी॥

4. अक्षत दान

हल्दी अर्पित करने के बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को अखंड अक्षत अर्पित करने हैं।

रंजीता कंकुमौद्येन न अक्षतशचतिशोभनः।
ममाइशा देवी दनेना प्रसन्ना भव शोभने॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अक्षतन समरपयामी॥

13. पुष्पांजलि

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को पुष्प अर्पित करने हैं।

मंदरा पारिजातदि पाटली केतकनी चा।
जाति चंपक पुष्पाणी गृहणमणि शोभने॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
पुष्पांजलि समरपयामी॥

14. बिल्वपत्र

अब आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को बेलपत्र अर्पित करने हैं।

अमृतोद्भव श्रीवृक्षो महादेवी ! प्रिया सदा।
बिल्वपत्रम प्रयाचमी पवित्रम् ते सुरेश्वरी॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
बिल्वपत्रानी समरपयामी॥

15. धूप दान

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा के सामने रूप जलानी है।

दशंग गुग्गुल धूपम चंदनागरु संयुक्तम।
समरपिताम् माया भक्त महादेवी! प्रतिगृह्यतम:
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
धूपमघ्रपयामी॥

16. दीप दान

अब आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा के सामने दीपक जलाना है।

घृतवर्त्तिसमायुक्तम महतेजो महोज्जवलम।
दीपम दशयामी देवेशी! सुप्रीता भव सर्वदा
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
दीपम दर्शयामी॥

17. नावेद्य

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा के सामने नैवेद्य अर्पित कर देना है।

अन्नम चतुर्विद्म् स्वदु रसैः शद्भिः समन्वयम्।
नैवेद्य गृह्यतम देवी! भक्ति में हयाचल कुरु
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
नैवेद्यम निवेदयामी॥

18. ऋतू फल

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा के सामने ऋतु फल अर्पित कर देना है।

द्राक्षखरजुरा कदलीफला समरकपित्तकम।
नारीकेलेक्षुजंबादी फलानी प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
ऋतुफलानी समरपयामी॥

19. आचमन

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को जल अर्पित कर देना है।

कमरीवल्लभे देवी करवाचामनमंबाइक।
निरंतरमहं वंदे चरणौ तवा चंडीके
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अचमनियम जालम समरपयामी॥

20. नारिक दान

अब आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को उनकी मनपसंद चीज नारीकेला नारियल का भोग लगा देना है।

नरिकेलम चा नारंगिम कलिंगमंजीराम तवा।
उर्वरुका चा देवेशी फलनयतनी गह्यतम॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
नारीकेलम समरपयामी॥

21. ताम्बुल

उसके बाद आपको मां दुर्गा के इस मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा के सामने सुपारी और तंबुला पान का भोग लगा देना है।

एलावंगम कस्तूरी करपुरैह पुष्पवसीतम।
विटिकम् मुखवसार्थ समरपयामी सुरेश्वरी॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
तंबुलम समरपयामी॥

22. दक्षिणा

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा को दक्षिणा भेंट कर देनी हैं।

पूजा फला समृद्धिअर्थ तवाग्रे स्वर्णमेश्वरी।
स्थपितं तेना में प्रीता पूर्णन कुरु मनोरमम॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
दक्षिणम समरपयामी॥

23. पूजा और कन्या पूजन

1. पूजा

मां दुर्गा के सामने दक्षिणा अर्पित करने के बाद अब आपको ट्रकों की पूजा करनी है जिसका प्रयोग आप मां दुर्गा पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करते हुए कर रहे हैं।

नमो देवयै महादेवयै शिवायै सत्तम नमः।
नमः प्रकृतिै भद्रायै नियतः प्रणतः स्मातम:
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
पुस्तक पुजायामी॥

2. दीप पूजा

उस पुस्तक के सामने दीपक जलाने के बाद उसकी पूजा करने के बाद आपको निम्न मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा के सामने दीप देव की पूजा करनी है।

शुभम भवतु कल्याणमारोग्यम पुष्टिवर्धनम्।
आत्मतत्त्व प्रबोधय दीपज्योतिर्नामोस्तु ते॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
दीपम पुजायामी॥

3. कन्यापूज्य

इसके बाद दुर्गा पूजा करने के दौरान आपको कन्या पूजा भी करनी है दुर्गा पूजा करने के बाद आपको किसी कन्या को भोजन के लिए आमंत्रित करना है और उसे दक्षिणा भेंट देनी है कन्या को दक्षिणा अर्पित करते समय आपको निम्न मंत्र का जाप करना है।

सर्वस्वरूपे! सर्वेशे सर्वशक्ति स्वरुपिणी।
पूजम गृहण कुमारी! जगनमातरनामोस्तु ते
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कन्या पुजायामी॥

24. निरजनी

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उसके बाद आपको निम्न मंत्र का जाप करते हुए मां दुर्गा की आरती करनी है।

