वास्तु : शौचालय किस दिशा में होना चाहिए | toilet kis disha mein rakhna chahiye

Ghar me shauchalay kis disha me hona chahiye ? आज के इस आर्टिकल में हम इस मुद्दे पर चर्चा करने वाले हैं कि घर में शौचालय किस दिशा में होना चाहिए. जैसा कि आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण करने में हमें कुछ बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना होता है.

शौचालय कौन सी दिशा में बनाना चाहिए, शौचालय किस दिशा में होनी चाहिए, shauchalay kis disha mein hona chahiye, vastu ke anusar shauchalay

उन्हीं में से एक बात यह भी है कि आपको अपने घर में शौचालय किस दिशा में होना चाहिए, इसके बारे में भी जानकारी रखनी चाहिए. ताकि बाद में आगे चलकर आपको वास्तु शास्त्र या फिर वास्तु दोष से संबंधित समस्याओं का सामना ना करना पड़े.

वास्तु क्या है ? | what Is vastu

वास्तु शास्त्र का अर्थ होता है, घर निर्माण करने की वह कला, जो ईशान कोण से चालू होती है और जिसका पालन करने से घर में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती है, साथ ही घर में होने वाली सभी परेशानियां भी दूर हो जाती है. इसके अलावा अगर आप वास्तु शास्त्र का इस्तेमाल करके घर का निर्माण करते हैं, तो आपके घर में हमेशा खुशहाली और पॉजिटिव एनर्जी रहती है, साथ ही बुरी शक्तियां और नेगेटिव एनर्जी हमेशा आपके घर से दूर ही रहती हैं.

इसके अलावा ऐसा कहा जाता है कि घर निर्माण के लिए योग्य भूमि को वास्तु कहा जाता है, कुल मिलाकर आपको बता दें कि वास्तु एक ऐसा विज्ञान है, जो भूखंड पर भवन निर्माण से लेकर उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों के बारे में आपको मार्गदर्शन प्रदान करता है.

दिशा में खाना बनाना

वास्तु शास्त्र हमारे भारत का एक प्राचीन शास्त्र है. जिसमें घर बनाने से संबंधित जानकारियों के बारे में जानकारी दी जाती है. वास्तु शास्त्र का सिद्धांत प्रकृति में संतुलन बनाए रखता है. जैसा की आप जानते हैं कि प्रकृति में विविध बल मौजूद हैं. जिनमें वायु, अग्नि, पृथ्वी, जल और आकाश शामिल है.

जिसका व्यापक प्रभाव इस धरती पर रहने वाले सभी प्राणियों पर पड़ता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार इस प्रक्रिया का इफेक्ट हमारे काम के प्रदर्शन, हमारे स्वभाव, हमारे भाग्य तथा हमारी जिंदगी के अन्य मुद्दों पर भी काफी गहराई से पड़ता है.

वास्तु शास्त्र की कला को विज्ञान, खगोल विज्ञान और ज्योतिष का मिक्सर कहा जाता है, तो आइए अब आगे जानते हैं कि वास्तु शास्त्र का हमारी जिंदगी में क्या महत्व होता है ?

वास्तु शास्त्र का हमारी जिंदगी में महत्व क्या है ?| Importance of Vastu Shastra in our life

ऐसा माना जाता है कि वास्तु शास्त्र का इस्तेमाल करने से हमारी जिंदगी में हमें नेगेटिव शक्तियों से रक्षा की प्राप्ति होती है, एक प्रकार से वास्तु शास्त्र नेगेटिव एनर्जी को दूर करके वातावरण को सुरक्षित रखता है. वास्तु शास्त्र में यह बताया जाता है कि आपको अपने घर का द्वार किस दिशा में रखना है, साथ ही आपको अपने घर की तरक्की में रुकावट ना आए.bed

इसके लिए कौन से उपाय करने हैं, आपको किस दिशा में मंदिर रखना है, किस दिशा में टॉयलेट या बैडरूम रखना है, किस दिशा में आपको अपना किचन हॉल रखना है इत्यादि बातें तथा अन्य कई बातें भी आपको वास्तु शास्त्र में सिखाई जाती है, तो आइए अब जानते हैं कि घर में शौचालय किस दिशा में होना चाहिए ?

