शास्त्र अनुसार : पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए ? | Pipal ke ped ki kitane parikrama karani chaahiye

पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए | Pipal ke ped ki kitane parikrama karani chaahiye : हेलो दोस्तों नमस्कार स्वागत है आपका हमारे आज के इस नए लेख में आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए इसके बारे में जानकारी देंगे हिंदू धर्म के अनुसार पीपल का वृक्ष सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.



यहां तक कि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में पीपल के वृक्ष के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें लिखी हैं गीता के अनुसार पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और कृष्ण भगवान का वास होता है.

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हमारे कुछ दर्शकों ने ऐसा प्रश्न किया है कि पीपल के पेड़ की कितनी  परिक्रमा करनी चाहिए तो मैं आपको बता दूं कि यह सवाल काफी रोचक है अगर आप भी पीपल के वृक्ष में दिया जलाते हैं अथवा पीपल के वृक्ष की पूजा करते हैं तो भगवान नारायण की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी लेकिन उस दौरान आपको यह जानकारी होना आवश्यक है कि पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए.

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पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए या फिर पीपल की पूजा सुबह कितने बजे करनी चाहिए इन सारे विषयों के बारे में बेसिक ज्ञान होना आवश्यक है इसीलिए आज हम आपको इस लेख में पीपल के वृक्ष से जुड़ी धार्मिक एवं रहस्यमई जानकारी देने वाले हैं अगर आपको पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए.

पीपल के वृक्ष की पूजा का महत्व उसके फायदे और पीपल के वृक्ष की पूजा कैसे करें इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी चाहिए तो आप हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें ताकि आप लोगों को इन सारे विषयों के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके.


पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए ? | Pipal ke ped ki kitane parikrama karani chaahiye ?

Pipal

पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप होता है इसमें माता लक्ष्मी भी निवास करती हैं इसीलिए पीपल के वृक्ष की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए वैसे शास्त्रों के मुताबिक कहा गया है कि पीपल के वृक्ष की चार बार परिक्रमा भी की जा सकती है क्योंकि इसमें भगवान नारायण का स्वरूप होता है।

पीपल पर जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए ?

अगर आप लोग पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाते समय मंत्र बोलना चाहते हैं तो हम आप लोगों को बता दें कि पीपल में जल चढ़ाते समय नीचे दिए गए मंत्र का जाप किया जाता है क्या आप लोग जानते हैं कि पीपल के वृक्ष में किसका वास होता है पीपल का वृक्ष नारायण का स्वरूप माना जाता है पीपल के वृक्ष में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है.

इसीलिए आपको पीपल के वृक्ष में गुरुवार के दिन अथवा अमावस्या पूर्णिमा के दिन जल चढ़ाने से नारायण भगवान के साथ माता लक्ष्मी का असीम आशीर्वाद प्राप्त होता है पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाते समय माता लक्ष्मी अथवा नारायण के मंत्रों का उच्चारण किया जाता है पीपल में जल चढ़ाने का मंत्र इस प्रकार है:

ॐ श्री- अश्वत्थवृक्षाय नमः

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।

अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नम:।।

आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्।

( यह लेख आप OSir.in वेबसाइट पर पढ़ रहे है अधिक जानकारी के लिए OSir.in पर जाये  )

देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।

पीपल की 108 परिक्रमा का विशेष फल

Pipal

शास्त्रों के मुताबिक ऐसा कहा जाता है कि किसी विशेष कामना के लिए पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए यद्यपि अगर कोई व्यक्ति पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करता है तो उसके सभी पाप दूर हो जाते हैं और वह निष्पाप कहलाता है ऐसे में भगवान नारायण के भक्त 108 बार परिक्रमा करके सभी प्रकार की वस्तुओं को प्राप्त कर सकते हैं।

पीपल की परिक्रमा लगाने से क्या होता है ?

शास्त्रों के मुताबिक ऐसा बताया गया है कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है इसीलिए पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने से मात्र व्यक्ति को भगवान नारायण के परम पद प्राप्त होते हैं,

उस व्यक्ति की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने का एक विशेष महत्व बताया गया है पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने से शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है अथवा पित्र दोष भी दूर हो जाता है पीपल के वृक्ष से जीवन में धन सुख – समृद्धि एवं माता लक्ष्मी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है.

