दूरदर्शन सिद्धि क्या है ? दुनिया में कुछ भी देखने वाली साधना कैसे करे ? How to do spiritual practice that sees anything in the world?

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भारतीय धर्म शास्त्रों के अनुसार यह आपने अवश्य सुना होगा कि बहुत से ऋषि पुरुष अतीत और भविष्य दोनों का ज्ञान रखते थे और अक्षरसः उसका वृतांत कहते थे। रामायण की रचनाकार महर्षि बाल्मीकि सभी जानते हैं कि उन्हें रामचरित की विषय में पूर्व और भविष्य दोनों का वृतांत राम की पुत्र लॉक उसको बताया था। इस वृतांत से यह ज्ञात होता है कि हमारे महापुरूषों को ऋषि-मुनियों को कुछ ऐसी सिद्ध प्राप्त की जिसके माध्यम से भूत और भविष्य की अनंत गहराइयों को देख सकते थे।

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एक ही स्थान पर बैठकर दूर दूर तक की हो चुकी घटनाओं तथा भविष्य में होने वाली विभिन्न घटनाओं को ज्यो का त्यों समझकर वर्णन कर देने की क्षमता को दूरदर्शन सिद्धि durdarsan siddhi कहा जाता है।

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यह छमता रामायण के बाल्मीक को प्राप्त थी  जिससे वे राम के अतीत और भविष्य के विषय में राम के पुत्र लव कुश को बताया था।
बाल्मीकि के पास दूरदर्शन सिद्धि थी।! यह पोस्ट आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है !

ईश्वर ने मानव में अपार शक्ति और अदभुत क्षमता दी है और अपार शक्ति के साथ-साथ ऐसा अंतर्मन ही दिया है जो किसी भी प्रकार के बंधनों में नहीं बधाई यदि वह चाहे तो हजारों वर्ष पूर्ण की घटनाओं को देख सकता है तथा भविष्य के गर्भ में झांक सकता है।

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अंतर्मन एक स्वतंत्र सत्ता है : The conscience is an independent entity

मनुष्य का अंतर्मन समय और दूरी के बंधन से  मुफ्त है । मानव मन का वेग इतना अधिक है कि एक ही पल में हजारों मील की यात्रा कर सकता है और घटनाओं को देखकर तुरंत बता सकता है साथ ही भविष्य में झांक कर सोने वाली घटनाओं को बता सकता है।

हमारा विज्ञान भी इस बात से सहमत हैं कि इंसान का अंतर्मन अपने आप में अद्भुत है जिसको विज्ञान आज तक ना तो समझ सका है और ना हजारों वर्ष तक समझ पाएगा।

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अंतर्मन अपने आप में स्वतंत्र है उस पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता। जाग्रत मन वर्तमान की घटनाओं में बधाने के कारण उस पर कई प्रभाव पढ़ते हैं इसलिए अंतर्मन को विशेष रुप से साधने पर दूरदर्शन सिद्धि प्राप्त हो जाती है क्योंकि सभी सिद्धियां अंतर्मन पर ही संभव है ।जब तक हमारा अंतर्मन पूर्ण रुप से एकाग्र और विचार शून्य नहीं है तब तक हम किसी भी प्रकार की सिद्धि प्राप्त नहीं कर सकते हैं।

दूरदर्शन सिद्धि कैसे सिद्ध करे ? दूरदर्शन सिद्धि कैसे प्राप्त करे ? How to achieve Doordarshan accomplishment?

दूरदर्शन सिद्धि Doordarshan siddhi कर्ण पिशाचिनी सिद्धि के द्वारा संभव करते हैं परंतु यह सिद्धि अघोर विद्या हे जिसमें किसी मृत आत्मा को वश में कर के दूर-दूर की घटनाओं का अनुभव किया जाता है इस साधना में भूतकाल की घटनाओं का अनुभव किया जाता है परंतु भविष्य में झांकना संभव नहीं है। पिशाचनी सिद्धि अपने आप में काफी खतरनाक भी है इसलिए इससे भी से दूर रहना ज्यादा उचित है।

दूरदर्शन सिद्धि सम्मोहन से ही संभव है जिसके द्वारा हम अंतर्मन को जागृत कर  भूत और भविष्य को भली प्रकार से जान सकते हैं। इस प्रकार से सिद्धि करने से किसी भी मृत आत्मा का आह्वान नहीं किया जाता है और ना ही किसी अघोर साधना में लिप्त होना पड़ता है।

दूरदर्शन सिद्धि करने के लिए किसी स्थान पर आसन लगाकर अपने मन को एकाग्र करने का प्रेत न करें अभ्यास करते समय इधर-उधर मन को भटकने से रोकने का प्रयास करें।

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दूरदर्शन साधना करने के लिए क्या करे ? What to do for Doordarshan practice?

