संपूर्ण अर्गला स्तोत्रम इन हिंदी सही पाठ विधि और 5 लाभ | argala stotram in hindi

अर्गला स्तोत्रम इन हिंदी | Argala stotram in hindi : हेलो दोस्तो नमस्कार स्वागत है आपका हमारे आज के इस नए लेख में आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से argala stotram in hindi के बारे में बताने वाले हैं हमारे हिंदू धर्म के अनुसार अर्गला स्तोत्रम का पाठ नवरात्रि के पर्व पर किया जाता है नवरात्रि के पर्व को हमारे हिंदू धर्म में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है.



नवरात्रि का त्योहार साल में 4 बार मनाया जाता है लेकिन शास्त्रों के मुताबिक चैत्र और आश्विन की नवरात्रि मुख्य रूप से मनाई जाती है इस नवरात्रि में माता के भक्तों मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं मुख्य रूप से नवरात्रि 9 दिन की होती है लेकिन कई बार 8 दिन की भी होती है जो नवरात्रि अश्विन महीने में पढ़ती है वह नवरात्रि पूरे नव दिन की होती है.

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इस नवरात्रि में मां दुर्गा के अलावा अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है जिसकी वजह से हमारे घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है। ऐसे में अगर मां दुर्गा या फिर उनके अन्य रूपों के भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं तो उन्हें मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और उसी की वजह से उनके घर में सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं ऐसे में अगर मां दुर्गा के भक्त दुर्गा सप्तशती और देवी कवच के साथ अर्गला स्तोत्रम का पाठ पूरे विधि विधान पूर्वक करते हैं.

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तो उन्हें माता का आशीर्वाद अधिक प्राप्त होता है। ऐसे में अगर कोई भी व्यक्ति मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए नवरात्रि के दिनों का व्रत रखता है तो उसे नवरात्रि के नव दिन अर्गला स्तोत्रम का पाठ अवश्य करना चाहिए इसीलिए आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से argala stotram in hindi के बारे में बताने वाले हैं.

इसके अलावा अर्गला स्तोत्रम का पाठ करने की विधि क्या है अर्गला स्तोत्रम के लाभ क्या है इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे अगर आप में से कोई भी व्यक्ति नवरात्रि का व्रत रख रहा है तो वह इस स्त्रोत को अवश्य पढ़ें अगर आप इनके फायदों के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें


अर्गला स्तोत्रम क्या है ? | Argala stotram kya hai ?

आज हम आप लोगों को नवरात्रि की पूजा के साथ उस में किए जाने वाले मंत्र जाप स्त्रोतम के बारे में बताएंगे अगर आप में से कोई भी व्यक्ति नवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे अर्गला स्तोत्रम का पाठ अवश्य करना चाहिए इस स्त्रोतम में आपको देवी माहात्म्य को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप करने के बारे में मिलेगा देवी अर्गला का पाठ देवी कवचम के बाद और कीलकम् के पहले किया जाता है.

Durga

क्या आप जानते हैं कि देवी अर्गला कितनी शक्तिशाली है इन्हें शक्ति के रूप में व्यक्त किया गया है देवी अर्गला को चंडी पाठ का हिस्सा माना गया है अगर आप में से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में मनोवांछित फल , अन्न-धन ,सुख समृद्धि , वस्त्र यश आदि की प्राप्ति करना चाहता है तो उसे दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सर्वदा लाभकारी होता है।

अगर कोई भी व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर पा रहा है तो उसे कीलक स्तोत्रम, देवी कवच या अर्गलास्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए ऐसा करने से देवी भगवती प्रसन्न हो जाती हैं।

अर्गला स्तोत्रम इन हिंदी | Argala stotram in hindi

॥ अथार्गलास्तोत्रम् ॥
ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः

श्रीमहालक्ष्मीर्देवता श्रीजगदम्बाप्रीतयेसप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥

ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

मार्कण्डेय उवाच
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥2॥
मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नमः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥3॥
महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां सुखदे नमः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥
रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥5॥
शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥6॥
वन्दिताङ्‌घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥7॥
अचिन्त्यरुपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥8॥
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥9॥
स्तुवद्‌भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥10॥
चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥11॥
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥12॥
विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥13॥
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥14॥
सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥15॥
विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥16॥
प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥17॥
चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥18॥
कृष्णेन संस्तुते देवि शश्‍वद्भक्त्या सदाम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥19॥
हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥20॥
इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥21॥
देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥22॥
देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥23॥
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥24॥
इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।
स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति सम्पदाम्॥25॥

॥ इति देव्या अर्गलास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

अर्गला स्तोत्रम पाठ विधि | Argala stotram paath vidhi

Durga

अगर आप में से कोई भी व्यक्ति नवरात्रि के दिनों में 9 दिनों तक अर्गला स्तोत्रम का पाठ करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको इसकी संपूर्ण विधि जानने की आवश्यकता होती है

  1. अर्गला स्तोत्रम का पाठ करने के लिए आपको सबसे पहले सरसों या फिर तिल के तेल का मां दुर्गा के सामने दीपक जलाना है.
  2. उसके बाद अर्गला स्तोत्रम का पाठ करते हुए चामुंडा देवी का ध्यान करना है और अपने मन ही मन में उन्हें पुकारते रहे.
  3. उसके बाद आपको मां दुर्गा या फिर देवी भगवती के सामने अर्गला स्तोत्रम का पाठ करने का संकल्प लेना है देवी के समक्ष अपनी इच्छा को व्यक्त करना है.
  4. अर्गला स्तोत्रम का पाठ करते समय तांत्रिक चीजों का उपयोग ना करें वरना मंत्र शक्ति का प्रयोग करे.
  5. अर्गला स्तोत्रम का पाठ आपको कम से कम 3 या फिर 7 बार करना है.
  6. अर्गला स्तोत्रम का पाठ करने के बाद यज्ञ करना है और उस यज्ञ में काले तिल से आहुति देनी है और उसके बाद शहद की आहुति देनी है.
  7. अर्गला स्तोत्रम का पाठ प्रातः काल या फिर रात के समय किया जाता है.