निरजनं सुमंगलम करपुरेण समन्वितम्।
चन्द्रकवाहनी सद्रिशं महादेवी ! नमोस्तु ते॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कर्पूरा निरजनम समरपयामी॥

25. प्रदक्षिणा

अब आप कौन नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा को फूल से मां दुर्गा की दाएं और बाएं और परिक्रमा करनी है।

प्रदक्षिणं त्रयं देवी प्रायत्नेन प्राकल्पितम्।
पश्याद्य पवने देवी अंबिकायै नमोस्तु ते॥
ॐ भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
प्रदक्षिणं समरपयामी॥

26. क्षमादान

उसके बाद आपको नीचे दिए गए मनप्रकाश जाप करते समय पूजा के दौरान आपको किसी भी ज्ञात अज्ञात गलती के लिए मां दुर्गा से क्षमा भी मांगी है।

अपराधा शतम देवी मातक्रितम चा दिन भोजन।
क्षम्यतम पवने देवी-देवेश नमोस्तु ते॥

देवी माता दुर्गा की पूजन सामग्री | Devi mata durga ki puja samagri

recitation of durga saptashati

अगर आप लोग मां दुर्गा की पूजा करना चाहते हैं तो आपको यह सामग्री अवश्य रख लेनी चाहिए क्योंकि मां दुर्गा की पूजा में यह सामग्री विशेष आवश्यक होती है। गाय का घी, रूई, कलावा, रोली, सिंदूर, 5 सुपारी, लौंग, पंचमेवा, 5 पान के पत्ते, अक्षत्, चौकी, जौ, तिल, सोलह श्रृंगार का सामान, कलश, लाल वस्त्र, फूल, आम का पल्लव, पंचमिठाई, पानी वाला नारियल, समिधा, कमल गट्टे, पंचामृत की थाली, कुशा, लाल चंदन, लाल फूल माला आदि प्रकार की चीजें आपको पूजा के दौरान अपने सामने रख लेना है उसके बाद आपको मां दुर्गा के प्रिय मंत्रों का जाप करते हुए यह सारी सामग्री अर्पित कर देनी है।

माँ दुर्गा मंत्र के जाप के साम्रगी लाभ | Maa durga mantra ke jaap ke samagr labh

  1. वैसे तो मां दुर्गा को नारी शक्ति की परिभाषा के रूप में माना जाता है अगर आप लोग भक्ति और सहित जानकारी मंत्रों का जाप करने से मां दुर्गा का सौभाग्य और सुरक्षा भी प्रदान करती हैं।
  2. अगर आप लोग मां दुर्गा के निम्न मंत्रों के जाप से आपका मन खुल जाता है और व्यक्ति को ब्राह्मण के अपार ज्ञान से भरपूर कर देता है।
  3. कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करता है उस व्यक्ति को बुरे सपने और नकारात्मक विचारों और नींद की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है और उसकी आत्मा भी स्वच्छ हो जाती है और उस व्यक्ति को शांति भी प्रदान होती है।
  4. अगर कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है और उसके महत्वाकांक्षी लक्ष्य से उसका ध्यान हट रहा है तो उस व्यक्ति को मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप करना चाहिए।
  5. वैसे तो मां दुर्गा को शक्तिशाली और सुरक्षा की देवी कहा जाता है इसीलिए अगर कोई व्यक्ति मां दुर्गा के मंत्र के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करता है तो मां दुर्गा को सुरक्षा प्रदान करती हैं और बुरी नजर से भी बचाती हैं।
  6. अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करता है तो वह चारों तरफ की सकारात्मक बल को प्राप्त करता है और वह दुर्भाग्य से भी बच जाता है।
  7. अगर कोई भी माता-पिता संतान के साथ समस्याओं का सामना कर रहे हैं और उनके बच्चे को शांति पाने में समस्या हो रही है तो माता-पिता स्वयं इन मंत्रों का जाप करें और अपने बच्चे को प्रोत्साहित करें मंत्रों के जाप से आपके आसपास के नकारात्मक विचार और ऊर्जा या किसी भी तरह का भय दूर हो जाता है साथ ही आपके आसपास की बुरी आत्मा या भूत प्रेत से भी आपको छुटकारा मिल जाता है।

दुर्गा कवच | Durga kavach

॥अथ श्री देव्याः कवचम्॥

ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,
चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम्,
श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।

ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥

मार्कण्डेय उवाच

ॐ यद्‌गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥१॥

ब्रह्मोवाच

अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥२॥

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥३॥

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥४॥

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥५॥

अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥६॥

न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥७॥

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यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।
ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥८॥

प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।
ऐन्द्री गजसमारुढा वैष्णवी गरुडासना॥९॥

माहेश्‍वरी वृषारुढा कौमारी शिखिवाहना।
लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥१०॥

श्‍वेतरुपधरा देवी ईश्‍वरी वृषवाहना।
ब्राह्मी हंससमारुढा सर्वाभरणभूषिता॥११॥

इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।
नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः॥१२॥