  1. आठ इंच लंबा और है इंच चौड़ा कांच का टुकड़े को लेकर उसके एक तल को कपूर के धुएं से पूरी तरह से काला कर दें।
  2. अब इस कांच के टुकडे को लगभग दो फुट की दूरी पर किसी मेज पर दीवार के सहारे रखदें।
  3. ध्यान रहे कि काला तल आपकी तरस रहे।
  4. अब आप आसन बिछाकर स्वस्थ मन से बैठ जाएं और कांच के टुकडे को इतनी ऊंचाई पर रखें कि आंखों के सामने रहे।
  5. इसके बाद कांच के टुकडे के सामने एक दीपक जला दे।
  6. यह साधना कमरे के अंदर करें कमरे की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह से बंद कर दे।
  7. कांच के टुकडे की सामने एक दीपक जलाकर उसकी लौ पर शांत चित् से नजर जमाएं।
  8. यह बात ध्यान रहे साधना करते समय आपकी नजर लौ पर रहे तथा आपको लौ के अलावा कुछ न दिखाई दे।
  9. जब इस प्रकार से अपनी नजरें  दीपक की लव पर रख रहे हैं तो अपनी सांसो को धीरे-धीरे अंदर बाहर गहराई से करें अर्थात श्वसन क्रिया को संयमित रखें।
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इस प्रकार प्रतिदिन अभ्यास करने से कुछ दिनों बाद कांच का काला तल प्रकाशित दिखाई देगा सही मायनों में यह प्रकाश आपके अंतर्मन का प्रकाश होता है।! यह पोस्ट आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है !

यदि यह अभ्यास प्रतिदिन करते हैं तो एक दिन आपको कांच के टुकडे में कुछ दृश्य दिखाई देने लगेंगे ।जब ऐसी स्थिति आ जाए तो आपको सावधान रहना है क्योंकि अंतर्मन और बहिर्मन दोनो एक दूसरे से संपर्क कर रहे होते हैं।

जब ऐसी स्थिति का जाए तब वाह्य मन अंतर्मन को संदेश देता है अब इस समय आप अपने मन में जो दूरदर्शन करना चाहते हैं उसके विषय में सोचें आप देखेंगे तो आपको वह वस्तु दिखाई देने लगेगी जिसे आपने सोचा है।जैसे आप इस समय यह देखने का प्रयास करें कि इंडिया गेट पर क्या हो रहा है आप आश्चर्यचकित हो जाएंगी की आपको इंडिया गेट का सारा नजारा दिखाई देने लगेगा। इसमें आपकी आंखों का कोई रोल नहीं होता बल्कि आंखें बंद कर देने के बाद भी दृश्य आपको दिखाई देगा।

जब यह साधना आपकी सिद्ध हो जा रही है तो आप कांच के टुकडे का प्रयोग करें या ना करें, क्योंकि कांच का टुकड़ा केवल प्रारंभिक अभ्यास के लिए होता है। केवल इस साधना का निरंतर अभ्यास करने की जरूरत रहती है जिसे अंतर्मन जागृत रहेगा और दूर की घटनाओं या वस्तु को देख सकता है।

इस सिद्धि के बाद आप किसी भी वक्त के सामने खड़े हैं या फोटो देखकर सारी घटनाओं को बता सकते हैं कि इसके भूत और भविष्य में क्या-क्या हुआ था।

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दूरदर्शन सिद्धि प्राप्त होने के बाद साधकों अभ्यास की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि जैसे ही वह आसन पर बैठता है उसके चित्त के सामने भूत और भविष्य की घटनाएं प्रदर्शित होने लगती हैं।

साधना से सिद्धियां प्राप्त करने के लिए एक अच्छे गुरु की आवश्यकता होती है अर्थात बिना गुरु के किसी भी प्रकार की सिद्धि करना उचित नहीं है।

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