संपूर्ण सूर्य देव आरती : सही समय और उचित विधि, 10 नियम और 12 लाभ | surya dev aarti : surya dev ki aarti

Surya dev aarti | सूर्य देव आरती : हेलो दोस्तों नमस्कार आज मैं इस लेख में आप लोगों को surya dev aarti के टॉपिक पर जानकारी प्रदान करूंगी. जिसमें मैं आप लोगों को सूर्य देव की सम्पूर्ण आरती बताने के साथ-साथ यह भी बताएंगे कि सूर्य देव भगवान की आरती कब, कैसे ,किस विधि के द्वारा की जाती है .



सूर्य देव आरती

ताकि आप लोग सूर्य भगवान की विधिवत आरती करके सूर्य भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करके अपने जीवन को सरल एवं सुखमय बना सके हिंदू धर्म में सूर्य भगवान को समस्त जगत का कर्ता-धर्ता माना जाता है क्योंकि समस्त देवी-देवताओं में सूर्य भगवान एकमात्र ऐसे देवता हैं. जो प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति के द्वारा बनाई गई हर एक वस्तु और प्राणियों को दर्शन देकर उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं. जिनसे सबके अंदर कार्य करने की क्षमता आती है.

शास्त्रों में बताया गया है कि रविवार के दिन सूर्य भगवान की विधिवत पूजा अर्चना करने से समस्त कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है क्योंकि सूर्य भगवान को पद, प्रतिष्ठा ,मान-सम्मान, वैभव यश और आरोग्य प्रदान करने वाले देवता माना जाते है इसीलिए उनकी विधिवत पूजा-अर्चना और उपासना का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है.

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लेकिन जिन लोगों को सूर्य भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना नहीं पता है. तो वह लोग सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती करके इनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि किसी भी भगवान की आरती को लेकर शास्त्रों में बताया गया है कि अगर किसी भी जातक को अपने पूजनीय भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना ना मालूम हो.

मगर उनकी संपूर्ण आरती की विधिवत जानकारी हो, तो आप अपने भगवान की आरती करके हमेशा के लिए उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं.क्योंकि विधिवत रूप से की गई आरती को संपूर्ण पूजा के बराबर मानी जाती है इसीलिए खास करके आपको अपने पूजनीय देवता की संपूर्ण आरती कब, कैसे की जाती है ? इसकी जानकारी होनी चाहिए. जिसकी सहायता से आप संपूर्ण पूजा के बराबर फल प्राप्त कर सकते हैं.


शास्त्रों में बताए गए आरती के इस महत्व को ध्यान में रखते हुए आज हम इस लेख में सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती को विधिवत रूप में प्रस्तुत करेंगे .ऐसे में जो भी जातक-जातिका सूर्य भगवान की आरती जानकारी को विधिवत रूप में प्राप्त करना चाहते हैं, तो कृपया करके वह लोग इस लेख को शुरू से अंत तक अवश्य पढ़ें आइए जानते हैं सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती के विषय में विस्तार से .

सूर्य देवता कौन है ? | Surya Dev kaun hai ?

वैसे तो आप सभी लोगों ने ऋग्वेद , यजुर्वेद , अथर्ववेद आदि वेदों के बारे में सुना ही होगा ऋग्वेद में भगवान सूर्य का एक विशेष महत्व है सूर्य देव के पिता का नाम ऋषि कश्यप और माता का नाम अदिति था। सूर्य देव की माता यानी कि अदिति के पुत्र को आदित्य कहा गया है 33 देवताओं में आदित्य के 12 पुत्र शामिल है। जो कि इस प्रकार हमने आपको बताए हैं।

अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र, इंद्र आदि जैसे देवता है। हमारे पूरे विश्व को भगवान सूर्य की बहुत आवश्यकता है क्योंकि पूरे विश्व की आत्मा भगवान सूर्य को कहा गया है शास्त्रों के अनुसार ऐसा कहा गया है कि पृथ्वी का जीवन सूरी के ही इशारों पर चल रहा है यह एक सर्वमान्य सत्य है वैदिक काल में भगवान सूर्य सारे जगत के कर्ताधर्ता थे।

सूर्य आरती का पाठ करने का महत्व | Surya Aarti ka paath karne ka mahatva

पंच देवताओं में से एक हमारे सूर्य देवता है सूर्य देवता को सच्चे मन से अर्घ देने पर वह जल्द ही प्रसन्न हो जाते है सूर्य देवता जब भी प्रसन्न होते हैं वह अपने भक्तों को सुख समृद्धि सेहत का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इनका आशीर्वाद मिलने पर व्यक्ति के जीवन से हर प्रकार के रोग , कष्ट तथा दुखों का नाश हो जाता है।

वैसे तो आप सभी लोग जानते होंगे कि हमारे पूरे भारत देश और पूरे विश्व में जीवन का संचालन करने वाले एकमात्र सूर्य देवता की है जिनकी वजह से हमें सुबह प्रातः काल उठकर उगता सूरज देखने को मिलता है ऐसे में आपको सूर्य देवता को नमस्कार करना चाहिए.