दृश्यन्ते रथमारुढा देव्यः क्रोधसमाकुलाः।
शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥१३॥

खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च।
कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥१४॥

दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च।
धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै॥१५॥

नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।
महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥१६॥

त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि।
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता॥१७॥

दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी।
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥१८॥

उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥१९॥

एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।
जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः॥२०॥

अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥२१॥

मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी।
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥२२॥

शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी॥२३॥

नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥२४॥

दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।
घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके ॥२५॥

कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमङ्गला।
ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥२६॥

नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।
स्कन्धयोः खङ्‍गिनी रक्षेद् बाहू मे वज्रधारिणी॥२७॥

हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चाङ्गुलीषु च।
नखाञ्छूलेश्‍वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्‍वरी॥२८॥

स्तनौ रक्षेन्महादेवी मनः शोकविनाशिनी।
हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥२९॥

नाभौ च कामिनी रक्षेद् गुह्यं गुह्येश्‍वरी तथा।
पूतना कामिका मेढ्रं गुदे महिषवाहिनी ॥३०॥

कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी।
जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी ॥३१॥

गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।
पादाङ्गुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥३२॥

नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्‍चैवोर्ध्वकेशिनी।
रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्‍वरी तथा॥३३॥

रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती।
अन्त्राणि कालरात्रिश्‍च पित्तं च मुकुटेश्‍वरी॥३४॥

पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा।
ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसंधिषु॥३५॥

शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्‍वरी तथा।
अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥३६॥

प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्।
वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥३७॥

रसे रुपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।
सत्त्वं रजस्तमश्‍चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥३८॥

आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।
यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥३९॥

गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके।
पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥४०॥

पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥४१॥

रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥४२॥

पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः।
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥४३॥

तत्र तत्रार्थलाभश्‍च विजयः सार्वकामिकः।
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्‍चितम्।
परमैश्‍वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्॥४४॥

निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः।
त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्॥४५॥

इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम् ।
यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥४६॥

दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः।
जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः। ४७॥

नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः।
स्थावरं जङ्गमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्॥४८॥

अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले।
भूचराः खेचराश्‍चैव जलजाश्‍चोपदेशिकाः॥४९॥

सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा।
अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्‍च महाबलाः॥५०॥

ग्रहभूतपिशाचाश्‍च यक्षगन्धर्वराक्षसाः।
ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः ॥५१॥

नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते।
मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्॥५२॥

यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले।
जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥५३॥

यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्।
तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥५४॥

देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्।
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥५५॥

लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥५६॥

इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्।

माँ दुर्गा आरती | Durga maa Aarti 

Durga

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।

जय अम्बे गौरी,…।

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको।।

जय अम्बे गौरी,…।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै।।

जय अम्बे गौरी,…।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी।।

जय अम्बे गौरी,…।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति।।

जय अम्बे गौरी,…।

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती।।

जय अम्बे गौरी,…।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे। मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।

जय अम्बे गौरी,…।

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।

जय अम्बे गौरी,…।

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।

जय अम्बे गौरी,…।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।

जय अम्बे गौरी,…।

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।

जय अम्बे गौरी,…।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।

जय अम्बे गौरी,…।

अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै।।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

FAQ : दुर्गा मंत्र | durga mantra

मां दुर्गा की पूजा कब करनी चाहिए?

अगर आप लोग यह जानना चाहते हैं कि मां दुर्गा की पूजा कब करनी चाहिए तो मां दुर्गा की पूजा करने का सबसे अच्छा दिन नवरात्रि के दिनों में होता है अगर आप किसी कारणवश उन 9 दिनों तक व्रत नहीं रख पाते हैं तो आपको पहले चौथे और आठवें दिन का व्रत अवश्य रखना चाहिए अपने घर पर नवरात्रि के 9 दिनों तक मां दुर्गा के सामने एक अखंड दीपक जलाना चाहिए नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने और माता लक्ष्मी और सरस्वती देवी के दीपक जला कर उनकी पूजा करनी चाहिए।  

मां दुर्गा का मूल मंत्र क्या है?

मां कूष्मांडा बीज मंत्र: ऐं ह्री देव्यै नम:।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां दुर्गा का शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

'शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे, सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते'. अगर आप इस मंत्र का जाप करना चाहते हैं तो आपको चाय तो नवरात्रि की अवधि में दुर्गा सप्तशती के इस मंत्र का जाप करने से आपके जीवन की हर समस्या का समाधान मिल जाता है। 'देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्, रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि'.

निष्कर्ष

जैसा कि आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से दुर्गा मंत्र | durga mantra के बारे में बताया और उसके साथ इन मंत्रों का जाप कैसे करना है मां दुर्गा के अन्य मंत्र क्या है दुर्गा पूजा विधि क्या है मां दुर्गा मंत्र के जाप के लाभ क्या है इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

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