अर्गला स्तोत्रम के लाभ | Argala stotram ke labh

Durga

अगर आप में से कोई भी व्यक्ति नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा का व्रत रखता है तो उसे अर्गला स्तोत्रम का पाठ अवश्य करना चाहिए लेकिन आज हम आपको उस स्त्रोत का पाठ करने के लाभ के बारे में जानकारी देंगे कि इस स्त्रोत का पाठ करने से कौन सा लाभ मिलता है।

  1. अगर कोई व्यक्ति नवरात्रि के दिनों में अर्गला स्तोत्रम का पाठ करता है तो उसे एक अलग प्रकार की ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा अगर आप नवरात्रि के 9 दिन तक प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं या फिर दुर्गा कवच का पाठ करते हैं तो आपकी ऊर्जा प्रणाली मजबूत होने लगती है और आपके दैनिक जीवन में लाभ प्राप्त होता है।
  2. कहते हैं अगर कोई व्यक्ति नवरात्रि के 9 दिन तक अर्गला स्तोत्रम का पाठ करें तो उसके जीवन में ढेर सारा धन सफलता एवं सुख समृद्धि प्राप्त होती है उसका व्यापार बढ़ने लगता है नौकरी में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हूं इसीलिए आप स्त्रोतम का पाठ अवश्य करें।
  3. हमारे हिंदू धर्म के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई भी व्यक्ति नवरात्रि के दिनों में 9 दिन तक अर्गला स्तोत्रम का पाठ करता है तो उस व्यक्ति का शरीर स्वस्थ रहता है और दिमाग भी तेज चलने लगता है और उसके साथ उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है और उसका जीवन सफलता के योग्य हो जाता है।
  4. वैसे तो मां दुर्गा बहुत ही शक्तिशाली है अगर आप में से कोई भी व्यक्ति नवरात्रि के दिनों में दुर्गा कवच या दुर्गा चालीसा का पाठ करता है तो वही बहुत महत्वपूर्ण होता है लेकिन अगर आप इसके साथ नियमित रूप से अर्गला स्तोत्रम का पाठ कर लेते हैं तो आपको मां दुर्गा का आशीष अधिक प्राप्त होता है।
  5. ऐसा कहते हैं कि नवरात्रि के 9 दिन माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है अगर कोई व्यक्ति नवरात्रि के नव दिन तक माता के लिए व्रत रखता है या फिर पूजा पाठ प्रतिदिन करता है तो उस व्यक्ति को नवरात्रि में अर्गला स्तोत्रम का पाठ अवश्य करना चाहिए इस स्त्रोत का पाठ करने से आपके जीवन में बदलाव आने लगता है।

अर्गला स्तोत्र के नुकसान | Argala stotra ka nuksan

अर्गला स्तोत्रम का पाठ करने के कोई भी नुकसान अभी तक नहीं देखे गए हैं क्योंकि यह स्त्रोतम मां दुर्गा से जुड़ा है.

FAQ : argala stotram in hindi

दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें?

अगर कोई भी व्यक्ति इस दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहता है तो उसे दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने के लिए सबसे पहले पुस्तक को लाल कपड़े में बांधकर उसके ऊपर अक्षत और फूल चढ़ाने हैं उसके बाद उस पुस्तक की पूजा करनी है और उसके बाद उसे खोलकर पढ़ना शुरू करना है।

दुर्गा सप्तशती पढ़ने से क्या लाभ होता है?

अगर आपने से कोई भी व्यक्ति यह जानना चाहता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से कौन-कौन से लाभ प्राप्त होते हैं तो हम आपको बता दें कि दुर्गा सप्तशती बहुत महत्वपूर्ण है मां दुर्गा को विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है ऐसे में अगर आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं तो आपके जीवन में सुख समृद्धि , मनोवांछित फल की प्राप्ति, धन धान्य , मान सम्मान आदि की प्राप्ति अवश्य होती हैं।

दुर्गा सप्तशती का पाठ कितने बजे करना चाहिए?

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि दुर्गा सप्तशती का पाठ कितने बजे करना चाहिए तो पुराणों के अनुसार ऐसा बताया गया है कि अगर गुरुवार के दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाए तो शुभ माना जाता है इस दिन सो दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से दो लाख माता चंडी के पाठ को करने जितना फल मिलता है।

निष्कर्ष

दोस्तों जैसा कि आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से argala stotram in hindi के बारे में जानकारी दें इसके अलावा अर्गला स्तोत्रम की पाठ विधि और अर्गला स्तोत्रम के कौन से लाभ है इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है अगर आपने हमारे इस लेख को अच्छे से पढ़ा है.

तो आपको इन सारे विषयों के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई होगी उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित हुई होगी।

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