संपूर्ण श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक मंत्र हिंदी अर्थ सहित जाप विधि | Shrimad Bhagwat Mahapuran Sanskrit Shlok

श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक | Shrimad Bhagwat Mahapuran Sanskrit Shlok : हेलो दोस्तों नमस्कार स्वागत है आपका हमारे आज के इस नए लेख में आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक के बारे में बताने वाले हैं वैसे क्या आप लोग जानते हैं कि यह श्रीमद् भागवत ग्रंथ कैसे लिखा गया था जब नारद जीने वेदव्यास जी को इसकी प्रेरणा दी थी तो श्रीमद् भागवत ग्रंथ लिखा गया था.



श्रीमद्भागवत में 335 अध्याय लिखे गए हैं यह श्रीमद् भागवत महापुराण व्यास जी द्वारा अठारह पुराणों में से रचित बहुत ही श्रेष्ठ पुराण कहा गया है इस श्रीमद् भागवत महापुराण में 18000 हजार श्लोक और 335 अध्याय 12 व 12 स्कंध हैं। इस लेख में श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक के बारे में जानकारी देने वाले हैं.

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क्योंकि इस श्रीमद्भागवत पुराण में कुछ ऐसे प्रसिद्ध श्लोक लिखे गए हैं जो बहुत ही चर्चित है क्योंकि हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार श्रीमद्भागवत का पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश भी हो जाता है.लेकिन आजकल के इस समय में संपूर्ण भागवत पढ़ने का किसी भी व्यक्ति के पास समय नहीं निकल पाता है लेकिन अगर आपके पास श्रीमद्भागवत महापुराण पढ़ने का समय नहीं है तो आप इस श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत के श्लोक भी पढ़कर उनका पाठ कर सकते हैं.

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श्रीमद्भागवत महापुराण क्या है ? | Shrimad Bhagwat Mahapuran kya hai ?

आज हम आपको श्रीमद्भागवत महापुराण क्या है इसके बारे में जानकारी देंगे वैसे क्या आप लोग जानते हैं कि जो हिंदू धर्म में भागवत पुराण पढ़ी जाती है उसे क्या कहते हैं श्रीमद्भागवत महापुराण हिंदू के 18 पुराणों में से एक है श्रीमदभगवतम को आप केवल भागवत भी कह सकते हैं.

भागवत कथा


 

इसका मुख्य उद्देश्य भक्ति का योग है इसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या फिर स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है और श्रीमद् भागवत महापुराण में वृषभ भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है.

श्रीमद्भागवत महापुराण को किसने लिखा ? | Shrimad Bhagwat Mahapuran ko kisne likha ?

दोस्तों क्या आप लोग जानते हैं कि श्रीमद्भागवत महापुराण को किसने लिखा था तो आज हम आप लोगों को श्रीमद् भागवत महापुराण के बारे में बताएंगे और यह भी बताएंगे कि यह पुराण किसने लिखा था अन्य सभी पुराणों के समान श्रीमद् भागवत को ऋषि वेदव्यास जी ने लिखा था.

ऋषि शुक्र देव जी यानी कि जो वेदव्यास जी के बेटे थे इस श्रीमद्भागवत को सबसे पहले राजा परीक्षित को सुनाया था राजा परीक्षित की वह थे जिन्हें 7 दिनों में तक्षक सांप द्वारा रात मिलने से 7 दिनों के अंदर मरने का श्राप मिला था

श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक | Shrimad Bhagwat Mahapuran Sanskrit Shlok

आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्।
माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्।।
कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्।
एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्।।
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।

श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक मंत्र जाप की विधि | Shrimad Bhagwat Mahapuran Sanskrit shlok Mantra Jaap ki vidhi

भागवत कथा

अगर आप लोग श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक मंत्र की करना चाहते हैं तो आप लोगों को विधि के बारे में बताएंगे.

  1. श्रीमद् भागवत श्लोक मंत्र का जाप करने के लिए सबसे पहले आपको स्नान आदि चीजों से निश्चिंत हो जाना है और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लेने हैं.
  2. श्रीमद् भागवत श्लोक मंत्र का जाप करने के लिए आपको कुश आसन पर बैठना है
  3. उसके बाद भगवान श्री कृष्ण की पूजा करनी है.
  4. भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने बैठकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जाप करना है
  5. श्रीमद्भागवत महापुराण श्लोक मंत्र का जाप करने के लिए आपको प्रतिदिन पांच माला जाप कर लेने से आपकी हर प्रकार की समस्या का समाधान मिल जाता है.
  6. इसके लिए आपको प्रतिदिन एक ही समय पर एक ही आसन पर बैठकर और उसी माला के साथ मंत्र का जाप करना है अगर आप नियम पूर्वक ऐसा करते हैं तो आप का मंत्र जल्द ही सिद्ध हो जाता है.