इसके लिए आपको प्रतिदिन सुबह प्रातः काल उठकर उगते सूरज को अर्घ देना चाहिए और उसके पश्चात सूर्य देवता की पूजा करके उनकी आरती का पाठ करना चाहिए अगर आप उनकी आरती का पाठ सच्चे मन से करते हैं तो निश्चित ही दिन दोगुनी रात चौगुनी उत्पत्ति होती है।

जिस प्रकार चंद्रमा के ना रहने पर हमें परेशानी होती है उसी प्रकार सूर्य देवता ना हो तो हमें दिन देखने को नहीं मिलेगा इसीलिए सूर्य देवता को विश्व की आत्मा कहा गया है। इसीलिए आपको पूरे विधि विधान के साथ सूर्य की उपासना करनी चाहिए इनकी उपासना करने से यस तथा कीर्ति बढ़ती है ।

हमारे हिंदू धर्म के सभी शास्त्रों में ऐसा लिखा है कि प्रतिदिन सूर्य देवता की आरती करने से हमारे सभी कार्य होने लगते हैं और हमारे घर में सुख समृद्धि आने लगती है। सूर्य भगवान की पूजा करते समय उनकी आरती का पाठ करें और सूर्य चालीसा का पाठ अवश्य करें इसका पाठ करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली होती है और पुत्र की कामना पूर्ण हो जाती है।

सूर्य देव आरती | Surya dev aarti

यहां पर एक विस्तार से सूर्य देव की संपूर्ण आरती प्रस्तुत की जा रही है जैसे,

puja

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।

जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता।

षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता॥
जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।

जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

नभमंडल के वासी, ज्योति प्रकाशक देवा
निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सबें सेवा॥

करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी।
निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी॥

हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।

यहां पर हमने सूर्य देव भगवान की संपूर्ण आरती बताई है अब हम आप लोगों को बताएंगे कि सूर्य भगवान की आरती किस समय, किस विधि के द्वारा करनी चाहिए ?

सूर्य भगवान की आरती करने का सबसे शुभ समय | Surya bhagwan ki aarti karne ka sabse shubh samay

सूर्य भगवान की आरती करने के लिए रविवार के दिन प्रातः काल (यानी कि सूर्य उदय के समय )को सबसे उत्तम समय माना जाता है क्योंकि उस समय सूर्य भगवान अपनी उपस्थिति को दर्शाते हैं.

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ऐसे में सूर्य भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन करके इनकी आरती करने से मानसिक शांति प्राप्त होने के साथ-साथ शारीरिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, कारोबार, शिक्षा क्षेत्रों में भी प्रगति हासिल होती है.

इसके अलावा जो भी जातक-जातिका चाहे तो संध्याकाल में भी इनकी आरती कर सकते हैं यानी कि सुबह और शाम दोनो टाइम सूर्य भगवान की आरती करना उत्तम और फलदाई माना गया है.

सूर्य देव की आरती करने की संपूर्ण उचित विधि | Surya dev ki aarti karne ki sampurn uchit vidhi

समस्त जगत के परम पिता के रूप में पूजनीय श्री सूर्य देव भगवान की आरती करने की संपूर्ण उचित विधि नीचे एक क्रम से दर्शाई जा रही है जैसे,

1. सूर्य देव की आरती करने के लिए सूर्य उदय से पहले उठकर अपने घर के सभी दैनिक कार्य करने के पश्चात स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें.

2. स्नान आदि से निवृत होने के बाद तांबे के पात्र में शुद्ध जल लेकर उसमें थोड़े से अक्षत, लाल पुष्प और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर सूर्य देव से संबंधित किसी एक मंत्र का अपने मन में स्मरण करते हुए उस जल को सूर्य भगवान को अर्पित करें.

3. सूर्य देव के दर्शन प्राप्त करने के पश्चात आप अपने घर की पूर्व दिशा में सूर्य देव की फोटो या चित्र लगाएं उसके बाद इनके सामने धूप दीप जलाकर इन्हें गुड़ का भोग लगाएं.

