संपूर्ण देवी कवच PDF Hindi/संस्कृत: सही पाठ-विधि और 5 लाभ डाऊनलोड | devi kavach pdf Download Link

देवी कवच pdf | Devi Kavach pdf : हेलो दोस्त नमस्कार स्वागत है आपका हमारे आज के इस नए लेख में आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से devi kavach pdf के बारे में बताने वाले हैं वैसे क्या आप लोग जानते हैं कि देवी कवच मां दुर्गा का कवच होता है क्योंकि दुर्गा कवच के बारे में काफी कम लोग जानते हैं.



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आज हम आप लोगों को बता दें कि मां दुर्गा का कवच का मतलब होता है , सुरक्षा घेरे में लेना वाला इस कवच के द्वारा मां दुर्गा आपको घेर में लेकर आपकी सुरक्षा करती है ऐसे में अगर कोई भी व्यक्ति दुर्गा कवच का पाठ करता है तो मां दुर्गा उस व्यक्ति को सुरक्षा घेरे में ले लेती है और इससे आपके आसपास कोई भी बुरी शक्ति नहीं भटकती है.

आपके जीवन में जितनी भी समस्याएं आती है वह सब पहले ही भाग जाती हैं क्योंकि मां दुर्गा कवच का पाठ मां दुर्गा की शक्तियों से भर पूर्ण है ऐसे में अगर आप लोग devi kavach pdf के बारे में जानकारी चाहते हैं तो आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से devi kavach pdf के बारे में भी जानकारी देने वाले हैं.

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देवी कवच pdf | Devi Kavach pdf

आज हम आप लोगों को देवी कवच के बारे में बताएंगे देवी कवच यानी कि दुर्गा कवच को कहा जाता है दुर्गा कवच को मार्कंडेय पुराण के विशेष इस लोगों का एक संग्रह कहा जाता है दुर्गा कवच दुर्गा सप्तशती का एक हिस्सा माना जाता है हमारे हिंदू धर्म में ऐसा कहा जाता है कि नवरात्रि के दिनों में जो भी भक्त श्रद्धा पूर्वक अपनी और अपने परिवार के साथ दुर्गा कवच का पाठ करता है या फिर दुर्गा सरस्वती का पाठ करता है।

Durga


तो उस व्यक्ति की मां दुर्गा रक्षा करती है इसीलिए श्री मां दुर्गा को दिव्य बलों का एक एकीकृत प्रतीक माना जाता है हमारे हिंदू धर्म में ऐसा कहा गया है कि जब महिषासुर ने मनुष्य और देवताओं के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया था तब मां दुर्गा सर्वोच्च शक्ति के रूप में पूजी गई थी.

देवी कवच पाठ कब करना चाहिए ?

अगर आपको क्या जानना चाहते हैं कि दुर्गा कवच का पाठ किस दिन और कब करना चाहिए तो वैसे हम आप लोगों को बता देगी सामान्य रूप से ऐसा कहा गया है कि दुर्गा कवच या फिर देवी कवच का पाठ करने से पहले दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है उसके बाद ही आप देवी कवच का पाठ कर सकते हैं अगर आप चाहते हैं तो आप पहले देवी कवच का पाठ भी कर सकते हैं.

लेकिन उसके पश्चात आपको दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य ही करना है देवी कवच का पाठ शुरू करने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही आवश्यक है देवी कवच का पाठ आपको पूरे नियमानुसार करना है किसी भी एक दिन का चयन करके सुबह या फिर शाम के समय देवी कवच का पाठ आप कर सकते हैं।

देवी कवच PDF | Durga Kavach PDF

हमारे द्वारा दिए गए पीडीएफ डाउनलोड लिंक पर जाकर आप बहुत ही आसानी से देवी कवच का पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं.

देवी कवच PDF | Durga Kavach PDF Download PDF

देवी कवच का पाठ कैसे करें ? | Devi Kavach Paath kaise kare ?