श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक | Shrimad Bhagwat Mahapuran Sanskrit Shlok

जन्माद्यस्य यतोन्वयादितरतश्चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट्
    तेने ब्रह्मह्रदाय आदि कवये मुह्यन्ति यत्सूरयः |
तेजो वारिमृदां यथा विनिमयो यत्रत्रिसर्गो मृषा 
 धाम्ना स्वेन सदानिरस्तकुहकं सत्यंपरं धीमहि ||
अर्थ – जिनके माध्यम से जगत की उत्पत्ति पालन और संघार होता है जिनके शब्द पदार्थों में अनुगत होता है असद पदार्थों से पृथक हैं जो एक स्वयं प्रकाश है सर्वज्ञ है जिनके सृष्टि के आधे आधे ब्रह्मा जी को संकट मात्र से ही ब्रह्मा जी वेद का ज्ञान प्राप्त किया जिन के विषय में बड़े-बड़े विद्वान भी जानते हैं और वह मोहित हो जाते हैं.

निगमकल्पतरोर्गलितं फलं
शुकमुखादमृतद्रव सयुंतम् |
पिबत भागवतं रसमालयं
मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः ||

अर्थ – यह एक वेद रूपी वृक्ष का पूर्ण फल है यह एक शुक्र देव रूपी तोते के मुंह से स्पर्श कराया हुआ अमृत है इस अमृत में थोड़ा ही छिलका गुठली आदि चीजें नहीं है इसीलिए हे रसिको जब तक जीवन है तब तक बार-बार आप इस श्रीमद्भागवत महापुराण को अवश्य पढ़ें

स्वर्गे सत्ये च कैलाशे वैकुणठे नास्तयं रसः |
अतः पिबन्तु सद्भाग्या या या मुञ्चत कर्हिचित् ||

अर्थ – इस श्रीमद् भागवत रस स्वर्ग लोक सत्यलोक कौशल्या और बैकुंठ में भी नहीं है इसमें सिर्फ पृथ्वी में ही सुलभ है इसीलिए आप इस श्रीमद्भागवत का पान अवश्य करें.

नैमिष निमिषक्षेत्रे ऋषयः शौनकादयः |
सत्रं स्वर्गाय लोकाय सहस्त्रसममासत ||

अर्थ – यह एक पवित्र  नैमिषारण्य तीर्थ  है क्योंकि इसमें सनकादिक ऋषि ने 1000 वर्ष में पूरा होने वाले सत्र की दीक्षा ली थी. 

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् |
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जय मुदीरयेत् ||

अर्थ – आज मैं भगवान नारायण माता सरस्वती और ऋषि वेद व्यास जी को शत शत नमस्कार करता हूं इस श्लोक में आया है की जय मुदीरयेत जय का अर्थ यहां पर जय घोष आदि करना नहीं है जय क्या है.

इतिहास पुराणां मे रामश्च चरितं तथा |
जयेति नाम चैतेषां प्रवदन्ति मनीषिणः ||

अर्थ – इतिहास महाभारत पुराण बाल्मीकि रामायण इन को विद्वान लोग जय नाम से पुकारते हैं और मुनियों आपने लोक के मंगल के लिए बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है .

धर्मः स्वनिष्ठितः पुसां विष्वक्सेन कथासु यः |
नोत्पादयेद्यदि रतिं श्रम एव हि केवलम् ||

अर्थ – हर एक मनुष्य भली-भांति स्वधर्म का पालन निभाता है लेकिन उस मनुष्य को धर्म के पालन करने में या फिर भगवान की कथाओं में प्रेम उत्पन्न नहीं हो पाता है वह सिर्फ श्रम ही करता है.

वदन्ति तत्तत्त्वविदस्तत्त्वं यज्ज्ञानमद्वयम् |
ब्रह्मेति परमात्मेति भगवानिति शब्द्यते ||

अर्थ – इस तत्व को ज्ञानी ब्रह्म कहते हैं इसके योगी परमात्मा होते हैं और यह एक भक्त भगवान कहते हैं.

कस्मिन युगे प्रवृत्तेयं स्थाने वा केन हेतुना |
कुतः सन्चोदितः कृष्णः कृतवान संहितां मुनिः ||

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

अर्थ – श्रीमद्भागवत महापुराण का निर्माण वेदव्यास जी ने किया है किस युग में किया गया है और किस स्थान पर किया गया है तथा किस कारण से किया गया है.