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

4. सूर्यदेव के समक्ष धूप दीप जलाने के पश्चात पूजा घर में आसन लगाकर बैठ जाएं और फिर सूर्य भगवान से संबंधित किसी एक मंत्र का 11 बार अपने मन में स्मरण करें.

यहां पर मैं सूर्य भगवान के कुछ मंत्र प्रस्तुत कर रही हूं. जिनमें से आप लोग किसी एक मंत्र का जाप कर सकते हैं.

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1. ॐ आदित्याय नमः

2. ॐ भास्कराय नमः

3. ओम सूर्याय नमः

 4. ओम सोम सूर्याय नमः

5. इन 4 मंत्रों में से आप किसी एक मंत्र का भगवान सूर्य देव का स्मरण करके 11 बार जाप करें .

6. सूर्य देव के मंत्र जाप प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब आपको सूर्य भगवान की आरती करनी है. इनकी आरती करने के लिए आप आरती की थाल में कुछ लाल पुष्प, थोड़े से अक्षत और लाल कुमकुम रख कर एक घी का दीपक जला ले.

7. आरती की थाली तैयार होने के बाद सबसे पहले आप सूर्य भगवान के समक्ष पुष्प और अक्षत अर्पित करें और फिर उन्हें कुमकुम का तिलक लगाएं और उसके पश्चात देसी घी के दीपक से सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती उच्च एवं स्पष्ट शब्दों में प्रारंभ करें.

8. सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती करने के पश्चात आप आरती को सूर्यदेव के समक्ष रख दें. उसके पश्चात सूर्य भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूजा में हुई भूल चूक के लिए क्षमा याचना मांगे फिर आपकी जो भी समस्या या मनोकामना हो उसे आप सूर्य देव भगवान के समक्ष अपने शब्दों में प्रस्तुत करें.

9. हो सके तो सूर्य भगवान की आरती करने के पश्चात सूर्य भगवान से संबंधित प्रसाद अपने पास पड़ोस और घर के लोगों को अर्पित करें और घर के लोगों को आरती कराएं, उनका आशीर्वाद ले तो आपके लिए सूर्य भगवान की आरती करना काफी फलदाई होगा.

सूर्य देव की आरती करने के लाभ | Surya dev ki aarti karne ke labh

सूर्य देव को समस्त जगत के कर्ता-धर्ता मानने के साथ-साथ सभी ग्रहों के महाराजा भी माना गया है इसीलिए सूर्य भगवान की आरती करने से ना सिर्फ मानव जीवन में आ रही समस्याएं दूर होती हैं बल्कि कुंडली में कमजोर ग्रह की स्थिति मजबूत होती है तथा इसके अलावा भी कई सारे अद्भुत लाभ प्राप्त होते हैं. जिनके विषय में नीचे बताया जा रहा है .

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1. सूर्य भगवान की आरती करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है.

2. सूर्य भगवान की आरती करने से लगभग सभी रोग ठीक होते हैं.

3. सूर्य भगवान की आरती करने से सामाजिक, राजनीतिक और शिक्षा जैसे कार्य क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती हैं.

4. सूर्य भगवान की आरती करने से जीवन में सुख, शांति ,यश, वैभव ,सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होती है.

5. सूर्य भगवान को प्रातकाल जल अर्पित करने के पश्चात इनकी आरती करने से कभी आपके घर में अंधा बालक जन्म नहीं लेगा.

6. सूर्य भगवान की आरती करने से व्यवसाय कारोबार में लाभ प्राप्त होते हैं.

7. सूर्य भगवान की आरती करने से विवाह से संबंधित समस्याएं दूर होती हैं जैसे किसी का रिश्ता नहीं तय हो रहा है तो किसी को उनके अनुकूल योग्य वर नहीं मिल रहा है तो ऐसी समस्याएं सूर्य देव भगवान की पूजा अर्चना करने से खत्म हो जाएगी.

8. सूर्य भगवान की आरती करने से सकारात्मक दैवीय ऊर्जा की प्राप्ति होती है.

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9. सूर्य भगवान की आरती करने से नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होती है.

10. सूर्य भगवान की आरती करने से सूर्य ग्रह बलवान होता है.

11. सूर्य भगवान को जल अर्पित करके इनकी आरती करने से चेहरे का तेज बढ़ता है.

12. सूर्य भगवान की प्रतिदिन आरती करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है.