Durga

  1. अगर कोई व्यक्ति देवी कवच का पाठ करना चाहता है तो उस व्यक्ति को सबसे पहले किसी शब्द का चयन करना है जैसे कि देवी कवच का पाठ तो आप शुक्रवार के दिन कर सकते हैं क्योंकि शुक्रवार का दिन मां दुर्गा का होता है।
  2. तो इसके लिए आपको शुक्रवार के दिन सुबह उठकर स्नान आदि से निश्चिंत होने के बाद अपने घर के मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति को स्थापित करना है और उसके बाद मां दुर्गा को गंगाजल से छिड़काव करना है।
  3. उसके बाद मां दुर्गा के सामने फल और लाल रंग का फूल रख देना है।
  4. उसके बाद मां दुर्गा के समक्ष एक घी का दीपक जलाना है और धूपबत्ती जलानी है।
  5. उसके पश्चात देवी के बीज मंत्र का 11 बार जाप करना है।
  6. जिस समय आप मां दुर्गा के बीज मंत्र का जाप कर रहे होते हैं उस समय आपको ध्यान लगाकर मां भगवती दुर्गा कवच का पाठ शुरू कर देना है।

अथः देव्याः कवचं | दुर्गा देवी कवच | Durga Devi Kavach

Durga

ॐ नमश्चण्डिकायै।
॥मार्कण्डेय उवाच॥

ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्य चिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥1॥

॥ब्रह्मोवाच॥
अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्‌।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥2॥

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्‌॥3॥

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्‌॥4॥

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥5॥

अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥6॥

न तेषां जायते किञ्चिदशुभं रणसङ्कटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न ही॥7॥

यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।
ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥8॥

प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।
ऐन्द्री गजसमारूढा वैष्णवी गरुडासना॥9॥

माहेश्वरी वृषारूढा कौमारी शिखिवाहना।
लक्ष्मी: पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥10॥

श्वेतरूपधारा देवी ईश्वरी वृषवाहना।
ब्राह्मी हंससमारूढा सर्वाभरणभूषिता॥11।।

इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।
नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः॥12॥

दृश्यन्ते रथमारूढा देव्याः क्रोधसमाकुला:।
शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥13॥

खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च।
कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥14॥

दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च।
धारयन्त्यायुद्धानीथं देवानां च हिताय वै॥15॥

नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।
महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥16॥

त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि।
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्रि आग्नेय्यामग्निदेवता॥17॥
दक्षिणेऽवतु वाराही नैऋत्यां खङ्गधारिणी।
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥18॥

उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणी में रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥19॥

एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहाना।
जाया मे चाग्रतः पातु: विजया पातु पृष्ठतः॥20॥

अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥21॥

मालाधारी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी।
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥22॥

शंखिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले च शांकरी॥23॥

नासिकायां सुगन्दा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥24॥

दन्तान्‌ रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।
घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके॥25॥

कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमंगला।
ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥26॥

नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।
स्कन्धयोः खड्गिनी रक्षेद् बाहू में व्रजधारिणी॥27॥

हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चांगुलीषु च।
नखांछूलेश्वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्वरी॥28॥

स्तनौ रक्षेन्महादेवी मनः शोकविनाशिनी।
हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥29॥

नाभौ च कामिनी रक्षेद् गुह्यं गुह्येश्वरी तथा।
पूतना कामिका मेढ्रं गुदे महिषवाहिनी॥30॥

कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी।
जंघे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी॥31॥

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।
पादांगुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥32॥

नखान्‌ दंष्ट्राकराली च केशांश्चैवोर्ध्वकेशिनी।
रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्वरी तथा॥33॥

रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती।
अन्त्राणि कालरात्रिश्च पित्तं च मुकुटेश्वरी॥34॥

पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा।
ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसंधिषु॥35॥

शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्वरी तथा।
अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥36॥

प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्‌।
वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥37॥

रसे रूपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।
सत्त्वं रजस्तमश्चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥38॥

आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।
यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥39॥

गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके।
पुत्रान्‌ रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥40॥

पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥41॥

रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥42॥

पदमेकं न गच्छेतु यदीच्छेच्छुभमात्मनः।
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥43॥
तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयः सार्वकामिकः।
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्‌।
परमैश्वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्‌॥44॥

निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः।
त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्‌॥45॥

इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्‌।
यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥46॥

दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः।
जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः॥47॥

नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः।
स्थावरं जंगमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्‌॥48॥
अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले।

भूचराः खेचराश्चैव जलजाश्चोपदेशिकाः॥49॥
सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा।

अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाः॥50॥
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्षगन्धर्वराक्षसाः।

ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः॥51॥
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते।

मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्‌॥52॥
यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले।
जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥53॥

यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्‌।

तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥54॥
देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्‌।

प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥55॥
लभते परमं रूपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥56॥

॥ इति देव्याः कवचं संपूर्णम्‌ ॥

देवी कवच पाठ के लाभ | Durga Kavach Paath ke labh

  1. अगर कोई भी व्यक्ति देवी कवच का पाठ करता है तो उस व्यक्ति को भूत प्रेत आदि की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है इस पाठ को करने से भूत प्रेत आदि हमारे आसपास नहीं भटकते हैं।
  2. ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी भी व्यक्ति के ऊपर भूत प्रेत आदि का साया होता है तो उस व्यक्ति को देवी कवच का पाठ करना चाहिए इस कवच से बुरी शक्तियों का निवारण हो जाता है।
  3. हमारे हिंदू धर्म के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि देवी कवच का पाठ करने से हमारे आसपास मां दुर्गा हमारी रक्षा करती रहती है जिससे हम सभी प्रकार की समस्याओं से बचते रहते हैं।
  4. शास्त्रों के मुताबिक ऐसा कहा गया है कि जब हम ज्यादा दिन तक अपने घर में धार्मिक अनुष्ठान को नहीं करते हैं या फिर किसी भी प्रकार का पूजा पाठ नहीं करते हैं तो हमारे घर के आसपास बुरी आत्माएं प्रकट हो जाती हैं ऐसे में हम सभी लोगों को बुरी आत्माओं से छुटकारा पाने के लिए देवी कवच का पाठ करना चाहिए इनका पाठ करने से विभिन्न प्रकार की बुरी आत्माएं नष्ट हो जाती है।
  5. देवी कवच का पाठ करने से हमारे दुश्मनों से हमें छुटकारा प्राप्त हो जाता है क्योंकि देवी हमारे शत्रुओं का नाश कर देती है.

FAQ : devi kavach pdf

देवी कवच का पाठ कैसे करें?

  • अगर कोई भी व्यक्ति देवी कवच का पाठ करना चाहता है तो उसे सबसे पहले सबसे सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करना चाहिए।
  • अगर वह इस पाठ को नहीं कर पा रहा है तो किसी भी मंत्र को 3 बार पढ़कर देवी कवच का पाठ करना है।
  • अगर किसी व्यक्ति को असाध्य रोग है तो उस स्थिति में उस व्यक्ति को देवी कवच तीन बार पढ़ना चाहिए।
  • उसके बाद अंत में उस व्यक्ति को देवी सूक्तम का पाठ अवश्य करना चाहिए।

दुर्गा कवच कितने दिन में सिद्ध होता है?

अगर बात की जाएगी दुर्गा कवच कितने दिन में सिद्ध हो जाता है तो काफी रिसर्च के मुताबिक शास्त्रों के मुताबिक ऐसा कहा जाता है कि 9 दिन में दुर्गा कवच सिद्ध हो जाता है दुर्गा कवच को सिद्ध करने के लिए 1 वर्ष भी लग जाता है।

देवी का मंत्र क्या है?

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

निष्कर्ष

दोस्तों जैसा कि आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से devi kavach pdf के बारे में जानकारी दी इसके अलावा देवी कवच का पाठ कैसे करें देवी कवच का पाठ कब करना चाहिए देवी कवच पाठ करने के लाभ क्या है इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

अगर आपने हमारे इसलिए को अच्छे से पढ़ा है तो देवी कवच के बारे में आपको संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई होगी उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित हुई होगी।

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