पीपल की 108 परिक्रमा लगाने के फायदे | pipal ki 108 parikrama lagane ke fayde

हमारे हिंदू धर्म के अनुसार पीपल के वृक्ष को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है ऐसे में अगर कोई भी व्यक्ति पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करता है तो उसके पांच लाभ बताए गए हैं जो कि हमने आपको नीचे बताए हैं.

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  1. अगर कोई भी व्यक्ति पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करता है तो पुराण के अनुसार पीपल के वृक्ष में सभी देवी देवताओं का वास होता है पीपल के वृक्ष के नीचे ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में पाया जाता है पीपल का वृक्ष तीन स्थितियों का संतुलन बनाकर रखता है.
  2. शास्त्रों के मुताबिक हमने पढ़ा है कि पीपल की पूजा का प्रचलन प्राचीन काल से ही चला आ रहा है इस वृक्ष से मानसिक शांति भी प्राप्त होती है.
  3. हिंदू धर्म के अनुसार ऐसा कहा गया है कि मंगल मूरत में पीपल के वृक्ष की नित्य तीन बार परिक्रमा करने और जल चढ़ाने पर दरिद्रता दुख और दुर्भाग्य का विनाश हो जाता है धन की प्राप्ति होती है.
  4. पीपल के वृक्ष के दर्शन पूजा से दीर्घायु तथा सुख शांति समृद्धि प्राप्त होती है.
  5. पीपल के वृक्ष के नीचे व्रत अनुष्ठान से कन्या अखंड सौभाग्य की प्राप्ति कर पाती है.
  6. शास्त्रों के मुताबिक शनिवार के दिन अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा तथा उसकी सात बार परिक्रमा करने के साथ काले तिल से युक्त सरसों के तेल से दीपक जलाने पर शनि की पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है.
  7. हिंदू धर्म के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि श्रावण मास में अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा परिक्रमा करने से सभी तरह के संकट दूर हो जाते हैं.

पीपल की पूजा सुबह कितने बजे करनी चाहिए ?

अगर कोई भी व्यक्ति पीपल के वृक्ष की पूजा करना चाहता है तो उस व्यक्ति को पीपल की पूजा करने का सही समय पता होना चाहिए अगर कोई भी व्यक्ति पीपल के वृक्ष में जल चढ़ा रहा है तो उसे विशेष बात का ध्यान रखना चाहिए कि सूर्य उदय से पहले पीपल के वृक्ष में जल नहीं चढ़ाना चाहिए सूर्य उदय से पहले पीपल के वृक्ष को देखना भी नहीं चाहिए सूर्य उदय होने के बाद ही पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना चाहिए.

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पीपल के वृक्ष की पूजा सूर्य उदय के बाद करनी चाहिए पीपल के वृक्ष की पूजा करने से पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाने से पीपल की परिक्रमा करने से घर में दरिद्रता नहीं आती है लेकिन उसके लिए आपको पीपल के वृक्ष की पूजा सूर्य उदय के बाद ही करनी है।

FAQ : पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए

पीपल की परिक्रमा करने से क्या होता है?

अगर आप लोग यह जानना चाहते हैं कि पीपल की परिक्रमा करने से क्या होता है तो हम आप लोगों को बता दें कि पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान नारायण का वास होता है इसीलिए पीपल के वृक्ष की पूजा करने से या उसकी परिक्रमा करने से समस्त कर्म बंधनों से मुक्ति मिल जाती है पीपल की परिक्रमा करने से शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है पितृदोष जैसे भी दूर हो जाता है.

पीपल की परिक्रमा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करते समय  9 बार पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें और साथ में भगवान शनि के इस मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करें.

पीपल के पेड़ में कितने बजे पूजा करना चाहिए?

पीपल के वृक्ष में सूर्य उदय के बाद ही पूजा करनी चाहिए सूर्योदय से पहले पीपल के वृक्ष को ना ही छूना चाहिए और ना ही देखना चाहिए ना ही उसकी पूजा करनी चाहिए ऐसा करने से घर में दरिद्रता चली आती है इसीलिए हमेशा सूर्योदय के बाद ही पीपल के वृक्ष की पूजा करें.

निष्कर्ष

दोस्तों जैसा कि आज हमने आप लोगों को इस लेख के माध्यम से पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए के बारे में बताया इसके अलावा पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए पीपल की 108 बार परिक्रमा करने के फायदे क्या है.

इन सारे विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी अगर आपने हमारे इस लेख को अच्छे से पढ़ा है तो आपको इन सारे विषयों के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई होगी उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित हुई होगी.

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