मित्रों यह सूर्य भगवान की आरती करने से प्राप्त होने वाले लाभ हैं लेकिन यह लाभ आपको तभी प्राप्त होंगे. जब आप सूर्य भगवान की आरती शास्त्रों में सूर्य भगवान की आरती करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन करेंगे.

सूर्य देव आरती करने के नियम | Surya dev aarti karne ke niyam

लेकिन शायद बहुत कम लोग होंगे जो सूर्य भगवान की आरती करने के नियमों से अवगत होंगे इसीलिए मैं यहां पर सूर्य भगवान की आरती करते समय पालन किए जाने वाले सभी नियमों को एक क्रम से प्रस्तुत कर रही हूं जैसे,

1. सूर्य भगवान की आरती करने के लिए तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, स्त्री संभोग, से दूरी बरतना होगा.

2. सूर्य भगवान की आरती के समय अपने मन में क्रोध ,दूसरों के प्रति घृणा जैसी भावना बिल्कुल भी ना आने दे.

3. अपनी तुच्छ मनोकामना पूर्ति के लिए सूर्य भगवान की आरती बिल्कुल भी ना करें.

4. किसी के अहित के लिए सूर्य भगवान की आरती ना करें.

5. महिलाओं में सप्ताहिक मासिक धर्म आने पर सूर्य भगवान की आरती ना करें.

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6. सूर्य भगवान को प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होने के बाद ही जल अर्पित करने के पश्चात ही इनकी आरती करें.

7. संध्या काल में सूर्य भगवान को नमन अवश्य करें.

8. सूर्य भगवान की पूजा अर्चना व आरती करने के बाद प्रकृति के द्वारा बनाई गई किसी भी वस्तु को ठेस ना पहुंचाएं.

9. सूर्य भगवान की आरती के बाद तुरंत भोजन ना करें बल्कि आरती के आधा या 20 मिनट बाद भोजन करें.

10. सूर्य भगवान की आरती के समय महिलाएं सिंदूर, बिंदी को छोड़कर कोई भी श्रंगार ना करें.

दोस्तों यह सूर्य भगवान की आरती करने के कुछ नियम है अगर आप लोग इन नियमों का पालन करके सूर्य भगवान की आरती करते हैं तो आपको सूर्य भगवान की आरती करने से प्राप्त होने वाले सभी प्रकार के लाभ हासिल होंगे.

FAQ : Surya dev aarti

सूर्य भगवान की सवारी क्या है ?

सूर्य भगवान 7 श्वेत रंग के अश्व के द्वारा चल रहे रथ की सवारी करते हैं.

कार्यों में सफलता के लिए सूर्य देव को क्या अर्पित करना चाहिए ?

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए रविवार के दिन प्रात काल स्नान आदि से निवृत होने के पश्चात तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें गुड़हल का फूल, लाल चंदन, गुड़ और थोड़े से अक्षत मिलाकर सूर्य देव के समक्ष अर्पित करने से मनोवांछित कार्य क्षेत्र में सफलता हासिल होते हैं.

सूर्य को मीठा जल चढ़ाने से क्या होता है ?

सूर्यदेव को मीठा जल अर्पित करने से विवाह से संबंधित समस्याएं खत्म हो जाती हैं जैसे किसी को उनके अनुकूल योग्य वर या वधू नहीं प्राप्त हो रहे है ,या फिर विवाह होने में किसी प्रकार की समस्या आ रही है, इसके अलावा अगर विवाह के बाद वैवाहिक जीवन में सुख शांति नहीं है तो इन सभी समस्याओं के लिए सूर्य देव को जल अर्पित करना फलदाई माना जाता है.

निष्कर्ष

प्रिय मित्रों जैसा कि आज हमने इस लेख में surya dev aarti  के टॉपिक से संबंधित जानकारी प्रदान की है जिसमें हमने सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती जानकारी के साथ-साथ इनकी आरती करने की उचित विधि, नियम और आरती करने से प्राप्त होने वाले लाभ के विषय में सारी जानकारी बताई हैं.

ऐसे में अगर आप लोगों ने इस लेख को शुरू से अंत तक पढ़ा होगा तो आप लोगों को surya dev aarti के टॉपिक से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई होगी. जिसे पढ़ने के बाद आप लोग सूर्य भगवान की संपूर्ण आरती जानने के साथ-साथ इनकी आरती करने की विधि से भी अवगत हो गए हों गए होगे .

तो दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि आप लोगों को हमारे द्वारा बताई गई surya dev aarti  की जानकारी पसंद आई होगी साथ में उपयोगी भी साबित हुई होगी.

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