शौचालय किस दिशा में होना चाहिए | toilet kis disha mein rakhna chahiye

जब हमारा भारत देश आजाद हुआ था, तब ऐसा माना जाता था कि शौचालय किसी भी व्यक्ति के घर के बाहर ही होना चाहिए. क्योंकि बड़े बुजुर्ग कहते थे कि मल त्यागने का काम घर के बाहर ही अच्छा लगता है और इसका कारण यह भी था कि घर में मंदिर होता था या फिर पूजा-पाठ का स्थान होता था.

recitation of durga saptashati

परंतु अब शौचालय के लिए घर में ही एक अलग से कमरा बनाया जाता है. ऐसा बदलते हुए समय के कारण हुआ है. वहीं अगर वास्तु शास्त्र के अनुसार देखा जाए, तो अब वास्तु शास्त्र के अनुसार कई लोग अपने घर का निर्माण करवाते हैं और शौचालय बनाते समय वह शौचालय किस दिशा में होना चाहिए का ध्यान रखते हैं.

वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारे घर में शौचालय की दिशा दक्षिण या पश्चिम होनी चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टॉयलेट की दिशा यही होनी चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टॉयलेट का निर्माण करवाने से घर का वास्तु ठीक रहता है.

वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा जानना क्यों आवश्यक है ? | direction of the toilet according to Vastu

अगर आप वास्तुशास्त्र के नियमों का पालन करते हैं, तो इसका कोई नुकसान नहीं है. बल्कि आपको ऐसा करने से फायदा ही होता है. परंतु अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो इसकी वजह से आपको विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

potty latrine

इसलिए आपको अपने घर में वास्तु शास्त्र के अनुसार ही शौचालय का निर्माण करवाना चाहिए. शौचालय की सहायता से आप अपनी जिंदगी में से फालतू की चीजों को बाहर निकालते हैं. इस काम के लिए दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा ही ठीक मानी जाती है. इसलिए वास्तुशास्त्र में घर में शौचालय का निर्माण दक्षिण या फिर पश्चिम दिशा में ही करने के लिए कहा गया है.

इस दिशा में शौचालय का निर्माण करने से व्यक्ति अपनी फालतू की और कष्टकारी चीजों का विसर्जन करता है. इसीलिए खराब एनर्जी वाली जगह पर शौचालय का निर्माण करवाया जाता है.

वास्तु के अनुसार शौचालय न निर्माण करने के नुकसान | Disadvantages of not constructing toilets according to Vastu

अगर आपके घर में वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है या फिर आप घर बनाते समय वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखते हुए शौचालय का निर्माण नहीं करते हैं, तो ऐसा होने से आपके घर के लोगों के बीच मनमुटाव हो सकता है. इसके अलावा जो लोग शादीशुदा हैं, उनकी शादीशुदा जिंदगी में भी परेशानियां पैदा हो सकती हैं.

marriage

इसके अलावा आपको अपने धंधे में नुकसान हो सकता है या फिर अगर आप नौकरी करते हैं, तो आपको उसमें भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसके साथ ही परिवार के लोग बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं, साथ ही उस घर में बरकत भी नहीं हो सकती है.

शौचालय से संबंधित वास्तु टिप्स | Vastu tips related to toilet

अभी तक आपने जाना की वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय किस दिशा में होना चाहिए. आइए अब हम आपको शौचालय से संबंधित कुछ वास्तु टिप्स दे देते हैं, जो इस प्रकार है :

toilet

  1. शौचालय बनवाते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों के कारण नेगेटिव एनर्जी पैदा नहीं होनी चाहिए. अगर ऐसा होता है, तो आपके घर के सदस्य बीमार हो सकते हैं.
  2. आपको अपने घर में टॉयलेट और बाथरूम को एक साथ ही बनाना चाहिए. ऐसा करने से वास्तु शास्त्र का दोष नहीं होता है और अगर आप इन्हें अलग-अलग बनवाते हैं, तो ऐसा करने से आपको वास्तु शास्त्र से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
  3. घर में शौचालय का निर्माण करने के लिए आपको हमेशा नेगेटिव एनर्जी वाली जगह ही चुननी चाहिए.
  4. आपको कभी भी अपने घर में शौचालय का निर्माण घर के मुख्य दरवाजे के अगल-बगल नहीं करवाना चाहिए. ऐसा करने से आपके घर में नेगेटिव एनर्जी आती है, जो आपके लिए हानिकारक साबित हो सकती है.
  5. आपको कभी भी अपने घर में शौचालय और नहाने के स्थान को अगल-बगल नहीं बनाना चाहिए.
  6. आपको अपने घर में नहाने का स्थान हमेशा घर के पूरब दिशा में ही बनाना चाहिए और शौचालय का निर्माण हमेशा वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम या दक्षिण दिशा में करवाना चाहिए.

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