द्वापरे समनुपप्राप्ते तृतीये युग पर्यये |
जातः पराशरद्योगी वासव्यां कलयाहरे ||

अर्थ – सौनक जी तीसरे युग द्वापर में महर्षि पाराशर के द्वारा वसुकन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के कला अवतार श्री वेदव्यास जी भगवान का जन्म हुआ .

यथा धर्मादयश्चार्था मुनिवर्यानुकीर्तिताः |
न तथा वासुदेवस्य महिमाह्यनुवर्णितः ||

अर्थ – वेदव्यास जी आपने श्रीमद्भागवत महापुराण में जिस प्रकार धर्म अर्थ काम और मोक्ष को लेकर पुरुषार्थ का पुराणों में वर्णन किया है उसी प्रकार से अपने भगवान तथा भगवान की भक्ति का इसमें वर्णन नहीं किया है.

पाहि पाहि महायोगिन्देवदेव जगत्पते |
नान्यं त्वदभयं पश्ये यत्र मृत्युःपरस्परम्||

अर्थ – हे देवाधिदेव जगदीश्वर रक्षा कीजिए रक्षा कीजिए इस संसार में आपके अतिरिक्त अभय प्रदान करने वाला मुझे कोई और दिखाई नहीं दे रहा |

नमस्ये पुरुषं त्वाद्यमीश्वरं प्रकृतेः परम्|
अलक्ष्यं सर्वभूतानामन्तर्बहिर वस्थितम् ||

अर्थ – हे आत्मा मै आपको प्रणाम करती हूं क्योंकि आज मैं बहुत अच्छी तरह से जान गई हूं कि प्रकृति से परे साक्षात परब्रम्ह परमात्मा है। जोकि सभी मनुष्यों के अंदर बाहर स्थित है.

कच्चित् प्रेष्ठतमेनाथ हृदयेनात्मबन्धुना |
शून्योस्मि रहितो नित्यं मन्यसे तेन्यथानरुक ||

अर्थ – अर्जुन तुम जिसे अपना प्रियतम परम हितैषी समझ रहे थे उन्हीं ने कृष्ण से तुम रहित हो गए हो.

वञ्चितोहं महाराज हरिणा बन्धुरूपिणा |
येन मेपहतं तेजो देवविस्मापनं महत् ||

अर्थ – श्री कृष्ण ने मित्र का रूप धारण करके मुझे ठग लिया है जिन की कृपा से मैं आज राजा द्रुपद के स्वयंवर में मत्स्य भेद करके द्रौपदी को मिला था.

इति लघिंतमर्यादं तक्षकः सप्तमेहनि |
दङक्षति स्म कुलाङ्गारं चोदितो मे ततद्रुहम् ||

अर्थ –  आज के कम से कम 7 साल पहले जब तक्षक नामक नाग ने महाराजा परीक्षित को डस लिया था तो उनकी मृत्यु हो गई थी इस प्रकार श्राप दे ऋषि श्रृंगी आश्रम में लौटाया .

श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक के लाभ | Shrimad Bhagwat Mahapuran Sanskrit shlok ke Labh

krishna

अगर कोई भी व्यक्ति भगवान श्री कृष्ण से संबंधित ग्रंथों और पुराणों का पाठ करता है या फिर श्रीमद्भागवत को सबसे सटीक मानता है तो हमारे धर्म शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा गया है कि श्रीमद् भागवत का पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है.

FAQ : श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक

भागवत का अंतिम श्लोक क्या है?

भागवत का अंतिम श्लोक अभ्युत्थानमधमज़्स्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ यह श्लोक का अर्थ हे भारत जब जब धर्म ग्लानि यानी उसका लोप होता है तब तब श्री कृष्ण ने धर्म के अभ्युत्थान के लिए स्वयं की रचना करता हूं .

श्रीमद् भागवत पुराण में कितने श्लोक हैं?

श्रीमद्भागवत पुराण में 18000 श्लोक तथा 12 स्कंध है.

श्रीमद्भागवत महापुराण में कितने शब्द है?

काफी रिसर्च के मुताबिक या बताया गया है कि श्रीमद् भागवत महापुराण में लगभग 18000 लोग तथा 335 अध्याय तथा 12 स्कंध माने जाते हैं.

निष्कर्ष

दोस्तों जैसा कि आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत श्लोक के बारे में बताया इसके अलावा श्रीमद्भागवत महापुराण से संबंधित जानकारी दी है और श्रीमद् भागवत महा पुराण संस्कृत श्लोक के लाभ भी बताए हैं अगर आपने हमारे इस लेख को अच्छे से पढ़ा है तो आपको श्रीमद्भागवत के बारे में थोड़ी सी जानकारी प्राप्त हो गई होगी

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