श्री सरस्वती यंत्र क्या है ? सरस्वती यंत्र का बीज मंत्र और स्थापना विधि क्या है ? Saraswati Yantra mantra


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Sri saraswati yantra kya hai ? saraswati yantra sthapana vidhi ?  विद्या की देवी सरस्वती को ज्ञान विद्या सत्य संगीत कला आदि की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है भारतीय मूल के सभी धर्मों में मां सरस्वती का महत्वपूर्ण स्थान है। saraswati yantra ka mantra kya hota hai ?
मां सरस्वती में भावना और संवेदना तथा विचारणा का त्रिविध संबंध में है मां सरस्वती के हाथ में वीणा संगीत का पुस्तक विचारणा का और हंस वाहन कला की अभिव्यक्ति को प्रस्तुत करता है |

मां सरस्वती का मनन मनन करने से व्यक्ति में बुद्धि विद्या और ज्ञान प्राप्त होता है बुद्धि वर्चस्व को बढ़ाने वाली मां सरस्वती की विशेष कृपा होती है। शिक्षा के क्षेत्र में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म समारोह मनाया जाता है |

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मां सरस्वती के 1 मुख चार हाथ हैं मुस्कान से उल्लास दो हाथों में वीणा भाव संचार और कलात्मकता का प्रतीक होती है और पुस्तक से ज्ञान और माला से इस निष्ठा सात्विकता का बोध होता है इनका वाहन राजहंस माना जाता है उनके हाथों में वीणा वेद ग्रंथ और स्फटिक माला होती है। शिक्षा क्षेत्र में और ज्ञान के क्षेत्र में मां सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम की जाती है।

वैदिक ज्योतिष में सरस्वती यंत्र का उपयोग बौद्धिक शक्ति एकाग्रता ज्ञान और रचनात्मक शक्ति को प्रदान करने वाला माना जाता है मां सरस्वती प्रसन्न होकर कृपा दृष्टि करती हैं इसलिए मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने हेतु सरस्वती यंत्र की पूजा करनी चाहिए |

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जो लोग साहित्य जगत से जुड़े होते हैं या विद्यार्थी वर्ग सरस्वती यंत्र की पूजा करते हैं तो ऐसे लोगों पर मां सरस्वती की अपार कृपा होती हैं।


बहुत से विद्यार्थी पढ़ने के बाद भूल जाते हैं अथवा पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता है जिससे वे जीवन में हताशा महसूस करते हैं ऐसे लोगों को विद्यार्थियों को मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि प्रखर हो जाती है |

वहीं कला, संगीत और वाणी कौशल के क्षेत्र में काम करने वाले जातकों के लिए यह यंत्र काफी फलदायी होता है।

सरस्वती यंत्र के क्या क्या लाभ है ? What are the benefits of Saraswati Yantra?

मां सरस्वती की पूजा करने से आशीर्वाद प्राप्त होता है और बौद्धिक शक्ति एकाग्रता और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।

विद्यार्थियों को परीक्षा में सफल होने के लिए सरस्वती यंत्र के सामने ”ऊॅं ऐं महासरस्वत्यै नम:” का एक माला जाप करना चाहिए।

इस यंत्र को स्थापित करने से बुद्धि और एकाग्रता प्रबल होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाये समाप्त होती हैं।

जिस किसी की कुंडली में विभिन्न प्रकार के दोष होते हैं और कष्ट मिलते उन लोगों के लिए सरस्वती मंत्र यंत्र बहुत ही लाभकारी होता है।

ध्यान रखने योग्य बातें !

मां सरस्वती यंत्र की स्थापना करने और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए इसे पूरी तरह से प्रतिष्ठा और शुद्धिकरण करके विधिवत बनाया जाना चाहिए।

इस यंत्र को अनुभवी ज्योतिषी द्वारा और अभिमंत्रित करके सही दिशा में स्थापित करना चाहिए।

इस यंत्र को बुधवार के दिन और बसंत पंचमी के दिन स्थापित करने से अधिक लाभ प्राप्त होता है इसलिए से वसंत पंचमी के दिन स्थापित करना चाहिए।

यह यंत्र अनार की कलम से और अष्ट गंध की स्याही से भोजपत्र पर बनवाना लाभकारी होता है जिसे ज्ञान की देवी सरस्वती मां जल्दी प्रसन्न होती हैं।

सरस्वती यंत्र स्थापना विधि क्या है ? What is Saraswati Yantra Installation Method?

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

सरस्वती यंत्र की स्थापना सबसे पहले प्रातः काल का स्नान और दैनिक कार्य से निवृत होकर यंत्र के सामने धूप दीपक रिजल्ट करके सरस्वती यंत्र को गंगाजल कच्ची दूध से नहला कर इसके सामने 21 बार सरस्वती मंत्र जाप करना होता है।

मंत्र 

“ॐ ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै नमः। ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।।”

मंत्र स्थापित करने के बाद मा सरस्वती के सामने प्रार्थना करने से जल्दी शुभ फल प्राप्त होता है इसकी यंत्र को स्थापित करने के बाद एक निश्चित स्थान पर इसे स्थापित कर देने के बाद रोज निमित्त रुप से पूजा करना जरुरी है।

श्री सरस्वती यंत्र का बीज मंत्र क्या है ? What is the Beej Mantra of Shri Saraswati Yantra?

“ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।”

मां सरस्वती के पूजन की विधि क्या है ? माँ सरस्वती की पूजा कैसे करे ? What is the method of worshiping Maa Saraswati? How to worship Maa Saraswati?

  • ज्ञान और वाणी सभी मनुष्य के लिए अनिवार्य है इसके लिए मां सरस्वती की कृपा होना बहुत जरूरी होता है।
  • मनुष्य के साथ देवता सुर असुर सभी लोग मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं |
  • सरस्वती मां की पूजा करने से पहले मां की प्रतिमा के सामने कलश स्थापित करके गणेश जी 9 ग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए इसके बाद मौत सरस्वती की पूजा करें और आज मन स्नान माता को फूल माला सिंदूर श्रंगार आदि वस्तुएं भेंट चढ़ाते हैं।
  • मां सरस्वती सईद वस्त्र धारण करती हैं इसलिए माता के सामने सफेद वस्त्र पहने और पूजा करने के लिए पीले रंग के फल चढ़ाना होता है प्रसाद के रूप में मौसमी फल बुंदिया अर्पित करना होता है तथा खीर का भोग लगाया जाता है।

सरस्वती पूजन के लिए हवन कैसे करे ? How to do Havan for Saraswati Puja?

मां सरस्वती की पूजा तरीके लिए हवन कुंड अथवा भूमि पर सवा हाथ निसान बनाकर भूल को गुस्सा से साफ करके गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें और हवन करें हवन करते समय मां सरस्वती के नाम से

‘ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा”

इस मंत्र से एक सौ आठ बार हवन करना चाहिए।हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन का भभूत लगाएं।

माघ सुपर पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा करने के बाद षष्ठी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए।

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